21 जुलाई 2026
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देशाभिमानी में वीएस अच्युतानंदन स्मृति अंक विवाद: 'कल्लन विजयन' लेख हटाया, सीपीआई(एम) में संपादकीय तनाव

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देशाभिमानी में वीएस अच्युतानंदन स्मृति अंक विवाद: 'कल्लन विजयन' लेख हटाया, सीपीआई(एम) में संपादकीय तनाव

सारांश

वी.एस. अच्युतानंदन की पहली पुण्यतिथि पर देशाभिमानी का स्मृति अंक श्रद्धांजलि की जगह विवाद बन गया। 'कल्लन विजयन' लेख के लेआउट पर संपादकीय टकराव, आखिरी समय में छपाई रोकी गई और अखबार के आधिकारिक बयान को खुद थिएटर कार्यकर्ता ने चुनौती दे दी।

मुख्य बातें

देशाभिमानी का वी.एस.
अच्युतानंदन की पहली पुण्यतिथि पर विशेष वीकेंड सप्लीमेंट संपादकीय विवाद में फँस गया।
थिएटर कार्यकर्ता 'कल्लन विजयन' पर लिखा गया लेख लेआउट संबंधी आपत्तियों के बाद आखिरी समय में हटाया गया।
अखबार के रेजिडेंट एडिटर एम.
स्वराज ने दावा किया कि ऐसा कोई लेख तैयार ही नहीं हुआ था — इस दावे को स्वयं कल्लन विजयन ने खारिज किया।
सप्लीमेंट रविवार की जगह सोमवार को प्रकाशित हुआ; देशाभिमानी ने देरी का कारण तकनीकी बताया।
संशोधित अंक में केवल श्रद्धांजलि लेख शामिल; सीपीआई(एम) की आंतरिक जाँच की संभावना।

केरल में भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) — सीपीआई(एम) — के मुखपत्र 'देशाभिमानी' का वी.एस. अच्युतानंदन स्मृति विशेष अंक हाल के वर्षों का सबसे बड़ा संपादकीय विवाद बन गया है। पूर्व मुख्यमंत्री वी.एस. अच्युतानंदन की पहली पुण्यतिथि पर प्रकाशित इस विशेष वीकेंड सप्लीमेंट से थिएटर कार्यकर्ता 'कल्लन विजयन' पर लिखा गया लेख आखिरी समय में हटा दिया गया, जिसके बाद तिरुवनंतपुरम से लेकर पार्टी के भीतर तक सवालों की बाढ़ आ गई।

विवाद की जड़: लेआउट और नाम का टकराव

विशेष अंक का शीर्षक 'मुझांगुन्नीप्पोज़हुम आ कदलारंबम' (अर्थात 'उस समुद्र की गूंज आज भी सुनाई देती है') रखा गया था। इसमें वी.एस. अच्युतानंदन के पूर्व प्रेस सचिव के.वी. सुधाकरन सहित कई लेखकों ने अपनी व्यक्तिगत यादें साझा की थीं। सप्लीमेंट के पहले और आखिरी दोनों पन्नों पर स्मारक सामग्री प्रकाशित होनी थी।

सूत्रों के अनुसार, संपादकीय टीम के कुछ सदस्यों ने लेआउट पर गंभीर आपत्ति जताई। उनकी चिंता यह थी कि अगर आखिरी पन्ने पर 'कल्लन विजयन' — जिसका मलयालम में अर्थ 'चोर विजयन' भी होता है — जैसी बड़ी हेडलाइन हो और पहले पन्ने पर वी.एस. अच्युतानंदन की तस्वीर, तो दोनों पन्नों को एक साथ दिखाकर इसे दिवंगत वरिष्ठ नेता का अपमान बताया जा सकता है।

छपाई रोकी, प्रकाशन एक दिन टला

खबरों के मुताबिक, यह मतभेद बाद में खुले संपादकीय विवाद में बदल गया। नतीजतन, रविवार को प्रकाशित होने वाला वीकेंड सप्लीमेंट आखिरी समय में रोक दिया गया और सोमवार, 21 जुलाई को संशोधित रूप में प्रकाशित हुआ। देशाभिमानी ने आधिकारिक तौर पर देरी का कारण तकनीकी समस्याएँ बताया।

हालांकि, अखबार के रेजिडेंट एडिटर एम. स्वराज ने विवाद को और गहरा कर दिया — उन्होंने दावा किया कि 'कल्लन विजयन' पर कोई लेख कभी तैयार ही नहीं किया गया था और इससे जुड़ी खबरें बेबुनियाद हैं। उन्होंने किसी संपादकीय टकराव से भी इनकार किया।

