दिल्ली हाईकोर्ट का केंद्र को नोटिस: एंटी-कैंसर दवाओं के अवैध निर्यात पर 4 हफ्ते में माँगा जवाब
सारांश
मुख्य बातें
दिल्ली हाईकोर्ट ने 20 मई 2025 को भारत में केवल घरेलू उपयोग के लिए अनुमोदित जीवनरक्षक एंटी-कैंसर दवाओं के कथित अवैध विदेश निर्यात के मामले में केंद्र सरकार सहित छह नियामक एवं प्रवर्तन एजेंसियों को नोटिस जारी किया है। अदालत ने सभी पक्षों से चार सप्ताह के भीतर लिखित जवाब माँगा है। यह मामला एक जनहित याचिका के ज़रिये उठाया गया है, जिसमें आरोप लगाया गया है कि इस अवैध व्यापार के कारण देश में कैंसर रोगियों के लिए आवश्यक दवाओं की गंभीर कमी हो रही है।
क्या है पूरा मामला
याचिकाकर्ता के अनुसार, कुछ कंपनियाँ और निर्यातक घरेलू बाज़ार से इन दवाओं को खरीदते हैं और फिर वेरिफिकेशन सिस्टम की खामियों का फायदा उठाते हुए इन्हें वैध निर्यात खेप में मिलाकर विदेश भेज देते हैं। याचिका में कहा गया है कि ये दवाएँ विशेष रूप से भारतीय कैंसर रोगियों की ज़रूरत को ध्यान में रखकर उपलब्ध कराई जाती थीं, लेकिन इस अवैध तरीके से इनका विदेश जाना मरीज़ों तक पहुँच को बाधित कर रहा है।
किन एजेंसियों को मिला नोटिस
दिल्ली हाईकोर्ट ने इस जनहित याचिका पर केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (CDSCO), विदेश व्यापार महानिदेशालय (DGFT), केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर एवं सीमा शुल्क बोर्ड (CBIC), राजस्व खुफिया निदेशालय (DRI) और जीएसटी खुफिया महानिदेशालय (DGGI) को भी नोटिस जारी किया है। ये सभी वे संस्थाएँ हैं जो दवा नियमन, सीमा शुल्क निगरानी और व्यापार अनुपालन के लिए ज़िम्मेदार हैं।
आम मरीज़ों पर असर
याचिका में तर्क दिया गया है कि इस अवैध व्यापार से न केवल कैंसर रोगियों की जान को सीधा खतरा है, बल्कि देश की समग्र दवा वितरण व्यवस्था और सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवा पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। गौरतलब है कि कैंसर की कई दवाएँ पहले से ही महँगी और सीमित उपलब्धता वाली हैं — ऐसे में उनका अवैध निर्यात आपूर्ति संकट को और गहरा कर सकता है।
अदालत ने सरकार से क्या पूछा
सुनवाई के दौरान दिल्ली हाईकोर्ट ने स्वास्थ्य मंत्रालय और संबंधित विभागों से सख्त लहजे में पूछा कि ऐसी अवैध गतिविधियों पर अब तक क्या कार्रवाई की गई है और इस तरह की गैर-कानूनी आपूर्ति को रोकने के लिए कौन-सी निगरानी व्यवस्था लागू की गई है। अदालत ने स्पष्ट किया कि केवल नीतिगत घोषणाएँ पर्याप्त नहीं हैं — ठोस प्रवर्तन तंत्र का ब्यौरा देना होगा।
आगे क्या होगा
सभी नोटिस प्राप्त एजेंसियों को चार सप्ताह के भीतर अपना जवाब दाखिल करना है, जिसके बाद मामले की अगली सुनवाई निर्धारित होगी। यह ऐसे समय में आया है जब भारत में कैंसर के मामलों की संख्या लगातार बढ़ रही है और किफायती दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करना सार्वजनिक स्वास्थ्य नीति की प्राथमिकता बनी हुई है।