18 सितंबर 2026
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डुसू चुनाव हिंसा: दिल्ली हाईकोर्ट ने विजय जुलूस पर रोक लगाई, 140 उम्मीदवारों को नोटिस

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डुसू चुनाव हिंसा: दिल्ली हाईकोर्ट ने विजय जुलूस पर रोक लगाई, 140 उम्मीदवारों को नोटिस

सारांश

डुसू चुनाव में बंदूक लहराने, बिना नंबर प्लेट के काफिले और शिक्षक पर हमले की घटनाओं ने दिल्ली हाईकोर्ट को इस कदर आक्रोशित किया कि उसने विजय जुलूस पर रोक लगा दी और 140 उम्मीदवारों व सभी छात्र संगठनों को सामूहिक हर्जाने का नोटिस थमा दिया। अदालत का संदेश साफ है — छात्र राजनीति में 'गुंडागर्दी' अब बर्दाश्त नहीं।

मुख्य बातें

दिल्ली हाईकोर्ट ने 18 सितंबर 2026 को डुसू चुनाव में हिंसा पर विजय जुलूस निकालने पर तत्काल रोक लगाई।
सभी छात्र संगठनों और 140 उम्मीदवारों को सामूहिक चुनावी हर्जाने पर कारण बताओ नोटिस जारी; 2 सप्ताह में जवाब माँगा गया।
पुलिस ने 998 चालान , 6 एफआईआर , 4 गिरफ्तारियाँ और बिना लाइसेंस वाहनों के 5,737 चालान की जानकारी दी।
अदालत ने लिंगदोह समिति सिफारिशों के 'बार-बार और खुलेआम उल्लंघन' पर कड़ी नाराज़गी जताई।
अगली सुनवाई 6 नवंबर को; असंतुष्ट होने पर वोट गिनती व नतीजों पर रोक की चेतावनी पहले ही दी जा चुकी है।

दिल्ली हाईकोर्ट ने 18 सितंबर 2026 को दिल्ली यूनिवर्सिटी छात्र संघ (डुसू) चुनाव के दौरान भड़की हिंसा पर कड़ा रुख अपनाते हुए विजय जुलूस निकालने पर तत्काल रोक लगा दी। अदालत ने चुनाव लड़ रहे सभी छात्र संगठनों और 140 उम्मीदवारों को कारण बताओ नोटिस जारी कर पूछा है कि नियमों के खुले उल्लंघन पर सामूहिक चुनावी हर्जाना क्यों न लगाया जाए।

मुख्य घटनाक्रम

चीफ जस्टिस देवेंद्र कुमार उपाध्याय और जस्टिस तेजस कारिया की खंडपीठ ने दिल्ली विश्वविद्यालय के नॉर्थ कैंपस में चुनाव प्रचार के दौरान सामने आई हिंसा की घटनाओं पर सुनवाई की। अदालत के समक्ष एक ऐसी तस्वीर पेश की गई जिसमें एक छात्र को खुलेआम बंदूक लहराते हुए दिखाया गया था — इस पर पीठ ने कड़ी नाराज़गी जताई।

अदालत ने कहा, 'ये छात्र कैसे हो सकते हैं? खुलेआम हथियार दिखा रहे हैं। ये वास्तविक छात्रों के अवसरों को छीन रहे हैं।' साथ ही, बिना नंबर प्लेट वाली गाड़ियों के काफिले और उम्मीदवारों के कार की छत व बोनट पर खड़े होने को 'गुंडागर्दी' करार दिया।

दिल्ली पुलिस से तीखे सवाल

पीठ ने डीसीपी नॉर्थ से सीधे पूछा कि इतनी बड़ी पुलिस फोर्स तैनात होने के बावजूद बिना नंबर प्लेट वाले वाहनों के काफिले को नॉर्थ कैंपस में घुसने की अनुमति कैसे मिली। अदालत ने कहा कि इन काफिलों से 'डर, आतंक और दबदबे की भावना' पैदा होती है।

अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल चेतन शर्मा ने अदालत को बताया कि पुलिस ने 998 चालान काटे हैं, 6 एफआईआर दर्ज की गई हैं और 4 गिरफ्तारियाँ हुई हैं। बिना लाइसेंस वाले वाहनों के 5,737 चालान भी किए गए हैं। वीडियो में नज़र आने वाले लोगों को कारण बताओ नोटिस जारी किए गए हैं और वाहनों की आरसी जब्त की जाएगी।

शिक्षक पर हमले और पुराने रिकॉर्ड पर नाराज़गी

अदालत ने शिक्षक पर हमले का मामला भी उठाया और पूछा कि गिरफ्तार व्यक्ति छात्र है या नहीं, और संबंधित कॉलेज प्रशासन को इसकी सूचना दी गई या नहीं। पीठ ने याद दिलाया कि पिछले चुनाव में भी एक विजयी उम्मीदवार ने शिक्षक को थप्पड़ मारा था — और इस बार भी हालात वैसे ही हैं।

