बीड़ी से जला टॉयलेट ढक्कन, RPF ने 8 दिन में पकड़ा आरोपी: बरहरवा ट्रेन आग मामले का खुलासा
सारांश
मुख्य बातें
रेलवे सुरक्षा बल (RPF) ने 29 जून 2026 को साहिबगंज स्टेशन पर उस व्यक्ति को गिरफ्तार किया जिसने 21 जून को ट्रेन संख्या 53434 डाउन (बरहरवा–आजिमगंज पैसेंजर) के दिव्यांगजन कोच के शौचालय में आग लगा दी थी। बरहरवा स्टेशन के प्लेटफॉर्म संख्या 2 से रवाना होते ही इमरजेंसी चेन खींचे जाने के बाद ट्रेन रुकी और यात्रियों में अफरा-तफरी मच गई थी।
घटनाक्रम: कैसे लगी आग
21 जून की दोपहर ट्रेन के रवाना होते ही कुछ ही मिनटों में इमरजेंसी चेन खींची गई। आरपीएफ कांस्टेबल मृत्युंजय कुमार, उपनिरीक्षक लाल बहादुर माझी और कांस्टेबल अनिल कुमार तत्काल घटनास्थल पर पहुँचे। शौचालय के भीतर पाया गया कि वेस्टर्न कमोड का फाइबर ढक्कन फर्श पर रखकर जलाया गया था। वहाँ न कोई कागज था, न कपड़ा और न ही किसी ज्वलनशील तरल पदार्थ की गंध — जिससे आग का कारण शुरुआत में पूरी तरह रहस्यमय बना रहा।
जाँच: CCTV और गेट एनालिसिस का सहारा
आरपीएफ पोस्ट बरहरवा ने अज्ञात व्यक्ति के विरुद्ध रेलवे अधिनियम की धारा 153 के तहत मामला दर्ज किया। इसके बाद अधिकारियों ने बरहरवा और साहिबगंज स्टेशनों के सीसीटीवी फुटेज की गहन जाँच की। यद्यपि संदिग्ध के ट्रेन में चढ़ने का स्पष्ट दृश्य कैमरों में उपलब्ध नहीं था, फिर भी टीम ने उसके कपड़ों के रंग और चलने की विशिष्ट शैली — गेट एनालिसिस — के आधार पर उसकी पहचान और निगरानी शुरू की। यह ऐसे समय में आया है जब रेलवे परिसरों में आगजनी की घटनाओं के त्वरित समाधान पर विशेष ज़ोर दिया जा रहा है।
गिरफ्तारी और कबूलनामा
पूर्व रेलवे के महाप्रबंधक मिलिंद देऊस्कर के मार्गदर्शन में आरपीएफ टीम ने गुप्त सूचना के आधार पर जाल बिछाया। 29 जून को वही संदिग्ध साहिबगंज स्टेशन पर उसी ट्रेन में दिखाई दिया और उसे गिरफ्तार कर लिया गया। पूछताछ में आरोपी ने स्वीकार किया कि उसने कोच के शौचालय में बीड़ी पी थी और उसे बुझाने के लिए प्लास्टिक के ढक्कन पर रगड़ा, जिससे ढक्कन में आग लग गई। घबराकर वह धीमी गति से चल रही ट्रेन से कूदकर फरार हो गया था। आरोपी को रेलवे न्यायिक मजिस्ट्रेट (RJM), साहिबगंज के समक्ष पेश किया गया, जहाँ से उसे 24 जुलाई 2026 तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।
अधिकारियों की प्रतिक्रिया
पूर्व रेलवे के आईजी-सह-प्रधान मुख्य सुरक्षा आयुक्त अमियानंदन सिन्हा ने बरहरवा आरपीएफ टीम की सराहना करते हुए कहा कि टीम ने सीसीटीवी गेट एनालिसिस तथा ज़मीनी स्तर पर प्राप्त खुफिया सूचनाओं का प्रभावी उपयोग कर कुछ ही दिनों में आरोपी को गिरफ्तार किया और यह सुनिश्चित किया कि यात्रियों तथा रेलवे संपत्ति को खतरे में डालने वाला यह लापरवाह कृत्य दंडित हो।
पूर्व रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी शिबराम माझी ने कहा कि यात्रियों की सुरक्षा पूर्व रेलवे की सर्वोच्च प्राथमिकता है और ट्रेनों के भीतर धूम्रपान करना न केवल पूर्णतः प्रतिबंधित एवं दंडनीय है, बल्कि इसके गंभीर और खतरनाक परिणाम भी हो सकते हैं। उन्होंने यात्रियों से अपील की कि किसी भी संदिग्ध गतिविधि या आग से संबंधित खतरे की जानकारी तुरंत आरपीएफ अथवा ट्रेन कर्मचारी को दें।
आगे क्या
गौरतलब है कि ट्रेनों में धूम्रपान पर प्रतिबंध के बावजूद ऐसी घटनाएँ सामने आती रहती हैं। यह मामला इस बात का उदाहरण है कि लापरवाही से की गई एक छोटी-सी हरकत किस तरह सैकड़ों यात्रियों की जान को खतरे में डाल सकती है। आरोपी पर 24 जुलाई 2026 को अगली सुनवाई होगी, जहाँ मामले की आगे की कार्यवाही तय होगी।