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पेटीएम केवाईसी ठगी: दिल्ली पुलिस ने अंतर-राज्यीय साइबर गिरोह तोड़ा, 3 गिरफ्तार

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पेटीएम केवाईसी ठगी: दिल्ली पुलिस ने अंतर-राज्यीय साइबर गिरोह तोड़ा, 3 गिरफ्तार

सारांश

पेटीएम कर्मचारी बनकर मोबाइल फोन हथियाओ, बैंक खाता खाली करो — यही था इस अंतर-राज्यीय गिरोह का फॉर्मूला। दिल्ली पुलिस की साइबर सेल ने हरियाणा, पंजाब और हिमाचल प्रदेश तक फैले इस नेटवर्क के तीन सदस्यों को दबोचा, जो कमीशन पर बैंक किट और सिम कार्ड सप्लाई करते थे।

मुख्य बातें

दिल्ली पुलिस साइबर सेल ने 27 मई 2026 को पेटीएम केवाईसी ठगी में लिप्त अंतर-राज्यीय नेटवर्क का भंडाफोड़ किया।
दक्षिण पटेल नगर के एक चाय विक्रेता के खाते से ₹90,000 की धोखाधड़ी हुई।
गिरफ्तार आरोपी: विशेष सिंह (पंचकूला), सचिन मौर्य , और आशीष शर्मा (ऊना, हिमाचल प्रदेश)।
नेटवर्क हरियाणा, पंजाब और हिमाचल प्रदेश में फैला; व्हाट्सएप व इंस्टाग्राम से संचालन।
आरोपी कमीशन के बदले बैंक खाते, एटीएम कार्ड और सिम कार्ड साइबर अपराधियों को सप्लाई करते थे।
ठगी की रकम पंजाब नेशनल बैंक खाते में ट्रांसफर की गई थी; आगे की जांच जारी।

दिल्ली पुलिस की सेंट्रल डिस्ट्रिक्ट साइबर सेल ने 27 मई 2026 को एक अंतर-राज्यीय साइबर ठगी नेटवर्क का भंडाफोड़ किया, जो पेटीएम केवाईसी के नाम पर आम नागरिकों को निशाना बनाता था। इस कार्रवाई में बैंक खाता किट, एटीएम कार्ड और सिम कार्ड की आपूर्ति से जुड़े तीन मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। मामले की शुरुआत दक्षिण पटेल नगर, नई दिल्ली में एक चाय विक्रेता के बैंक खाते से लगभग ₹90,000 की धोखाधड़ी से हुई।

ठगी का तरीका

पुलिस के अनुसार, यह गिरोह अपने सदस्यों को पेटीएम कर्मचारी बताकर पीड़ितों के पास भेजता था। आरोपी केवाईसी अपडेट या सेटिंग सुधारने का बहाना बनाकर पीड़ित का मोबाइल फोन अपने हाथ में लेते थे। एक बार फोन पर नियंत्रण मिलते ही वे बैंक खाते से अवैध रूप से रकम दूसरे खातों में स्थानांतरित कर लेते थे। इसी तरीके से दिल्ली के एक चाय विक्रेता के साथ ठगी हुई और उसके खाते से ₹90,000 निकाल लिए गए।

जांच और गिरफ्तारी

शिकायत दर्ज होने के बाद साइबर थाने ने तकनीकी निगरानी, बैंक लेनदेन विश्लेषण, लाभार्थी खातों की जांच और सीसीटीवी फुटेज की मदद से जांच शुरू की। जांच में सामने आया कि ठगी की रकम एक पंजाब नेशनल बैंक खाते में ट्रांसफर की गई थी, जिसका उपयोग आगे साइबर अपराध में हो रहा था। डिजिटल ट्रेल और मोबाइल नंबरों के विश्लेषण के आधार पर पुलिस ने पंचकूला, ज़ीरकपुर और आसपास के इलाकों में छापेमारी की।

