दिल्ली पुलिस का साइबर फ्रॉड नेटवर्क पर शिकंजा: पेटीएम कर्मचारी बनकर ठगी करने वाले 3 गिरफ्तार
सारांश
मुख्य बातें
दिल्ली पुलिस की साइबर थाना सेंट्रल टीम ने 19 मई 2026 को एक अंतरराज्यीय साइबर फ्रॉड मॉड्यूल का भंडाफोड़ करते हुए तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया। यह गिरोह बैंक खाता किट, एटीएम कार्ड और सिम कार्ड उपलब्ध कराकर ऑनलाइन ठगी के नेटवर्क को सक्रिय रखता था। पंचकूला, जीरकपुर और हिमाचल प्रदेश में छापेमारी के बाद यह सफलता मिली।
मामला कैसे सामने आया
साउथ पटेल नगर के एक चाय विक्रेता ने साइबर थाना सेंट्रल में शिकायत दर्ज कराई कि एक अज्ञात व्यक्ति उसकी दुकान पर आया और खुद को पेटीएम कर्मचारी बताते हुए मोबाइल में केवाईसी व सेटिंग अपडेट करने का बहाना बनाया। इसी दौरान उसने धोखे से पीड़ित के मोबाइल तक पहुँच बनाई और बैंक खाते से ₹90,000 ट्रांसफर कर लिए। शिकायत मिलते ही पुलिस ने तकनीकी जाँच और ट्रांजैक्शन ट्रेल का विश्लेषण शुरू किया।
एफआईआर और जाँच टीम
15 मई 2026 को साइबर थाना सेंट्रल में बीएनएस की धारा 318(4) के तहत एफआईआर दर्ज की गई। मामले की गंभीरता को देखते हुए एसआई रविंदर कुमार, हेड कांस्टेबल दीपक और जय किशन की विशेष टीम गठित की गई। इस टीम की निगरानी साइबर थाना प्रभारी इंस्पेक्टर योगराज दलाल और एसीपी ऑप्स सेंट्रल पदम सिंह राणा कर रहे थे।
तकनीकी जाँच से खुला नेटवर्क
पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज, डिजिटल प्रोफाइलिंग, बैंक रिकॉर्ड और फाइनेंशियल ट्रेल के विश्लेषण से पता लगाया कि ठगी की रकम पंजाब नेशनल बैंक के एक खाते में भेजी गई थी। केवाईसी दस्तावेज़ों और मोबाइल नंबरों की जाँच से पंचकूला निवासी 22 वर्षीय विशेष सिंह की पहचान हुई। आगे की जाँच में खुलासा हुआ कि बैंक खाते, सिम कार्ड और एटीएम किट एक संगठित अंतरराज्यीय नेटवर्क के ज़रिये साइबर अपराधियों तक पहुँचाए जा रहे थे।
गिरफ्तारी और बरामदगी
तकनीकी इनपुट और स्थानीय सूचना के आधार पर पुलिस ने पंचकूला, जीरकपुर और पंजाब-हरियाणा के आसपास के इलाकों में कई छापेमारी की। 19 मई 2026 को तीन आरोपी गिरफ्तार किए गए — पंचकूला निवासी विशेष सिंह और सचिन मौर्य, तथा हिमाचल प्रदेश के ऊना ज़िले के कोटला कल्लां निवासी आशीष शर्मा। पुलिस ने इनके कब्जे से चार मोबाइल फोन बरामद किए। डिजिटल जाँच में व्हाट्सएप चैट, इंस्टाग्राम और अन्य सोशल मीडिया पर हुई बातचीत, संदिग्ध बैंक खातों की जानकारी, सिम कार्ड विवरण और कमीशन बँटवारे से जुड़े अहम साक्ष्य मिले हैं।
आगे की जाँच
पूछताछ में आरोपियों ने स्वीकार किया कि वे बैंक खाते, एटीएम कार्ड, रजिस्टर्ड सिम कार्ड और बैंकिंग क्रेडेंशियल उपलब्ध कराने के बदले कमीशन लेते थे — और अलग-अलग राज्यों में सक्रिय साइबर फ्रॉड नेटवर्क तथा खाता उपलब्ध कराने वालों के बीच बिचौलिये की भूमिका निभाते थे। पुलिस को आशंका है कि ये आरोपी कई अन्य साइबर फ्रॉड मामलों से भी जुड़े हो सकते हैं। एनसीआरपी पोर्टल पर दर्ज अन्य शिकायतों से इनके संभावित संबंधों की जाँच जारी है।