17 सितंबर 2026
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एत्तिनहोले परियोजना: नवंबर के अंत तक तुमकुरु को मिलेगा पानी, मंत्री चेलुवरायस्वामी का वादा

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एत्तिनहोले परियोजना: नवंबर के अंत तक तुमकुरु को मिलेगा पानी, मंत्री चेलुवरायस्वामी का वादा

सारांश

कर्नाटक की एत्तिनहोले पेयजल परियोजना का पानी नवंबर के अंत तक तुमकुरु पहुँचाने का वादा किया गया है। ₹8,000 करोड़ से शुरू हुई यह परियोजना अब ₹23,000 करोड़ की हो चुकी है। केंद्र की वन मंजूरी और 15 अक्टूबर की निर्माण समयसीमा — दो अहम परीक्षाएँ सामने हैं।

मुख्य बातें

जल संसाधन मंत्री एन.
चेलुवरायस्वामी ने 17 सितंबर 2026 को एत्तिनहोले परियोजना का पानी नवंबर के अंत तक तुमकुरु पहुँचाने का वादा किया।
तुमकुरु खंड का निर्माण 15 अक्टूबर 2026 तक पूरा करने का लक्ष्य; 100 प्रतिशत जलापूर्ति सुनिश्चित करने का भरोसा।
परियोजना की लागत शुरुआती ₹8,000 करोड़ से बढ़कर ₹23,000 करोड़ हो चुकी है।
स्टेज-2 वन मंजूरी की फाइलें नई दिल्ली पहुँची; एक सप्ताह में केंद्र की अंतिम मंजूरी की उम्मीद।
कंचीगनहल्ली में वन विभाग की 1.9 किलोमीटर भूमि पर काम जारी; कट-एंड-कवर तकनीक से 28 मीटर गहरी खुदाई।
बिक्केगुड्डा परियोजना भी अगले दो महीनों में पूरी करने की घोषणा।

कर्नाटक के जल संसाधन मंत्री एन. चेलुवरायस्वामी ने गुरुवार, 17 सितंबर 2026 को घोषणा की कि महत्वाकांक्षी एत्तिनहोले इंटीग्रेटेड ड्रिंकिंग वाटर प्रोजेक्ट का पानी नवंबर के अंत तक तुमकुरु तक पहुँचा दिया जाएगा। मंत्री ने गुब्बी तालुक के कंचीगनहल्ली स्थित निर्माण स्थल का सीधे निरीक्षण किया और अधिकारियों को काम में तेज़ी लाने के स्पष्ट निर्देश दिए।

परियोजना का मुख्य घटनाक्रम

चेलुवरायस्वामी ने बताया कि तुमकुरु खंड का निर्माण 15 अक्टूबर 2026 तक पूरा कर लिया जाएगा और उसके बाद 100 प्रतिशत नियोजित जलापूर्ति सुनिश्चित की जाएगी। कंचीगनहल्ली में वन विभाग की 1.9 किलोमीटर भूमि पर निर्माण कार्य जारी है। उन्होंने कहा कि इस स्थान पर 28 मीटर गहरी खुदाई अनिवार्य है, जिसके लिए कट-एंड-कवर तकनीक अपनाने और मिट्टी धंसने से बचाव के लिए विशेष सावधानी बरतने के निर्देश दिए गए हैं।

मंत्री ने यह भी निर्देश दिए कि खुदाई से निकली मिट्टी के लिए आवंटित 10 एकड़ अतिरिक्त भूमि का सदुपयोग किया जाए और काम पूरा होने के बाद उसी मिट्टी से उचित तरीके से भराई की जाए।

वन मंजूरी और दिल्ली में फाइलें

परियोजना के लिए आवश्यक स्टेज-2 वन मंजूरी से जुड़ी फाइलें नई दिल्ली पहुँच चुकी हैं। वन विभाग के अपर मुख्य सचिव ने दिल्ली में आवेदन जमा कर दिया है। चेलुवरायस्वामी ने भरोसा जताया कि एक सप्ताह के भीतर केंद्र सरकार की अंतिम मंजूरी मिल जाएगी।

गौरतलब है कि वन भूमि पर मंजूरी का यह मुद्दा परियोजना की प्रगति में एक प्रमुख बाधा रहा है। केंद्र की त्वरित स्वीकृति मिलने के बाद ही तुमकुरु तक जलापूर्ति की समयसीमा को पूरी तरह पक्का किया जा सकेगा।

परियोजना की लागत और पृष्ठभूमि

एत्तिनहोले इंटीग्रेटेड ड्रिंकिंग वाटर प्रोजेक्ट का उद्देश्य नेत्रावती नदी की सहायक नदी येतिनहोले का पानी कर्नाटक के पूर्वी और मध्य भागों के सूखा प्रभावित जिलों में पीने के पानी के रूप में उपलब्ध कराना है। मंत्री ने बताया कि यह परियोजना पूर्व कांग्रेस सरकार का 'ड्रीम प्रोजेक्ट' है।

परियोजना की अनुमानित लागत शुरुआत में करीब ₹8,000 करोड़ थी, जो अब बढ़कर ₹23,000 करोड़ हो गई है — यानी तीन गुने से भी अधिक की वृद्धि। लागत बढ़ने के बावजूद मंत्री ने कहा कि सरकार किसानों और आम जन के हित में इसे जल्द से जल्द पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध है।