गिरफ्तार आरोपी

पुलिस ने तीन आरोपियों को दबोचा। विशेष सिंह (निवासी: पंचकूला) पर बैंक खाता उपलब्ध कराने और साइबर ठगी में इस्तेमाल होने वाली किट की आपूर्ति का आरोप है। सचिन मौर्य कथित तौर पर बैंक खाता किट इकट्ठा कर उन्हें आगे सप्लाई करता था। आशीष शर्मा, जो हिमाचल प्रदेश के ऊना जिले का रहने वाला है, इस नेटवर्क में आपूर्ति और संचालन की भूमिका निभा रहा था। पूछताछ में तीनों ने स्वीकार किया कि वे कमीशन के बदले बैंक खाते, एटीएम कार्ड, रजिस्टर्ड सिम कार्ड और बैंकिंग क्रेडेंशियल उपलब्ध कराते थे।

नेटवर्क का विस्तार

जांच में सामने आया कि यह नेटवर्क हरियाणा, पंजाब और हिमाचल प्रदेश में फैला हुआ था। आरोपी व्हाट्सएप और इंस्टाग्राम जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के ज़रिए संपर्क में रहते थे और संगठित तरीके से इस पूरे रैकेट को चलाते थे। गौरतलब है कि यह मामला उस बढ़ती प्रवृत्ति को उजागर करता है जिसमें साइबर अपराधी वैध डिजिटल भुगतान सेवाओं के नाम का दुरुपयोग कर कम जागरूक नागरिकों को ठगते हैं।

आगे की जांच

पुलिस अब इस नेटवर्क से जुड़े अन्य संदिग्धों और डिजिटल लेनदेन की गहन जांच कर रही है, ताकि पूरे साइबर फ्रॉड रैकेट का पर्दाफाश किया जा सके। अधिकारियों ने नागरिकों को सतर्क रहने और किसी भी अनजान व्यक्ति को अपना मोबाइल फोन न सौंपने की सलाह दी है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि उस व्यापक 'मनी म्यूल' इकोसिस्टम की एक झलक है जो भारत के साइबर अपराध परिदृश्य को ईंधन देता है — जहाँ असली ठग पकड़ में नहीं आते, बल्कि खाता किट सप्लाई करने वाले बिचौलिए पकड़े जाते हैं। तीन राज्यों में फैला यह नेटवर्क दर्शाता है कि डिजिटल भुगतान की पैठ बढ़ने के साथ-साथ उसका दुरुपयोग भी उतनी ही तेज़ी से संगठित हो रहा है। असली सवाल यह है कि बैंक इन 'किराये के खातों' की पहचान समय पर क्यों नहीं कर पाते, और केवाईसी प्रक्रियाएँ इतनी आसानी से क्यों धोखे में आ जाती हैं।
RashtraPress
12 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पेटीएम केवाईसी ठगी का यह गिरोह कैसे काम करता था?
यह गिरोह अपने सदस्यों को पेटीएम कर्मचारी बताकर पीड़ितों के पास भेजता था और केवाईसी अपडेट का बहाना बनाकर उनका मोबाइल फोन हासिल कर लेता था। फोन मिलते ही बैंक खाते से रकम दूसरे खातों में ट्रांसफर कर ली जाती थी।
इस मामले में कितने लोग गिरफ्तार हुए और वे कौन हैं?
दिल्ली पुलिस ने तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है — विशेष सिंह (पंचकूला), सचिन मौर्य, और आशीष शर्मा (ऊना, हिमाचल प्रदेश)। तीनों पर बैंक खाता किट, एटीएम कार्ड और सिम कार्ड साइबर अपराधियों को सप्लाई करने का आरोप है।
पीड़ित के खाते से कितनी रकम चुराई गई?
दक्षिण पटेल नगर, नई दिल्ली के एक चाय विक्रेता के बैंक खाते से लगभग ₹90,000 की धोखाधड़ी की गई। यही शिकायत इस पूरे नेटवर्क की जांच का आधार बनी।
यह साइबर नेटवर्क किन राज्यों में फैला था?
जांच में सामने आया कि यह नेटवर्क हरियाणा, पंजाब और हिमाचल प्रदेश में फैला हुआ था। आरोपी व्हाट्सएप और इंस्टाग्राम के ज़रिए संपर्क में रहते थे।
ऐसी पेटीएम केवाईसी ठगी से कैसे बचें?
पेटीएम या कोई भी डिजिटल भुगतान कंपनी केवाईसी के लिए घर नहीं आती और न ही फोन माँगती है। किसी भी अनजान व्यक्ति को अपना मोबाइल न दें और संदिग्ध गतिविधि की तुरंत साइबर हेल्पलाइन 1930 पर सूचना दें।
राष्ट्र प्रेस
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