7 नवंबर 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

दिल्ली प्रदूषण पर प्रमोद तिवारी का हमला: केंद्र और दिल्ली सरकार दोनों बराबर जिम्मेदार

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
दिल्ली प्रदूषण पर प्रमोद तिवारी का हमला: केंद्र और दिल्ली सरकार दोनों बराबर जिम्मेदार

सारांश

कांग्रेस सांसद प्रमोद तिवारी ने दिल्ली को 'गैस चैंबर' बताते हुए केंद्र, दिल्ली सरकार और नगर निगम — तीनों भाजपा सरकारों को एक साथ कटघरे में खड़ा किया। साथ ही इथेनॉल पेट्रोल नीति की जाँच सर्वोच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त जज से कराने की माँग उठाई।

मुख्य बातें

कांग्रेस सांसद प्रमोद तिवारी ने 7 नवंबर 2026 को प्रयागराज में दिल्ली प्रदूषण पर केंद्र और दिल्ली सरकार दोनों को बराबर जिम्मेदार ठहराया।
उन्होंने कहा कि नगर निगम, दिल्ली सरकार और केंद्र सरकार — तीनों में भाजपा के होने के बावजूद प्रदूषण पर काबू नहीं हुआ।
तिवारी के अनुसार दिल्ली 'गैस चैंबर' बन चुकी है, जिससे जीवन प्रत्याशा घट रही है और बीमारियाँ बढ़ रही हैं।
इथेनॉल-मिश्रित पेट्रोल से वाहनों का माइलेज घटने की शिकायत पर सर्वोच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त जज से जाँच की माँग की।
भीमराव अंबेडकर के संविधान की भावना के विरुद्ध धर्म के आधार पर समाज बाँटने का आरोप भी लगाया।

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद प्रमोद तिवारी ने 7 नवंबर 2026 को प्रयागराज में कहा कि दिल्ली और एनसीआर में लगातार बिगड़ती वायु गुणवत्ता के लिए भाजपा की दिल्ली सरकार और केंद्र सरकार — दोनों समान रूप से जवाबदेह हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि जिस सरकार ने चुनावों में प्रदूषण खत्म करने का वादा किया था, उसके कार्यकाल में राजधानी की हवा और यमुना का पानी पहले से कहीं अधिक जहरीला हो चुका है।

ट्रिपल इंजन सरकार और प्रदूषण का सवाल

तिवारी ने कहा कि दिल्ली में इस समय नगर निगम, दिल्ली सरकार और केंद्र सरकार — तीनों में भारतीय जनता पार्टी (BJP) का शासन है, फिर भी वायु प्रदूषण पर काबू पाना संभव नहीं हो पाया है। उनके अनुसार, यह 'ट्रिपल इंजन' सरकार का सबसे बड़ा विफलता-बिंदु है।

उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश और हरियाणा के कई इलाके राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) के अंतर्गत आते हैं, जिससे प्रदूषण की समस्या बहुआयामी हो जाती है। इन राज्यों में भी भाजपा की सरकार होने के बावजूद समन्वित कदम नहीं उठाए गए, यह आरोप तिवारी ने लगाया।

आम जनता पर असर

तिवारी ने कहा कि दिल्ली व्यावहारिक रूप से एक 'गैस चैंबर' बन चुकी है, जहाँ लोगों की जीवन प्रत्याशा घट रही है और श्वास संबंधी बीमारियाँ तेज़ी से बढ़ रही हैं। उनके अनुसार सरकार जनता से झूठे वादे कर उनकी जिंदगी के साथ खिलवाड़ कर रही है।

यह बयान ऐसे समय में आया है जब सर्दियों की शुरुआत के साथ दिल्ली-एनसीआर में वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 'गंभीर' श्रेणी में पहुँच जाता है और हर वर्ष यही स्थिति दोहराई जाती है।

इथेनॉल-मिश्रित पेट्रोल पर सवाल

कांग्रेस सांसद ने इथेनॉल-मिश्रित पेट्रोल की नीति को भी निशाने पर लिया। उनका कहना था कि आम नागरिकों की शिकायत है कि इस मिश्रण से वाहनों का माइलेज कम हो रहा है, जिससे मध्यम और निम्न-मध्यम वर्ग के परिवारों पर सीधा आर्थिक बोझ पड़ रहा है।

उन्होंने माँग की कि इथेनॉल-मिश्रित पेट्रोल के वाहनों के इंजन पर पड़ने वाले दीर्घकालिक प्रभावों की स्वतंत्र जाँच होनी चाहिए। तिवारी ने कहा कि इस पूरे मामले की जाँच सर्वोच्च न्यायालय के किसी सेवानिवृत्त न्यायाधीश की निगरानी में कराई जाए, ताकि तथ्य सार्वजनिक हो सकें।

