जालौन में डीआरआई का बड़ा ऑपरेशन: गुप्त ड्रग लैब ध्वस्त, 1,100 किलो मादक पदार्थ जब्त, 2 गिरफ्तार
सारांश
मुख्य बातें
डायरेक्टरेट ऑफ रेवेन्यू इंटेलिजेंस (डीआरआई) ने उत्तर प्रदेश के जालौन जिले के एक सुदूर गाँव में चल रही अवैध सिंथेटिक ड्रग निर्माण की गुप्त प्रयोगशाला का भंडाफोड़ किया है। 30 अक्टूबर 2026 को एक अधिकारी ने बताया कि गुरुवार को चलाए गए इस संयुक्त ऑपरेशन में कुल 1,100 किलोग्राम ड्रग्स, अर्ध-निर्मित मादक पदार्थ एवं प्रीकर्सर केमिकल जब्त किए गए, साथ ही निर्माण उपकरण भी बरामद हुए। इस कार्रवाई में दो आरोपियों को एनडीपीएस अधिनियम, 1985 के प्रावधानों के तहत गिरफ्तार किया गया है।
ऑपरेशन का घटनाक्रम
डीआरआई अधिकारियों के अनुसार, पुख्ता खुफिया जानकारी मिलने के बाद एजेंसी की एक बड़ी टीम ने यूपी आतंकवाद निरोधी दस्ते (एटीएस) के सहयोग से तड़के सुबह जालौन के उस संदिग्ध ठिकाने पर छापा मारा। यह संयुक्त ऑपरेशन पूरी तरह योजनाबद्ध था और कई जगहों पर एक साथ चलाया गया।
तलाशी के दौरान अधिकारियों को वहाँ एक पूरी तरह सुसज्जित और परिचालन में चालू ड्रग निर्माण इकाई मिली। बयान के अनुसार, इस लैब से 184 किलोग्राम अर्ध-निर्मित ड्रग्स और लगभग 582 किलोग्राम प्रीकर्सर केमिकल के साथ-साथ निर्माण उपकरण बरामद किए गए।
आरोपियों के ठिकानों से बरामदगी
मुख्य लैब की तलाशी के बाद एजेंसी ने आरोपियों के व्यक्तिगत ठिकानों पर भी छापे मारे। एक आरोपी के घर से लगभग 15.4 किलोग्राम तैयार 'मेथाक्वालोन' बरामद हुआ, जो एक प्रतिबंधित सिंथेटिक नशीला पदार्थ है। इसके साथ ही लगभग 153 किलोग्राम रसायन और एक मशीन भी जब्त की गई।
दूसरे आरोपी के ठिकाने पर तलाशी में लगभग 168 किलोग्राम प्रीकर्सर केमिकल की एक और बड़ी खेप पकड़ी गई। डीआरआई के अनुसार, इन सभी बरामदगियों को एकत्रित करने पर स्पष्ट होता है कि यहाँ एक सुसंगठित और व्यावसायिक स्तर पर अवैध ड्रग निर्माण का काम चल रहा था।
कार्रवाई का महत्व
डीआरआई ने अपने बयान में कहा कि इस ऑपरेशन से अवैध ड्रग निर्माण तंत्र को बड़ा झटका लगा है। केंद्रीय एजेंसी के अनुसार, एक बड़ी अवैध इकाई को नष्ट कर दिया गया, भारी मात्रा में तैयार और कच्चे मादक पदार्थों को अवैध सप्लाई चेन से बाहर कर दिया गया और आगे के सिंथेटिक ड्रग उत्पादन पर रोक लगाई गई।
गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश में हाल के वर्षों में सिंथेटिक ड्रग्स के उत्पादन और तस्करी के विरुद्ध केंद्रीय एवं राज्य एजेंसियों की संयुक्त कार्रवाइयाँ बढ़ी हैं। यह ऐसे समय में आया है जब 'मेथाक्वालोन' जैसे प्रतिबंधित सिंथेटिक पदार्थों की माँग और आपूर्ति दोनों पर सुरक्षा एजेंसियाँ कड़ी नज़र रख रही हैं।
कानूनी कार्रवाई और आगे की जाँच
दोनों गिरफ्तार आरोपियों को नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रॉपिक सब्सटेंसेज (एनडीपीएस) अधिनियम, 1985 के तहत हिरासत में लिया गया है। अधिकारियों के अनुसार, इस अवैध नेटवर्क की जड़ों तक पहुँचने के लिए जाँच जारी है। यह देखा जाना बाकी है कि इस निर्माण इकाई से ड्रग्स की आपूर्ति किन बाज़ारों तक होती थी और इसके पीछे कितना बड़ा सिंडिकेट सक्रिय था।