डीजीएफटी का बड़ा फैसला: एए और ईपीसीजी योजनाओं में फिजिकल ड्यूटी चालान की अनिवार्यता खत्म, निर्यातकों को राहत
सारांश
मुख्य बातें
विदेश व्यापार महानिदेशालय (डीजीएफटी) ने 5 अगस्त 2026 को जारी ट्रेड नोटिस के ज़रिए एडवांस ऑथराइजेशन (एए) और एक्सपोर्ट प्रमोशन कैपिटल गुड्स (ईपीसीजी) योजनाओं के अंतर्गत एक्सपोर्ट ऑब्लिगेशन डिस्चार्ज सर्टिफिकेट (ईओडीसी) प्राप्त करने की प्रक्रिया में फिजिकल ड्यूटी भुगतान चालान जमा करने की अनिवार्यता समाप्त कर दी है। 1 अगस्त 2026 या उसके बाद किए गए स्वैच्छिक ड्यूटी भुगतानों पर यह नई व्यवस्था तत्काल प्रभाव से लागू होगी। वाणिज्य मंत्रालय के अनुसार, यह कदम व्यापार सुविधा के व्यापक डिजिटल परिवर्तन कार्यक्रम का हिस्सा है।
नई व्यवस्था में क्या बदला
अब कस्टम्स और आईसीईजीएटीई (ICEGATE) से प्राप्त लाइसेंस-आधारित स्वैच्छिक ड्यूटी भुगतान डेटा को डीजीएफटी की ऑनलाइन प्रणाली के साथ एपीआई-आधारित डेटा एक्सचेंज सिस्टम के माध्यम से एकीकृत कर दिया गया है। इसके तहत कस्टम्स सिस्टम से ड्यूटी भुगतान की जानकारी सीधे डीजीएफटी के ईओडीसी प्रोसेसिंग वर्कफ्लो में भेजी जाएगी।
निर्यातक अब डीजीएफटी ग्राहक पोर्टल पर अपने प्रमाणित भुगतान रिकॉर्ड देख सकेंगे और आवेदन से पहले यह सुनिश्चित कर सकेंगे कि भुगतान सही ऑथराइजेशन के साथ मैप हुआ है या नहीं। यही डेटा डीजीएफटी के क्षेत्रीय कार्यालयों के बैक-ऑफिस सिस्टम पर भी उपलब्ध रहेगा।
एमएसएमई निर्यातकों को सबसे बड़ा फायदा
वाणिज्य मंत्रालय ने बताया कि इस बदलाव से आवेदन निपटान में लगने वाला समय घटेगा, अनावश्यक पत्राचार कम होगा और विभिन्न क्षेत्रीय कार्यालयों में निर्णय प्रक्रिया अधिक पारदर्शी एवं एकसमान होगी। विशेष रूप से एमएसएमई निर्यातकों को इसका सबसे अधिक लाभ मिलने की उम्मीद है, जो अक्सर अपने स्तर पर ही ऑथराइजेशन क्लोजर की प्रक्रियाएँ पूरी करते हैं और जिनके लिए कागजी कार्रवाई का बोझ अपेक्षाकृत अधिक होता है।
मैन्युअल दस्तावेज़ जमा करने और उनकी जाँच की जगह प्रमाणित डिजिटल रिकॉर्ड अपनाने से मानवीय हस्तक्षेप कम होगा और डेटा त्रुटियों की संभावना भी घटेगी, ऐसा सरकार का मानना है।
एए और ईपीसीजी योजनाएँ: पृष्ठभूमि
एडवांस ऑथराइजेशन (एए) योजना के तहत निर्यात उत्पादों में उपयोग होने वाले कच्चे माल को शुल्क-मुक्त आयात करने की अनुमति दी जाती है। वहीं ईपीसीजी योजना के अंतर्गत निर्यात दायित्व के बदले पूँजीगत वस्तुओं का आयात रियायती या शून्य सीमा शुल्क पर किया जा सकता है।
गौरतलब है कि यदि निर्यात दायित्व पूरी तरह पूरा नहीं हो पाता, तो अधिकृत धारक बचाए गए सीमा शुल्क के अनुपात में शुल्क और ब्याज का भुगतान कर मामले को नियमित करता है और इसके बाद ईओडीसी के लिए आवेदन करता है। पहले ऐसे भुगतान का प्रमाण फिजिकल रूप में जमा करना पड़ता था और उसका सत्यापन मैन्युअल रूप से किया जाता था — अब यह पूरी तरह डिजिटल हो गया है।
व्यापार सुविधा की दिशा में व्यापक प्रयास
यह पहल डीजीएफटी द्वारा पिछले कुछ वर्षों में उठाए गए कई डिजिटलीकरण कदमों की कड़ी में नवीनतम है। सरकार का उद्देश्य एक ऐसा नियामकीय वातावरण तैयार करना है जिसमें निर्यातक कागजी प्रक्रियाओं के बजाय अपने व्यापार विस्तार और वृद्धि पर अधिक ध्यान दे सकें। यह ऐसे समय में आया है जब सरकार निर्यात लक्ष्यों को पूरा करने के लिए अनुपालन लागत घटाने पर ज़ोर दे रही है।
आने वाले समय में इस एकीकृत प्रणाली के दायरे को और विस्तार दिए जाने की संभावना है, जो निर्यात प्रक्रियाओं को और अधिक सुगम बना सकती है।