संवैधानिक मूल्यों और सामाजिक एकता पर टिप्पणी

तिवारी ने भाजपा पर डॉ. भीमराव अंबेडकर के संविधान की मूल भावना के विपरीत काम करने का आरोप लगाया। उनके अनुसार संविधान सभी नागरिकों को समानता का अधिकार देता है, लेकिन कथित तौर पर धर्म के आधार पर समाज को विभाजित किया जा रहा है।

उन्होंने आरोप लगाया कि यह 'बांटो और राज करो' की नीति देश के सामाजिक ताने-बाने को कमज़ोर कर रही है। गौरतलब है कि यह आरोप कांग्रेस की ओर से भाजपा पर नियमित रूप से लगाया जाता रहा है, विशेषकर चुनावी मौसम में।

आगे क्या

तिवारी की माँग है कि सेवानिवृत्त न्यायाधीश की निगरानी में प्रदूषण और इथेनॉल नीति — दोनों की तत्काल जाँच हो। फिलहाल केंद्र सरकार या दिल्ली सरकार की ओर से इन आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

संपादकीय दृष्टिकोण

राज्य और केंद्र — तीनों स्तरों पर काबिज़ है, तो जवाबदेही को किसी दूसरे पर थोपने की गुंजाइश नहीं बचती। लेकिन यह भी उतना ही सच है कि पराली जलाने, वाहन उत्सर्जन और औद्योगिक प्रदूषण जैसी समस्याएँ दशकों पुरानी हैं और कांग्रेस शासनकाल में भी अनसुलझी रहीं। इथेनॉल नीति पर जाँच की माँग व्यावहारिक है, क्योंकि माइलेज और इंजन प्रभाव पर स्वतंत्र आँकड़े सार्वजनिक नहीं हैं; लेकिन इसे प्रदूषण विमर्श में घुसेड़ने से मूल मुद्दा — AQI सुधार की रोडमैप — और धुंधला हो जाता है। असली जवाब वादों की गिनती में नहीं, बल्कि मापने योग्य सालाना AQI लक्ष्यों और उनकी पारदर्शी समीक्षा में है।
RashtraPress
7 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रमोद तिवारी ने दिल्ली प्रदूषण पर क्या कहा?
कांग्रेस सांसद प्रमोद तिवारी ने 7 नवंबर 2026 को कहा कि दिल्ली प्रदूषण के लिए केंद्र सरकार और दिल्ली सरकार दोनों बराबर जिम्मेदार हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि तीनों स्तरों पर भाजपा शासन के बावजूद वायु गुणवत्ता में सुधार नहीं हुआ।
ट्रिपल इंजन सरकार का मतलब क्या है?
तिवारी के अनुसार दिल्ली में नगर निगम, दिल्ली सरकार और केंद्र सरकार — तीनों में भाजपा का शासन है, इसलिए प्रदूषण की जवाबदेही से वह बच नहीं सकती। यह तर्क विपक्ष की ओर से जवाबदेही तय करने के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है।
इथेनॉल-मिश्रित पेट्रोल पर तिवारी की क्या माँग है?
तिवारी ने माँग की कि इथेनॉल-मिश्रित पेट्रोल से वाहनों के माइलेज और इंजन पर पड़ने वाले प्रभाव की जाँच सर्वोच्च न्यायालय के किसी सेवानिवृत्त न्यायाधीश की निगरानी में कराई जाए। उनका कहना है कि इससे आम नागरिकों को आर्थिक नुकसान हो रहा है।
दिल्ली में वायु प्रदूषण इतना गंभीर क्यों है?
दिल्ली-एनसीआर में हर सर्दियों में वाहन उत्सर्जन, पराली जलाने और औद्योगिक धुएँ का संयोजन AQI को 'गंभीर' श्रेणी तक पहुँचा देता है। तिवारी के अनुसार यमुना का पानी और हवा — दोनों की गुणवत्ता पहले से अधिक खराब हो चुकी है।
केंद्र और दिल्ली सरकार की ओर से इन आरोपों पर क्या प्रतिक्रिया आई?
7 नवंबर 2026 तक केंद्र सरकार या दिल्ली सरकार की ओर से तिवारी के इन आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम कल
  2. 10 महीने पहले
  3. 10 महीने पहले
  4. 11 महीने पहले
  5. 11 महीने पहले
  6. 1 साल पहले
  7. 1 साल पहले
  8. 1 साल पहले