7 अगस्त 2026
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दिल्ली हाईकोर्ट ने मनोज कुमार झा की अग्रिम जमानत याचिका खारिज की, पुलिस की निष्क्रियता पर उठाए सवाल

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दिल्ली हाईकोर्ट ने मनोज कुमार झा की अग्रिम जमानत याचिका खारिज की, पुलिस की निष्क्रियता पर उठाए सवाल

सारांश

दिल्ली उच्च न्यायालय ने मनोज कुमार झा की जमानत याचिका खारिज करते हुए उसे 'आदतन अपराधी' करार दिया — जिस पर जज और NHAI चेयरमैन बनकर ₹80 लाख की ठगी का आरोप है। साथ ही कोर्ट ने दिल्ली पुलिस से पूछा कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद भी गिरफ्तारी क्यों नहीं हुई।

मुख्य बातें

दिल्ली उच्च न्यायालय ने 7 अगस्त 2026 को मनोज कुमार झा की अग्रिम जमानत याचिका खारिज की।
आरोपी पर सिविल सर्वेंट व पटना उच्च न्यायालय के जज बनकर गोपनीय जानकारी हासिल करने का आरोप।
गुरुग्राम में NHAI चेयरमैन की पहचान धारण कर एक व्यक्ति से ₹80 लाख की धोखाधड़ी का मामला भी दर्ज।
न्यायमूर्ति गिरीश कथपालिया ने दिल्ली पुलिस से पूछा कि 8 सितंबर 2025 को SLP खारिज होने के बाद भी गिरफ्तारी क्यों नहीं हुई।
हरियाणा, बिहार, पंजाब और चंडीगढ़ में भी आरोपी के विरुद्ध अनेक एफआईआर दर्ज हैं।
आदेश की प्रति संबंधित DCP को 'आवश्यक कार्रवाई' हेतु भेजी गई।

दिल्ली उच्च न्यायालय ने 7 अगस्त 2026 को मनोज कुमार झा की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी — वह व्यक्ति जिस पर वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों और न्यायाधीशों की पहचान धारण कर संवेदनशील एवं गोपनीय जानकारी हासिल करने का आरोप है। न्यायालय ने साथ ही दिल्ली पुलिस से यह भी पूछा कि सर्वोच्च न्यायालय सहित कई बार जमानत याचिकाएँ खारिज होने के बावजूद आरोपी को अब तक गिरफ्तार क्यों नहीं किया गया।

मुख्य घटनाक्रम

न्यायमूर्ति गिरीश कथपालिया की एकल-न्यायाधीश पीठ ने अपने आदेश में कहा कि आरोपी 'आदतन अपराधी' प्रतीत होता है। न्यायालय ने यह भी दर्ज किया कि सर्वोच्च न्यायालय पहले ही अग्रिम जमानत देने से इनकार कर चुका है और तब से परिस्थितियों में कोई बदलाव नहीं आया है। आदेश की एक प्रति संबंधित उप-पुलिस आयुक्त (DCP) को 'आवश्यक कार्रवाई' के निर्देश के साथ भेजी गई है।

आरोपों का विवरण

अभियोजन पक्ष के अनुसार, झा ने सिविल सर्वेंट बनकर अनेक वरिष्ठ अधिकारियों से गोपनीय जानकारी हासिल करने की कोशिश की। उन पर पटना उच्च न्यायालय के न्यायाधीश होने का नाटक करने का भी आरोप है। इसके अतिरिक्त, गुरुग्राम में एक मामले में उन्होंने कथित तौर पर भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) का चेयरमैन बनकर एक व्यक्ति से ₹80 लाख की धोखाधड़ी की। यह मामला 2024 में पार्लियामेंट स्ट्रीट पुलिस स्टेशन में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं के तहत दर्ज एफआईआर से जुड़ा है।

