डुसू चुनाव हिंसा: दिल्ली हाईकोर्ट ने विजय जुलूस पर रोक लगाई, 140 उम्मीदवारों को नोटिस
सारांश
मुख्य बातें
दिल्ली हाईकोर्ट ने 18 सितंबर 2026 को दिल्ली यूनिवर्सिटी छात्र संघ (डुसू) चुनाव के दौरान भड़की हिंसा पर कड़ा रुख अपनाते हुए विजय जुलूस निकालने पर तत्काल रोक लगा दी। अदालत ने चुनाव लड़ रहे सभी छात्र संगठनों और 140 उम्मीदवारों को कारण बताओ नोटिस जारी कर पूछा है कि नियमों के खुले उल्लंघन पर सामूहिक चुनावी हर्जाना क्यों न लगाया जाए।
मुख्य घटनाक्रम
चीफ जस्टिस देवेंद्र कुमार उपाध्याय और जस्टिस तेजस कारिया की खंडपीठ ने दिल्ली विश्वविद्यालय के नॉर्थ कैंपस में चुनाव प्रचार के दौरान सामने आई हिंसा की घटनाओं पर सुनवाई की। अदालत के समक्ष एक ऐसी तस्वीर पेश की गई जिसमें एक छात्र को खुलेआम बंदूक लहराते हुए दिखाया गया था — इस पर पीठ ने कड़ी नाराज़गी जताई।
अदालत ने कहा, 'ये छात्र कैसे हो सकते हैं? खुलेआम हथियार दिखा रहे हैं। ये वास्तविक छात्रों के अवसरों को छीन रहे हैं।' साथ ही, बिना नंबर प्लेट वाली गाड़ियों के काफिले और उम्मीदवारों के कार की छत व बोनट पर खड़े होने को 'गुंडागर्दी' करार दिया।
दिल्ली पुलिस से तीखे सवाल
पीठ ने डीसीपी नॉर्थ से सीधे पूछा कि इतनी बड़ी पुलिस फोर्स तैनात होने के बावजूद बिना नंबर प्लेट वाले वाहनों के काफिले को नॉर्थ कैंपस में घुसने की अनुमति कैसे मिली। अदालत ने कहा कि इन काफिलों से 'डर, आतंक और दबदबे की भावना' पैदा होती है।
अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल चेतन शर्मा ने अदालत को बताया कि पुलिस ने 998 चालान काटे हैं, 6 एफआईआर दर्ज की गई हैं और 4 गिरफ्तारियाँ हुई हैं। बिना लाइसेंस वाले वाहनों के 5,737 चालान भी किए गए हैं। वीडियो में नज़र आने वाले लोगों को कारण बताओ नोटिस जारी किए गए हैं और वाहनों की आरसी जब्त की जाएगी।
शिक्षक पर हमले और पुराने रिकॉर्ड पर नाराज़गी
अदालत ने शिक्षक पर हमले का मामला भी उठाया और पूछा कि गिरफ्तार व्यक्ति छात्र है या नहीं, और संबंधित कॉलेज प्रशासन को इसकी सूचना दी गई या नहीं। पीठ ने याद दिलाया कि पिछले चुनाव में भी एक विजयी उम्मीदवार ने शिक्षक को थप्पड़ मारा था — और इस बार भी हालात वैसे ही हैं।
अदालत ने कहा, 'यह साल दर साल हो रहा है, कुछ नहीं बदला।' पीठ ने स्पष्ट किया कि डीयू प्रशासन और पुलिस दोनों की कार्रवाई गुंडागर्दी और गैर-कानूनी गतिविधियों को रोकने में नाकाफी साबित हो रही है।
लिंगदोह समिति की सिफारिशों का खुला उल्लंघन
हाईकोर्ट ने कहा कि चुनाव के दौरान लिंगदोह समिति की सिफारिशों का 'बार-बार और खुलेआम उल्लंघन' हो रहा है। अदालत ने प्रस्ताव रखा कि न केवल व्यक्तिगत उम्मीदवारों बल्कि छात्र संगठनों पर भी सामूहिक चुनावी हर्जाना लगाया जाए। पीठ ने यह भी कहा कि दिल्ली पुलिस को छात्र होने के नाते किसी को भी कार्रवाई से नहीं बचाना चाहिए।
आगे क्या होगा
सभी पक्षों से 2 सप्ताह में जवाब माँगा गया है। इस मामले की अगली सुनवाई 6 नवंबर को होगी। इससे पहले गुरुवार को अदालत ने चेतावनी दी थी कि पुलिस कार्रवाई से असंतुष्ट होने पर वोटों की गिनती और नतीजों की घोषणा पर रोक लगाई जा सकती है। यह मामला अब छात्र राजनीति में संस्थागत जवाबदेही की एक बड़ी परीक्षा बन चुका है।