हेमावती लिंक कैनाल विवाद और किसानों की चिंताएँ

किसानों द्वारा हेमावती लिंक कैनाल परियोजना छोड़ने की माँग पर मंत्री ने संतुलित रुख अपनाया। उन्होंने कहा, 'तुमकुरु और रामनगर दोनों के किसान हमारे लिए बराबर हैं। सभी हमारे अपने हैं। हम मुख्यमंत्री के साथ विस्तृत चर्चा करेंगे और बिना किसी के साथ अन्याय किए सभी के हित में उचित कदम उठाएंगे।'

इसके अलावा चेलुवरायस्वामी ने किसानों के माइक्रोफाइनेंस संस्थानों पर बढ़ती निर्भरता पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि अब तक कुछ ही किसानों ने इन संस्थानों के कथित उत्पीड़न के बारे में लिखित शिकायत दर्ज कराई है और बिना लिखित शिकायत के कानूनी कार्रवाई करना सरकार के लिए कठिन है। उन्होंने किसानों से सतर्क रहने और कर्ज के जाल में न फँसने की अपील की।

अन्य घोषणाएँ और आगे की राह

मंत्री ने यह भी बताया कि बिक्केगुड्डा परियोजना, जो अपरिहार्य कारणों से विलंबित चल रही थी, अगले दो महीनों में पूरी कर दी जाएगी। निरीक्षण के दौरान गुब्बी विधायक और केएसआरटीसी कॉर्पोरेशन के अध्यक्ष पी. वासु तथा जल संसाधन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

यह ऐसे समय में आया है जब कर्नाटक के कई जिलों में जल संकट गहरा रहा है और एत्तिनहोले परियोजना वर्षों से स्थानीय निवासियों की बड़ी उम्मीद बनी हुई है। केंद्र की वन मंजूरी और निर्माण की गुणवत्ता — दोनों पर अब निगाहें टिकी हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

000 करोड़ से ₹23,000 करोड़ तक पहुँचना — यानी लगभग तीन गुनी वृद्धि — बड़े सरकारी बुनियादी ढाँचा प्रकल्पों में लागत विस्फोट के उस पुराने पैटर्न की याद दिलाता है जो जवाबदेही के बिना जारी रहता है। असली सवाल यह नहीं कि नवंबर की समयसीमा पूरी होगी या नहीं, बल्कि यह है कि केंद्र की वन मंजूरी — जो अभी भी लंबित है — मिलने में देरी हुई तो क्या नई समयसीमा फिर खिसकाई जाएगी। मुख्यधारा की कवरेज मंत्री की घोषणा पर टिकी है, जबकि स्टेज-2 वन मंजूरी का लंबित होना परियोजना का वास्तविक अवरोधक बिंदु है।
RashtraPress
17 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

एत्तिनहोले परियोजना क्या है और इसका उद्देश्य क्या है?
एत्तिनहोले इंटीग्रेटेड ड्रिंकिंग वाटर प्रोजेक्ट कर्नाटक की एक प्रमुख जलापूर्ति योजना है, जिसका मकसद नेत्रावती नदी की सहायक नदी येतिनहोले का पानी पूर्वी और मध्य कर्नाटक के सूखा प्रभावित जिलों तक पीने के पानी के रूप में पहुँचाना है। यह परियोजना पूर्व कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में शुरू की गई थी।
तुमकुरु को एत्तिनहोले का पानी कब तक मिलेगा?
जल संसाधन मंत्री एन. चेलुवरायस्वामी ने 17 सितंबर 2026 को वादा किया कि नवंबर के अंत तक तुमकुरु तक पानी पहुँचा दिया जाएगा। तुमकुरु खंड का निर्माण 15 अक्टूबर 2026 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
एत्तिनहोले परियोजना की लागत इतनी क्यों बढ़ गई?
परियोजना की शुरुआती अनुमानित लागत करीब ₹8,000 करोड़ थी, जो अब बढ़कर ₹23,000 करोड़ हो गई है। मंत्री ने लागत वृद्धि का विस्तृत कारण नहीं बताया, लेकिन कहा कि सरकार किसानों के हित में परियोजना को जल्द पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध है।
एत्तिनहोले परियोजना के लिए वन मंजूरी की स्थिति क्या है?
परियोजना के लिए स्टेज-2 वन मंजूरी की फाइलें नई दिल्ली पहुँच चुकी हैं और वन विभाग के अपर मुख्य सचिव ने आवेदन जमा कर दिया है। मंत्री चेलुवरायस्वामी को भरोसा है कि एक सप्ताह के भीतर केंद्र सरकार की अंतिम मंजूरी मिल जाएगी।
हेमावती लिंक कैनाल विवाद पर सरकार का क्या रुख है?
मंत्री चेलुवरायस्वामी ने कहा कि तुमकुरु और रामनगर दोनों के किसानों के हित सरकार के लिए समान हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री के साथ विस्तृत चर्चा कर सभी पक्षों के लिए उचित निर्णय लेने का आश्वासन दिया।
राष्ट्र प्रेस
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