पुलिस की निष्क्रियता पर न्यायालय की नाराज़गी

सुनवाई के दौरान अतिरिक्त लोक अभियोजक ने स्वयं यह चिंता व्यक्त की कि सर्वोच्च न्यायालय द्वारा 8 सितंबर 2025 को विशेष अनुमति याचिका (SLP) खारिज किए जाने के बावजूद आरोपी को गिरफ्तार करने की कोई कार्रवाई नहीं की गई। आरोपी के वकील ने तर्क दिया था कि गिरफ्तारी न होना इस बात का संकेत है कि हिरासत में पूछताछ आवश्यक नहीं समझी गई — लेकिन न्यायालय ने इस दलील को स्वीकार नहीं किया।

बहु-राज्यीय आपराधिक पृष्ठभूमि

दिल्ली उच्च न्यायालय के आदेश में यह भी दर्ज है कि आरोपी के विरुद्ध हरियाणा, बिहार, पंजाब और चंडीगढ़ में भी अनेक एफआईआर दर्ज हैं, जिनमें धोखाधड़ी, छद्म पहचान से गलत काम करना, जालसाजी और संबंधित अपराधों के आरोप शामिल हैं। यह ऐसे समय में आया है जब न्यायपालिका और प्रशासनिक तंत्र में पहचान-धोखाधड़ी के मामले पूरे देश में चिंता का विषय बनते जा रहे हैं।

आगे की राह

अग्रिम जमानत याचिका खारिज होने के साथ अब झा की गिरफ्तारी का रास्ता साफ हो गया है। संबंधित DCP को भेजे गए आदेश के बाद दिल्ली पुलिस पर कार्रवाई का दबाव है। न्यायालय के इस कड़े रुख से स्पष्ट है कि बार-बार जमानत खारिज होने के बाद भी गिरफ्तारी न करना अब न्यायिक जाँच के दायरे में आ गया है।

संपादकीय दृष्टिकोण

पुलिस की जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े करता है। न्यायपालिका और प्रशासनिक पहचान की इस तरह की नकल भारत में संस्थागत विश्वास को कमज़ोर करती है, और DCP को आदेश भेजना न्यायालय का एक असामान्य, परंतु आवश्यक कदम है।
RashtraPress
7 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मनोज कुमार झा पर क्या आरोप हैं?
मनोज कुमार झा पर सिविल सर्वेंट और पटना उच्च न्यायालय के न्यायाधीश बनकर वरिष्ठ अधिकारियों से गोपनीय जानकारी हासिल करने का आरोप है। इसके अलावा उन पर गुरुग्राम में NHAI चेयरमैन की पहचान धारण कर एक व्यक्ति से ₹80 लाख की धोखाधड़ी करने का आरोप भी है।
दिल्ली हाईकोर्ट ने अग्रिम जमानत क्यों खारिज की?
न्यायमूर्ति गिरीश कथपालिया ने आरोपी को 'आदतन अपराधी' करार देते हुए जमानत याचिका खारिज की। न्यायालय ने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय पहले ही जमानत देने से इनकार कर चुका है और परिस्थितियों में कोई बदलाव नहीं आया है।
दिल्ली पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार क्यों नहीं किया?
यह प्रश्न स्वयं दिल्ली उच्च न्यायालय ने उठाया। अभियोजन पक्ष ने माना कि 8 सितंबर 2025 को सर्वोच्च न्यायालय द्वारा SLP खारिज होने के बाद भी कोई गिरफ्तारी नहीं हुई। न्यायालय ने संबंधित DCP को आदेश की प्रति भेजकर आवश्यक कार्रवाई का निर्देश दिया है।
यह मामला किन राज्यों में फैला हुआ है?
दिल्ली उच्च न्यायालय के आदेश के अनुसार, आरोपी के विरुद्ध हरियाणा, बिहार, पंजाब और चंडीगढ़ में भी अनेक एफआईआर दर्ज हैं। इनमें धोखाधड़ी, छद्म पहचान से गलत काम करना और जालसाजी के आरोप शामिल हैं।
यह मामला किस कानून के तहत दर्ज है?
यह मामला 2024 में पार्लियामेंट स्ट्रीट पुलिस स्टेशन में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं के तहत दर्ज एफआईआर से जुड़ा है।
राष्ट्र प्रेस
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