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ईपीएफओ वेतन सीमा ₹25,000 होने पर CM विष्णुदेव साई ने की सराहना, 51 लाख कर्मचारियों को फायदा

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ईपीएफओ वेतन सीमा ₹25,000 होने पर CM विष्णुदेव साई ने की सराहना, 51 लाख कर्मचारियों को फायदा

सारांश

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने ईपीएफओ की अनिवार्य कवरेज सीमा ₹15,000 से बढ़ाकर ₹25,000 प्रति माह कर दी — लगभग 12 वर्षों में पहली बार। इससे 51 लाख से अधिक कर्मचारी भविष्य निधि, पेंशन और बीमा के दायरे में आएंगे। छत्तीसगढ़ के CM विष्णुदेव साई ने इसे श्रमिक कल्याण की दिशा में ऐतिहासिक कदम बताया।

मुख्य बातें

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 16 सितंबर को ईपीएफओ की अनिवार्य कवरेज वेतन सीमा ₹15,000 से बढ़ाकर ₹25,000 प्रति माह करने की मंजूरी दी।
इस फैसले से 51 लाख से अधिक अतिरिक्त कर्मचारी ईपीएफ, ईपीएस और ईडीएलआई के दायरे में आएंगे।
ईपीएफओ वेतन सीमा सितंबर 2014 के बाद पहली बार बदली गई है — लगभग 12 वर्षों के अंतराल पर।
छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साई ने एक्स पर पोस्ट कर इस निर्णय को 'अभिनंदनीय' बताया।
श्रम एवं रोजगार मंत्रालय के अनुसार, यह कदम औपचारिक रोजगार को बढ़ावा देगा और कर्मचारियों की दीर्घकालिक वित्तीय सुरक्षा सुनिश्चित करेगा।

छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साई ने बुधवार, 16 सितंबर को केंद्रीय मंत्रिमंडल के उस फैसले की सराहना की, जिसमें कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) के अनिवार्य कवरेज की वेतन सीमा ₹15,000 से बढ़ाकर ₹25,000 प्रति माह कर दी गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में लिए गए इस निर्णय से 51 लाख से अधिक अतिरिक्त कर्मचारी सामाजिक सुरक्षा के दायरे में आएंगे।

मुख्यमंत्री साई की प्रतिक्रिया

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साई ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपनी पोस्ट में इस निर्णय को 'देश के करोड़ों कामगारों की सामाजिक सुरक्षा को और सशक्त करने वाला महत्वपूर्ण निर्णय' बताया। उन्होंने कहा कि इस दूरदर्शी कदम का लाभ लाखों कामगार परिवारों को मिलेगा और उनके सुरक्षित भविष्य की नींव और मज़बूत होगी। साई ने श्रमिक कल्याण एवं 'विकसित भारत' के संकल्प को आगे बढ़ाने के लिए प्रधानमंत्री मोदी का आभार व्यक्त किया।

केंद्रीय मंत्रिमंडल का फैसला

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने बुधवार, 16 सितंबर को ईपीएफओ के तहत अनिवार्य कवरेज की वेतन सीमा को ₹15,000 से बढ़ाकर ₹25,000 प्रति माह करने की मंजूरी दी। एक आधिकारिक बयान के अनुसार, इस निर्णय से 51 लाख से अधिक अतिरिक्त कर्मचारियों को कर्मचारी भविष्य निधि (ईपीएफ), कर्मचारी पेंशन योजना (ईपीएस) और कर्मचारी जमा-संबद्ध बीमा योजना (ईडीएलआई) का लाभ मिलने की उम्मीद है।

ऐतिहासिक संदर्भ

गौरतलब है कि ईपीएफओ की वेतन सीमा 2004 से 2014 तक पूरे 10 वर्षों तक अपरिवर्तित रही थी। इसके बाद सितंबर 2014 में इसे बढ़ाकर ₹15,000 किया गया था। अब लगभग 12 वर्षों के अंतराल के बाद यह सीमा ₹25,000 की गई है। यह ऐसे समय में आया है जब कई राज्यों में न्यूनतम मजदूरी मौजूदा सीमा के करीब पहुँच चुकी थी।

