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चुनावों में धनबल रोकना सबसे बड़ी चुनौती थी: पूर्व सीईसी एस.वाई. कुरैशी, 40 तरीकों की हुई थी पहचान

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चुनावों में धनबल रोकना सबसे बड़ी चुनौती थी: पूर्व सीईसी एस.वाई. कुरैशी, 40 तरीकों की हुई थी पहचान

सारांश

अखबारों में छुपी नकदी, फर्जी शादी की पार्टियाँ, घर-घर पैसे — पूर्व सीईसी एस.वाई. कुरैशी ने खुलासा किया कि 2010 में उन्होंने धनबल के 40 तरीके चिह्नित किए और सैकड़ों करोड़ जब्त किए, फिर भी स्वीकारा कि यह लड़ाई अधूरी रही।

मुख्य बातें

पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त एस.वाई.
कुरैशी ने 2010 में कार्यभार संभालते ही चुनावी धनबल को सर्वोच्च प्राथमिकता घोषित किया।
चुनाव आयोग ने धन वितरण के 40 अलग-अलग तौर-तरीकों की पहचान की, जिनमें अखबारों में नकदी छुपाना और फर्जी शादी-जन्मदिन पार्टियाँ शामिल थीं।
कार्रवाई के दौरान पहले करोड़ों , फिर सैकड़ों करोड़ रुपये की नकदी जब्त की गई।
व्यय निगरानी प्रभाग की स्थापना की गई, जिसका नेतृत्व सीबीडीटी के एक वरिष्ठ आयकर अधिकारी ने किया।
कुरैशी ने स्वीकार किया कि धनबल पर पूर्ण नियंत्रण नहीं पाया जा सका और समय के साथ नए तरीके विकसित होते रहे।

पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त एस.वाई. कुरैशी ने खुलासा किया है कि 2010 में चुनाव आयोग का कार्यभार संभालते ही उन्होंने चुनावी धनबल को अपनी सर्वोच्च प्राथमिकताओं में रखा था। एक विशेष साक्षात्कार में उन्होंने बताया कि आयोग ने मतदाताओं को प्रभावित करने के लिए धन के 40 अलग-अलग तौर-तरीकों की पहचान की थी और कार्रवाई के दौरान पहले करोड़ों, फिर सैकड़ों करोड़ रुपये की नकदी जब्त की गई।

पहली प्रेस कॉन्फ्रेंस से ही दो बड़ी चुनौतियाँ

कुरैशी के अनुसार, मुख्य चुनाव आयुक्त बनने के बाद उन्होंने अपनी पहली प्रेस कॉन्फ्रेंस में दो प्रमुख चुनौतियाँ सार्वजनिक रूप से रखी थीं। उन्होंने कहा, 'पहली थी शिक्षित शहरी मतदाताओं की मतदान के प्रति उदासीनता और दूसरी थी चुनावों में धनबल का इस्तेमाल।' यह ऐसे समय की बात है जब चुनावी खर्च पर निगरानी की कोई व्यवस्थित संरचना नहीं थी।

व्यय निगरानी प्रभाग की स्थापना

धनबल पर लगाम लगाने के लिए चुनाव आयोग ने दो विशेष प्रभाग स्थापित किए। मतदाता जागरूकता प्रभाग के लिए सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय से एक पेशेवर अधिकारी को पहला महानिदेशक नियुक्त किया गया। वहीं, व्यय निगरानी प्रभाग के लिए केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) के एक वरिष्ठ आयकर अधिकारी को महानिदेशक बनाया गया।

कुरैशी ने बताया, 'उन्होंने नियम और दिशानिर्देश तैयार किए। हमने उनका व्यापक प्रचार किया और राजनीतिक दलों को प्रशिक्षण भी दिया, ताकि वे अनजाने में गलती न करें। हमारा उद्देश्य दंडात्मक कार्रवाई से अधिक रोकथाम पर था।'

धन वितरण के अनोखे हथकंडे

पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त ने चुनावों के दौरान अपनाए जाने वाले धन वितरण के कई चौंकाने वाले तरीकों का विवरण दिया। उन्होंने कहा, 'अखबार खोलते ही उसमें से नकदी निकल आती थी। कई जगह घर-घर जाकर पैसे पहुंचाए जाते थे। कहीं सोने की चेन रख दी जाती थी, तो कहीं मतदाताओं को दावत देने के लिए फर्जी शादी और जन्मदिन की पार्टियों का आयोजन किया जाता था।'

