दिल्ली प्रदूषण पर प्रमोद तिवारी का हमला: केंद्र और दिल्ली सरकार दोनों बराबर जिम्मेदार
सारांश
मुख्य बातें
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद प्रमोद तिवारी ने 7 नवंबर 2026 को प्रयागराज में कहा कि दिल्ली और एनसीआर में लगातार बिगड़ती वायु गुणवत्ता के लिए भाजपा की दिल्ली सरकार और केंद्र सरकार — दोनों समान रूप से जवाबदेह हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि जिस सरकार ने चुनावों में प्रदूषण खत्म करने का वादा किया था, उसके कार्यकाल में राजधानी की हवा और यमुना का पानी पहले से कहीं अधिक जहरीला हो चुका है।
ट्रिपल इंजन सरकार और प्रदूषण का सवाल
तिवारी ने कहा कि दिल्ली में इस समय नगर निगम, दिल्ली सरकार और केंद्र सरकार — तीनों में भारतीय जनता पार्टी (BJP) का शासन है, फिर भी वायु प्रदूषण पर काबू पाना संभव नहीं हो पाया है। उनके अनुसार, यह 'ट्रिपल इंजन' सरकार का सबसे बड़ा विफलता-बिंदु है।
उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश और हरियाणा के कई इलाके राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) के अंतर्गत आते हैं, जिससे प्रदूषण की समस्या बहुआयामी हो जाती है। इन राज्यों में भी भाजपा की सरकार होने के बावजूद समन्वित कदम नहीं उठाए गए, यह आरोप तिवारी ने लगाया।
आम जनता पर असर
तिवारी ने कहा कि दिल्ली व्यावहारिक रूप से एक 'गैस चैंबर' बन चुकी है, जहाँ लोगों की जीवन प्रत्याशा घट रही है और श्वास संबंधी बीमारियाँ तेज़ी से बढ़ रही हैं। उनके अनुसार सरकार जनता से झूठे वादे कर उनकी जिंदगी के साथ खिलवाड़ कर रही है।
यह बयान ऐसे समय में आया है जब सर्दियों की शुरुआत के साथ दिल्ली-एनसीआर में वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 'गंभीर' श्रेणी में पहुँच जाता है और हर वर्ष यही स्थिति दोहराई जाती है।
इथेनॉल-मिश्रित पेट्रोल पर सवाल
कांग्रेस सांसद ने इथेनॉल-मिश्रित पेट्रोल की नीति को भी निशाने पर लिया। उनका कहना था कि आम नागरिकों की शिकायत है कि इस मिश्रण से वाहनों का माइलेज कम हो रहा है, जिससे मध्यम और निम्न-मध्यम वर्ग के परिवारों पर सीधा आर्थिक बोझ पड़ रहा है।
उन्होंने माँग की कि इथेनॉल-मिश्रित पेट्रोल के वाहनों के इंजन पर पड़ने वाले दीर्घकालिक प्रभावों की स्वतंत्र जाँच होनी चाहिए। तिवारी ने कहा कि इस पूरे मामले की जाँच सर्वोच्च न्यायालय के किसी सेवानिवृत्त न्यायाधीश की निगरानी में कराई जाए, ताकि तथ्य सार्वजनिक हो सकें।
संवैधानिक मूल्यों और सामाजिक एकता पर टिप्पणी
तिवारी ने भाजपा पर डॉ. भीमराव अंबेडकर के संविधान की मूल भावना के विपरीत काम करने का आरोप लगाया। उनके अनुसार संविधान सभी नागरिकों को समानता का अधिकार देता है, लेकिन कथित तौर पर धर्म के आधार पर समाज को विभाजित किया जा रहा है।
उन्होंने आरोप लगाया कि यह 'बांटो और राज करो' की नीति देश के सामाजिक ताने-बाने को कमज़ोर कर रही है। गौरतलब है कि यह आरोप कांग्रेस की ओर से भाजपा पर नियमित रूप से लगाया जाता रहा है, विशेषकर चुनावी मौसम में।
आगे क्या
तिवारी की माँग है कि सेवानिवृत्त न्यायाधीश की निगरानी में प्रदूषण और इथेनॉल नीति — दोनों की तत्काल जाँच हो। फिलहाल केंद्र सरकार या दिल्ली सरकार की ओर से इन आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।