थिएटर कार्यकर्ता का खंडन

रेजिडेंट एडिटर के दावे पर जल्द ही स्वयं कल्लन विजयन ने सवाल उठाए। पुल्लमपारा के इस जाने-माने थिएटर कार्यकर्ता ने बताया कि देशाभिमानी के प्रतिनिधियों ने उनसे संपर्क किया था, उनके जीवन और काम से जुड़ी जानकारी ली थी और एक ग्रुप फोटो भी माँगी थी — जो उन्होंने उपलब्ध करा दी थी।

उन्होंने कहा कि उन्हें स्पष्ट रूप से बताया गया था कि उनका लेख वीकेंड सप्लीमेंट में प्रकाशित होगा। लेकिन उसे अचानक क्यों हटाया गया, इसकी कोई जानकारी उन्हें नहीं दी गई। इस बयान ने अखबार के आधिकारिक रुख और वास्तविकता के बीच के विरोधाभास को सार्वजनिक कर दिया।

संशोधित अंक और आंतरिक जाँच की संभावना

बढ़ती आलोचना के बाद देशाभिमानी ने सप्लीमेंट को दोबारा तैयार करने का निर्णय लिया। सोमवार को प्रकाशित संशोधित संस्करण में केवल वी.एस. अच्युतानंदन को समर्पित श्रद्धांजलि लेख शामिल हैं; 'कल्लन विजयन' पर लिखा गया लेख पूरी तरह हटा दिया गया है।

रिपोर्टों के अनुसार, अब सीपीआई(एम) इस पूरे मामले की आंतरिक जाँच कर सकती है। जाँच में यह पता लगाने की कोशिश होगी कि स्मृति अंक में 'कल्लन विजयन' पर लेख क्यों शामिल किया गया, उसे श्रद्धांजलि वाले पन्नों के साथ क्यों रखा गया, लेआउट को किसने मंजूरी दी और अखबार का आधिकारिक बयान थिएटर कार्यकर्ता के दावे से अलग क्यों है।

यह विवाद न सिर्फ एक संपादकीय चूक की कहानी है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि केरल के सबसे बड़े कम्युनिस्ट नेताओं में से एक को श्रद्धांजलि देने का अवसर एक टाले जा सकने वाले राजनीतिक और मीडिया संकट में कैसे बदल गया।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

देशाभिमानी के वीएस अच्युतानंदन स्मृति अंक में विवाद क्यों हुआ?
विवाद तब हुआ जब संपादकीय टीम के कुछ सदस्यों ने आपत्ति जताई कि अंतिम पन्ने पर 'कल्लन विजयन' (जिसका अर्थ 'चोर विजयन' भी हो सकता है) की हेडलाइन और पहले पन्ने पर वी.एस. अच्युतानंदन की तस्वीर एक साथ गलत राजनीतिक संदेश दे सकती है। इस आपत्ति के बाद आखिरी समय में छपाई रोकी गई।
'कल्लन विजयन' कौन हैं और उनका लेख क्यों हटाया गया?
कल्लन विजयन पुल्लमपारा के जाने-माने थिएटर कार्यकर्ता हैं, जिन्हें इसी नाम से पहचाना जाता है। उनका लेख इसलिए हटाया गया क्योंकि संपादकीय टीम को आशंका थी कि इस नाम को वी.एस. अच्युतानंदन की तस्वीर के साथ प्रकाशित करने पर इसे दिवंगत नेता के अपमान के रूप में पेश किया जा सकता है।
देशाभिमानी के रेजिडेंट एडिटर ने क्या कहा और उस पर विवाद क्यों हुआ?
रेजिडेंट एडिटर एम. स्वराज ने दावा किया कि 'कल्लन विजयन' पर कोई लेख कभी तैयार ही नहीं किया गया था। हालांकि, स्वयं कल्लन विजयन ने इस दावे को खारिज करते हुए कहा कि देशाभिमानी के प्रतिनिधियों ने उनसे जानकारी और फोटो माँगी थी और उन्हें प्रकाशन का आश्वासन दिया था।
संशोधित सप्लीमेंट में क्या प्रकाशित हुआ?
सोमवार को प्रकाशित संशोधित वीकेंड सप्लीमेंट में केवल वी.एस. अच्युतानंदन को समर्पित श्रद्धांजलि लेख शामिल हैं। 'कल्लन विजयन' पर लिखा गया लेख पूरी तरह हटा दिया गया है।
क्या सीपीआई(एम) इस मामले की जाँच करेगी?
रिपोर्टों के अनुसार, सीपीआई(एम) इस पूरे मामले की आंतरिक जाँच कर सकती है। जाँच में यह पता लगाने की कोशिश होगी कि लेख किसने शामिल किया, लेआउट को किसने मंजूरी दी और अखबार का आधिकारिक बयान थिएटर कार्यकर्ता के दावे से अलग क्यों है।
राष्ट्र प्रेस
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