दिल्ली हाईकोर्ट का पुलिस को आदेश: छात्र-कार्रवाई शिकायत बुधवार शाम 5 बजे तक केस डायरी में दर्ज हो
सारांश
मुख्य बातें
दिल्ली उच्च न्यायालय ने 29 जुलाई 2026 को संसद मार्ग थाने के एसएचओ को स्पष्ट निर्देश दिया कि छात्रों पर पुलिस कार्रवाई से संबंधित याचिकाकर्ताओं की शिकायत को बुधवार शाम 5 बजे तक केस डायरी में अनिवार्य रूप से दर्ज किया जाए। यह आदेश उस पृष्ठभूमि में आया है जब याचिकाकर्ताओं ने अदालत को बताया कि 23 जुलाई को थाने में शिकायत देने के बावजूद उन्हें अब तक न डायरी नंबर मिला, न रसीद।
याचिकाकर्ताओं की मांग और शिकायत
याचिकाकर्ताओं ने अपनी शिकायत में दिल्ली पुलिस आयुक्त अनुराग कुमार और संयुक्त पुलिस आयुक्त संदीप लांबा समेत अन्य वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के विरुद्ध एफआईआर दर्ज करने की माँग की है। याचिकाकर्ताओं के अनुसार, 23 जुलाई को संसद मार्ग थाने में शिकायत दाखिल की गई थी, परंतु पुलिस ने न तो डायरी नंबर दिया और न ही रसीद — जो कानूनी रूप से अनिवार्य प्रक्रिया है।
पुलिस का पक्ष और अदालत को भरोसा
सुनवाई के दौरान दिल्ली पुलिस ने अदालत को बताया कि उस दिन तकनीकी दिक्कतों के कारण डायरी नंबर और रसीद जारी नहीं की जा सकी। पुलिस ने अदालत को आश्वस्त किया कि याचिकाकर्ताओं को बुधवार को ही शिकायत का डायरी नंबर और रसीद उपलब्ध करा दी जाएगी। गौरतलब है कि इस तरह की तकनीकी देरी को लेकर अदालतों को पहले भी हस्तक्षेप करना पड़ा है।
जंतर-मंतर विरोध और सोशल मीडिया कार्रवाई
इससे पहले, दिल्ली पुलिस ने जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन के दौरान कथित तौर पर आपत्तिजनक पोस्ट और अभद्र भाषा के इस्तेमाल को लेकर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' के उपयोगकर्ताओं पर कार्रवाई की। पुलिस ने संबंधित एक्स यूजर्स को नोटिस जारी किए और प्लेटफॉर्म को फ्लैग किए गए पोस्ट हटाने अथवा भारत में उनकी पहुँच बंद करने का निर्देश दिया।
नोटिस में कहा गया कि संबंधित सामग्री का इस्तेमाल प्रधानमंत्री सहित प्रमुख हस्तियों की छवि धूमिल करने के उद्देश्य से किया जा रहा है, जिससे उनकी प्रतिष्ठा और सार्वजनिक गरिमा को गंभीर क्षति पहुँचने का आरोप है। पुलिस ने यह भी तर्क दिया कि ऐसी सामग्री का ऑनलाइन उपलब्ध रहना सार्वजनिक व्यवस्था पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकता है और अनावश्यक राजनीतिक विवाद को बढ़ावा दे सकता है।
एफआईआर और कानूनी धाराएँ
इस मामले में स्पेशल सेल थाने में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस), 2023 की धारा 351(3), 353(2) और 356(2) के तहत एफआईआर दर्ज की गई है। यह ऐसे समय में आया है जब छात्र आंदोलनों और उन पर पुलिस कार्रवाई को लेकर देशभर में बहस तेज हो रही है।
आगे क्या होगा
दिल्ली उच्च न्यायालय का यह निर्देश पुलिस की जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। अब देखना यह होगा कि पुलिस अदालत के निर्देश का पालन करती है या नहीं, और क्या याचिकाकर्ताओं की एफआईआर दर्ज करने की माँग पर भी कोई कार्रवाई होती है।