अदालत ने कहा, 'यह साल दर साल हो रहा है, कुछ नहीं बदला।' पीठ ने स्पष्ट किया कि डीयू प्रशासन और पुलिस दोनों की कार्रवाई गुंडागर्दी और गैर-कानूनी गतिविधियों को रोकने में नाकाफी साबित हो रही है।

लिंगदोह समिति की सिफारिशों का खुला उल्लंघन

हाईकोर्ट ने कहा कि चुनाव के दौरान लिंगदोह समिति की सिफारिशों का 'बार-बार और खुलेआम उल्लंघन' हो रहा है। अदालत ने प्रस्ताव रखा कि न केवल व्यक्तिगत उम्मीदवारों बल्कि छात्र संगठनों पर भी सामूहिक चुनावी हर्जाना लगाया जाए। पीठ ने यह भी कहा कि दिल्ली पुलिस को छात्र होने के नाते किसी को भी कार्रवाई से नहीं बचाना चाहिए।

आगे क्या होगा

सभी पक्षों से 2 सप्ताह में जवाब माँगा गया है। इस मामले की अगली सुनवाई 6 नवंबर को होगी। इससे पहले गुरुवार को अदालत ने चेतावनी दी थी कि पुलिस कार्रवाई से असंतुष्ट होने पर वोटों की गिनती और नतीजों की घोषणा पर रोक लगाई जा सकती है। यह मामला अब छात्र राजनीति में संस्थागत जवाबदेही की एक बड़ी परीक्षा बन चुका है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि यह सवाल है कि क्या देश के सबसे प्रतिष्ठित विश्वविद्यालय की छात्र राजनीति संस्थागत रूप से हिंसा की आदी हो चुकी है। लिंगदोह समिति की सिफारिशें दो दशक पुरानी हैं, अदालत के पिछले आदेश भी हैं — फिर भी 'साल दर साल कुछ नहीं बदला', यह न्यायालय की टिप्पणी नहीं, एक संस्थागत विफलता का प्रमाण-पत्र है। सामूहिक हर्जाने का प्रस्ताव इस विफलता को तोड़ने का एकमात्र नया औज़ार है, लेकिन असली परीक्षा यह है कि क्या डीयू प्रशासन और पुलिस 6 नवंबर तक ऐसे ठोस कदम उठा पाते हैं जो सुनवाई-दर-सुनवाई दोहराए जाने वाले वादों से आगे जाएँ।
RashtraPress
18 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दिल्ली हाईकोर्ट ने डुसू चुनाव में विजय जुलूस पर रोक क्यों लगाई?
हाईकोर्ट ने नॉर्थ कैंपस में चुनाव प्रचार के दौरान हुई हिंसा, बिना नंबर प्लेट वाले वाहनों के काफिले और एक छात्र द्वारा खुलेआम बंदूक लहराने की तस्वीर सामने आने के बाद 18 सितंबर 2026 को विजय जुलूस पर तत्काल रोक लगाई। अदालत ने इसे 'गुंडागर्दी' और लिंगदोह समिति सिफारिशों का खुला उल्लंघन बताया।
डुसू चुनाव में 140 उम्मीदवारों को नोटिस क्यों दिया गया?
दिल्ली हाईकोर्ट ने चुनाव नियमों के उल्लंघन के मद्देनज़र सभी 140 उम्मीदवारों और सभी छात्र संगठनों को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। अदालत ने पूछा है कि उन पर सामूहिक चुनावी हर्जाना क्यों न लगाया जाए और दो सप्ताह में जवाब माँगा है।
डुसू चुनाव हिंसा मामले में दिल्ली पुलिस ने क्या कार्रवाई की?
अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल चेतन शर्मा ने अदालत को बताया कि पुलिस ने 998 चालान काटे, 6 एफआईआर दर्ज कीं और 4 गिरफ्तारियाँ कीं। बिना लाइसेंस वाले वाहनों के 5,737 चालान भी किए गए और वीडियो में दिखने वाले लोगों को नोटिस जारी किए गए हैं।
इस मामले की अगली सुनवाई कब होगी?
दिल्ली हाईकोर्ट में इस मामले की अगली सुनवाई 6 नवंबर को होगी। इससे पहले सभी पक्षों को दो सप्ताह के भीतर अपना जवाब दाखिल करना है।
लिंगदोह समिति की सिफारिशें क्या हैं और इनका डुसू से क्या संबंध है?
लिंगदोह समिति ने छात्र संघ चुनावों में हिंसा, खर्च सीमा और आचार संहिता पर दिशानिर्देश तय किए थे, जिन्हें सर्वोच्च न्यायालय ने भी अनुमोदित किया था। दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि डुसू चुनाव में इन सिफारिशों का 'बार-बार और खुलेआम उल्लंघन' हो रहा है, जो एक गंभीर संस्थागत विफलता है।
राष्ट्र प्रेस
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