ईपीएफओ वेतन सीमा ₹25,000 होने पर CM विष्णुदेव साई ने की सराहना, 51 लाख कर्मचारियों को फायदा
सारांश
मुख्य बातें
छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साई ने बुधवार, 16 सितंबर को केंद्रीय मंत्रिमंडल के उस फैसले की सराहना की, जिसमें कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) के अनिवार्य कवरेज की वेतन सीमा ₹15,000 से बढ़ाकर ₹25,000 प्रति माह कर दी गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में लिए गए इस निर्णय से 51 लाख से अधिक अतिरिक्त कर्मचारी सामाजिक सुरक्षा के दायरे में आएंगे।
मुख्यमंत्री साई की प्रतिक्रिया
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साई ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपनी पोस्ट में इस निर्णय को 'देश के करोड़ों कामगारों की सामाजिक सुरक्षा को और सशक्त करने वाला महत्वपूर्ण निर्णय' बताया। उन्होंने कहा कि इस दूरदर्शी कदम का लाभ लाखों कामगार परिवारों को मिलेगा और उनके सुरक्षित भविष्य की नींव और मज़बूत होगी। साई ने श्रमिक कल्याण एवं 'विकसित भारत' के संकल्प को आगे बढ़ाने के लिए प्रधानमंत्री मोदी का आभार व्यक्त किया।
केंद्रीय मंत्रिमंडल का फैसला
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने बुधवार, 16 सितंबर को ईपीएफओ के तहत अनिवार्य कवरेज की वेतन सीमा को ₹15,000 से बढ़ाकर ₹25,000 प्रति माह करने की मंजूरी दी। एक आधिकारिक बयान के अनुसार, इस निर्णय से 51 लाख से अधिक अतिरिक्त कर्मचारियों को कर्मचारी भविष्य निधि (ईपीएफ), कर्मचारी पेंशन योजना (ईपीएस) और कर्मचारी जमा-संबद्ध बीमा योजना (ईडीएलआई) का लाभ मिलने की उम्मीद है।
ऐतिहासिक संदर्भ
गौरतलब है कि ईपीएफओ की वेतन सीमा 2004 से 2014 तक पूरे 10 वर्षों तक अपरिवर्तित रही थी। इसके बाद सितंबर 2014 में इसे बढ़ाकर ₹15,000 किया गया था। अब लगभग 12 वर्षों के अंतराल के बाद यह सीमा ₹25,000 की गई है। यह ऐसे समय में आया है जब कई राज्यों में न्यूनतम मजदूरी मौजूदा सीमा के करीब पहुँच चुकी थी।
आम कर्मचारियों पर असर
श्रम एवं रोजगार मंत्रालय के अनुसार, पिछले कुछ वर्षों में देश में वेतन स्तर, आय और औपचारिक रोजगार में लगातार वृद्धि हुई है। सरकार का कहना है कि यह निर्णय न केवल सामाजिक सुरक्षा को मज़बूत करेगा, बल्कि औपचारिक रोजगार को भी बढ़ावा देगा और कर्मचारियों की दीर्घकालिक वित्तीय सुरक्षा सुनिश्चित करेगा। इस बदलाव से उन लाखों मध्यम-वेतन कर्मचारियों को राहत मिलेगी, जो अब तक ईपीएफओ के दायरे से बाहर थे।
आगे की राह
इस निर्णय के क्रियान्वयन की रूपरेखा श्रम एवं रोजगार मंत्रालय द्वारा तय की जाएगी। विशेषज्ञों का मानना है कि वेतन सीमा में यह संशोधन असंगठित क्षेत्र से औपचारिक अर्थव्यवस्था की ओर श्रमिकों के प्रवाह को तेज़ कर सकता है। आने वाले महीनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि नियोक्ता इस बढ़े हुए दायरे को किस तरह अपनाते हैं।