गौरतलब है कि ये तरीके इसलिए चुने जाते थे ताकि चुनाव आयोग की निगरानी से बचा जा सके और नकदी वितरण को सामाजिक आयोजनों की आड़ में छुपाया जा सके। कुरैशी ने इन सभी 40 तौर-तरीकों का उल्लेख अपनी पुस्तक 'एन अनडॉक्यूमेंटेड वंडर: द मेकिंग ऑफ द ग्रेट इंडियन इलेक्शन' में भी किया है।

सफलता मिली, लेकिन चुनौती बनी रही

निगरानी तंत्र मजबूत होने के बाद शुरुआती दौर में चुनाव आयोग को उल्लेखनीय सफलता मिली। कुरैशी के अनुसार पहले करोड़ों और बाद में सैकड़ों करोड़ रुपये की नकदी जब्त की गई। हालाँकि उन्होंने स्वीकार किया कि यह समस्या पूरी तरह नियंत्रण में नहीं आ सकी।

उन्होंने कहा, 'मुझे पूरा विश्वास है कि समय के साथ नए तरीके भी विकसित हुए होंगे। इसलिए मैं यह नहीं कहूंगा कि हम इस समस्या पर पूरी तरह नियंत्रण पा सके, जैसा हम चाहते थे।' यह स्वीकारोक्ति इस बात की ओर इशारा करती है कि चुनावी धनबल एक निरंतर विकसित होती चुनौती है, जिसके लिए हर चुनाव चक्र में नई रणनीति की ज़रूरत पड़ती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन स्वयं कुरैशी का यह स्वीकारना कि 'पूरी तरह नियंत्रण नहीं पाया' — यही असली खबर है। चुनावी बॉन्ड विवाद और बढ़ते चुनावी खर्च के दौर में यह सवाल और भी प्रासंगिक हो जाता है कि क्या व्यय निगरानी तंत्र वाकई धनबल की रफ्तार के साथ कदम मिला पा रहा है, या केवल पुराने तरीकों को पकड़ने में सफल है जबकि नए तरीके अनदेखे रह जाते हैं।
RashtraPress
14 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पूर्व सीईसी एस.वाई. कुरैशी ने चुनावों में धनबल रोकने के लिए क्या किया?
कुरैशी ने 2010 में मुख्य चुनाव आयुक्त बनने के बाद चुनाव आयोग में दो विशेष प्रभाग बनाए — मतदाता जागरूकता प्रभाग और व्यय निगरानी प्रभाग। व्यय निगरानी प्रभाग के तहत सीबीडीटी के एक वरिष्ठ अधिकारी को नियुक्त किया गया, जिन्होंने नियम और दिशानिर्देश तैयार किए।
चुनावों में नकदी बांटने के कौन-से तरीके सामने आए थे?
चुनाव आयोग ने धन वितरण के 40 अलग-अलग तरीके चिह्नित किए थे। इनमें अखबारों में नकदी छुपाना, घर-घर पैसे पहुंचाना, सोने की चेन देना और फर्जी शादी व जन्मदिन की पार्टियों की आड़ में मतदाताओं को दावत देना शामिल था।
चुनाव आयोग ने धनबल के खिलाफ कार्रवाई में कितनी नकदी जब्त की?
कुरैशी के अनुसार निगरानी तंत्र मजबूत होने के बाद शुरुआती दौर में पहले करोड़ों और बाद में सैकड़ों करोड़ रुपये की नकदी जब्त की गई। हालाँकि उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि धनबल पर पूर्ण नियंत्रण नहीं पाया जा सका।
कुरैशी ने चुनावी धनबल के बारे में किस पुस्तक में लिखा है?
उन्होंने अपनी पुस्तक 'एन अनडॉक्यूमेंटेड वंडर: द मेकिंग ऑफ द ग्रेट इंडियन इलेक्शन' में धनबल के दुरुपयोग के 40 तौर-तरीकों का विस्तृत उल्लेख किया है।
क्या चुनाव आयोग धनबल की समस्या पर पूरी तरह काबू पा सका?
नहीं। कुरैशी ने स्वयं स्वीकार किया कि धनबल पर पूरी तरह नियंत्रण नहीं पाया जा सका। उनके अनुसार समय के साथ नए तरीके भी विकसित होते रहे, इसलिए यह एक निरंतर चलने वाली चुनौती है।
राष्ट्र प्रेस
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