चुनाव आयोग सत्ताधारी दल का साधन: सुखदेव भगत की तीखी प्रतिक्रिया
सारांश
Key Takeaways
- सुखदेव भगत ने चुनाव आयोग की स्वतंत्रता पर सवाल उठाया है।
- प्रधानमंत्री का उद्घाटन और चुनाव तिथि की घोषणा में संबंध है।
- कांग्रेस की नीति मुख्यधारा से दूर वर्गों को लाने की है।
नई दिल्ली, 16 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। कांग्रेस नेता नाना पटोले के चुनाव तिथियों पर उठाए गए सवालों के बाद, कांग्रेस सांसद सुखदेव भगत ने अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि संशय होना स्वाभाविक है और यदि आप पिछले परिणामों पर नजर डालें, तो जहाँ-जहाँ इनको गैप मिला है, वहाँ-वहाँ इनको फायदा मिला है। इसीलिए संदेह उठता है।
सुखदेव भगत ने कहा कि यह भी ध्यान देने योग्य है कि प्रधानमंत्री ने एक दिन पहले बंगाल में 16,800 करोड़ रुपये की परियोजनाओं का उद्घाटन किया और उसके अगले दिन ही चुनाव आयोग ने तिथियों की घोषणा कर दी। उन्होंने यह भी कहा कि चुनाव आयोग सत्ताधारी दल की कठपुतली की तरह कार्य कर रहा है।
राज्यसभा चुनाव पर, सुखदेव भगत ने कहा कि हरियाणा में स्थिति स्पष्ट है। बिहार में भी यूपीए के घटक के रूप में, हमें उम्मीद है कि वहाँ भी हमारे पक्ष में निर्णय होगा।
तमिलनाडु विधानसभा चुनावों से पहले, टीवीके के एनडीए में शामिल होने की चर्चा पर, सुखदेव भगत ने कहा कि जिस तरह से विजय एक राजनीतिक शक्ति के रूप में उभरे हैं, भाजपा के फूट डालो और खरीदो की नीति के खिलाफ जो धर्मनिरपेक्षता या संविधान में विश्वास रखता है, वह भाजपा के साथ नहीं जाएगा।
राहुल गांधी द्वारा कांशीराम को 'भारत रत्न' देने की मांग पर, सुखदेव भगत ने कहा कि राहुल गांधी ने जो कहा है, वह सही संदर्भ में है। कांग्रेस की नीति सदैव रही है कि मुख्यधारा से दूर जो वर्ग हैं, उन्हें मुख्यधारा में लाया जाए। हमारी योजनाएँ भी इसी सोच के साथ चलाई जाती रही हैं।