ईडी की त्रिपुरा-बंगाल-महाराष्ट्र में 13 ठिकानों पर छापेमारी, ₹44 करोड़ के फर्जी टेंडर रैकेट का भंडाफोड़
सारांश
मुख्य बातें
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के अगरतला उप-क्षेत्रीय कार्यालय ने 5 नवंबर 2026 को मनी लॉन्ड्रिंग के एक बड़े मामले में त्रिपुरा, पश्चिम बंगाल और महाराष्ट्र में कुल 13 ठिकानों पर एक साथ तलाशी और जब्ती अभियान चलाया। यह कार्रवाई 'प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (पीएमएलए), 2002 की धारा 17 के तहत की गई। जाँच का केंद्र एक फर्जी सरकारी टेंडर रैकेट है, जिसके ज़रिए कथित तौर पर ₹44 करोड़ से अधिक की ठगी की गई।
मामले की पृष्ठभूमि
ईडी के आधिकारिक बयान के अनुसार, यह जाँच पश्चिम त्रिपुरा के कैपिटल कॉम्प्लेक्स पुलिस स्टेशन में दर्ज एक एफआईआर के आधार पर शुरू हुई। वह शिकायत नागपुर की फर्म 'एसके सेल्स कॉर्पोरेशन' ने दर्ज कराई थी। आरोप है कि निलंबित भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) अधिकारी अभिषेक चंद्र (त्रिपुरा कैडर) और उनके सहयोगियों ने धोखाधड़ी करके इस फर्म से लगभग ₹14.55 करोड़ की 'अर्नेस्ट मनी डिपॉजिट (ईएमडी)' वसूली।
कथित तौर पर यह रकम सितंबर 2024 से फरवरी 2025 के बीच त्रिपुरा सरकार के मिड-डे मील और बिजली क्षेत्र से जुड़े टेंडरों के नाम पर ली गई — जबकि ऐसे कोई टेंडर वास्तव में कभी जारी ही नहीं किए गए थे।
फर्जी संस्था का जाल
जाँच में सामने आया कि उत्पल कुमार चौधरी ने एक निजी फर्म खड़ी की, जिसका नाम सरकारी विभाग 'उच्च शिक्षा निदेशालय' से जान-बूझकर मिलता-जुलता रखा गया। ईएमडी का भुगतान इसी फर्जी संस्था के नाम पर डिमांड ड्राफ्ट के ज़रिए लिया गया। आरोप है कि अभिषेक चंद्र ने खुद को त्रिपुरा सरकार में टेंडर प्रक्रिया को नियंत्रित करने वाले अधिकारी के रूप में पेश किया और शिकायतकर्ता का परिचय उत्पल कुमार चौधरी से कराया।
इसके अलावा, कृष्णा चक्रवर्ती — जिनका प्रतिनिधित्व उनके पति सुदीप पॉल कर रहे थे — के साथ एक जॉइंट वेंचर बनाकर पैसों की वसूली का ढाँचा तैयार किया गया। पीड़ितों का भरोसा बनाए रखने के लिए कुछ मौकों पर रकम का एक हिस्सा वापस भी किया गया।
अपराध से मिली रकम का इस्तेमाल
ईडी के अनुसार, फर्जी संस्था के खातों में जमा रकम को कुछ मामलों में 24 घंटे के भीतर कागजी कंपनियों के एक नेटवर्क के ज़रिए इधर-उधर घुमाया गया। इनमें से कई कंपनियाँ उत्पल कुमार चौधरी के घरेलू कर्मचारियों और सहयोगियों के नाम पर पंजीकृत थीं।
आरोप है कि इस अपराध से अर्जित धन का उपयोग अचल संपत्तियाँ खरीदने में किया गया — जिनमें एक हाउसिंग प्रोजेक्ट के फ्लैट और मुंबई के शिवाजी पार्क में एक रिहायशी संपत्ति शामिल है, जो अभिषेक चंद्र के परिवार के सदस्यों के नाम पर खरीदी गई बताई जाती है। इसके साथ ही विदेश यात्राओं और लग्जरी सामान पर भी यह राशि खर्च की गई। कोलकाता स्थित एक हवाला नेटवर्क के ज़रिए भी लेन-देन होने के आरोप हैं।
व्यापक जाँच का दायरा
गौरतलब है कि ईडी इससे पहले से ही उत्पल कुमार चौधरी और अन्य आरोपियों के खिलाफ जाँच कर रही है। यह जाँच पश्चिम बंगाल और त्रिपुरा में दर्ज पाँच एफआईआर पर आधारित है, जिनमें इसी फर्जी संस्था और इसी पद्धति का उपयोग कर कई पीड़ितों से कुल मिलाकर ₹44 करोड़ से अधिक की ठगी होने का आरोप है। भारतीय न्याय संहिता की धाराओं के तहत दर्ज अपराधों में आपराधिक साजिश, विश्वासघात, धोखाधड़ी, प्रतिरूपण और जालसाजी शामिल हैं — ये सभी पीएमएलए, 2002 के तहत अनुसूचित अपराध हैं।
यह मामला इस लिहाज़ से भी महत्त्वपूर्ण है कि आरोपी अधिकारी फिलहाल निलंबित हैं और जाँच तीन राज्यों में फैले नेटवर्क तक पहुँच गई है। आने वाले दिनों में ईडी की ओर से संपत्ति कुर्की और गिरफ्तारी जैसे कदम संभावित हैं।