आम कर्मचारियों पर असर

श्रम एवं रोजगार मंत्रालय के अनुसार, पिछले कुछ वर्षों में देश में वेतन स्तर, आय और औपचारिक रोजगार में लगातार वृद्धि हुई है। सरकार का कहना है कि यह निर्णय न केवल सामाजिक सुरक्षा को मज़बूत करेगा, बल्कि औपचारिक रोजगार को भी बढ़ावा देगा और कर्मचारियों की दीर्घकालिक वित्तीय सुरक्षा सुनिश्चित करेगा। इस बदलाव से उन लाखों मध्यम-वेतन कर्मचारियों को राहत मिलेगी, जो अब तक ईपीएफओ के दायरे से बाहर थे।

आगे की राह

इस निर्णय के क्रियान्वयन की रूपरेखा श्रम एवं रोजगार मंत्रालय द्वारा तय की जाएगी। विशेषज्ञों का मानना है कि वेतन सीमा में यह संशोधन असंगठित क्षेत्र से औपचारिक अर्थव्यवस्था की ओर श्रमिकों के प्रवाह को तेज़ कर सकता है। आने वाले महीनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि नियोक्ता इस बढ़े हुए दायरे को किस तरह अपनाते हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह सवाल भी उठता है कि 12 वर्षों की देरी के दौरान कितने कर्मचारी सामाजिक सुरक्षा के बिना रहे। ₹25,000 की नई सीमा भी कई महानगरों में प्रचलित वेतन स्तरों से नीचे है, जिससे बड़ी संख्या में कर्मचारी अभी भी स्वैच्छिक कवरेज पर निर्भर रहेंगे। असली परीक्षा यह है कि नियोक्ता — विशेषकर असंगठित और अर्ध-औपचारिक क्षेत्र में — इस विस्तारित दायरे का अनुपालन कैसे करते हैं, क्योंकि अनुपालन प्रवर्तन ऐतिहासिक रूप से कमज़ोर रहा है। राजनीतिक स्वागत की बाढ़ के बीच, क्रियान्वयन की जवाबदेही का ढाँचा अभी तक सार्वजनिक नहीं किया गया है।
RashtraPress
16 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ईपीएफओ की नई वेतन सीमा क्या है और यह कब से लागू होगी?
केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 16 सितंबर को ईपीएफओ की अनिवार्य कवरेज वेतन सीमा ₹15,000 से बढ़ाकर ₹25,000 प्रति माह करने की मंजूरी दी है। क्रियान्वयन की विस्तृत रूपरेखा श्रम एवं रोजगार मंत्रालय द्वारा तय की जाएगी।
इस फैसले से कितने कर्मचारियों को फायदा मिलेगा?
सरकारी बयान के अनुसार, इस निर्णय से 51 लाख से अधिक अतिरिक्त कर्मचारी ईपीएफ, ईपीएस और ईडीएलआई के दायरे में आएंगे। ये वे कर्मचारी हैं जो ₹15,000 से ₹25,000 के बीच वेतन पाते हैं और अब तक अनिवार्य कवरेज से बाहर थे।
ईपीएफओ वेतन सीमा आखिरी बार कब बदली गई थी?
ईपीएफओ की वेतन सीमा सितंबर 2014 में ₹6,500 से बढ़ाकर ₹15,000 की गई थी। उससे पहले यह सीमा 2004 से 2014 तक यानी 10 वर्षों तक अपरिवर्तित रही थी। अब लगभग 12 वर्षों बाद इसे ₹25,000 किया गया है।
CM विष्णुदेव साई ने इस फैसले पर क्या कहा?
छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साई ने एक्स पर पोस्ट कर इस निर्णय को 'देश के करोड़ों कामगारों की सामाजिक सुरक्षा को सशक्त करने वाला महत्वपूर्ण निर्णय' बताया। उन्होंने कहा कि इससे लाखों कामगार परिवारों को लाभ मिलेगा और उनके सुरक्षित भविष्य की नींव मज़बूत होगी।
ईपीएफओ कवरेज में ईपीएफ, ईपीएस और ईडीएलआई क्या हैं?
ईपीएफ (कर्मचारी भविष्य निधि) एक दीर्घकालिक बचत योजना है, ईपीएस (कर्मचारी पेंशन योजना) सेवानिवृत्ति पर पेंशन देती है, और ईडीएलआई (कर्मचारी जमा-संबद्ध बीमा योजना) कर्मचारी की मृत्यु पर परिवार को बीमा राशि प्रदान करती है। नई वेतन सीमा के तहत अब ₹25,000 तक वेतन पाने वाले कर्मचारियों को ये तीनों लाभ अनिवार्य रूप से मिलेंगे।
राष्ट्र प्रेस
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