फाल्टा पुनर्मतदान: जहांगीर खान के नाम वापसी पर भाजपा-माकपा ने टीएमसी को बताया 'डरपोक', सपा ने किया बचाव
सारांश
मुख्य बातें
पश्चिम बंगाल के फाल्टा विधानसभा क्षेत्र में प्रस्तावित पुनर्मतदान से ठीक पहले तृणमूल कांग्रेस (TMC) उम्मीदवार जहांगीर खान के अचानक नाम वापस लेने से राज्य की राजनीति में उबाल आ गया है। 19 मई 2026 को प्रचार के अंतिम दिन खान ने घोषणा की, "मैं यह चुनाव नहीं लड़ रहा हूं।" इस फैसले ने विपक्षी दलों को तृणमूल कांग्रेस पर हमले का मौका दे दिया।
मुख्य घटनाक्रम
पुनर्मतदान के प्रचार के आखिरी दिन जहांगीर खान ने बिना कोई विस्तृत कारण बताए चुनाव से हटने की घोषणा कर दी। यह घोषणा ऐसे समय आई जब विधानसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस की हार को अभी एक महीना भी नहीं बीता था। इंडियन सेक्युलर फ्रंट (ISF) के नेता नौशाद सिद्दीकी ने नाम वापसी के पीछे तीन संभावित कारण गिनाए — खान का व्यक्तिगत निर्णय, भाजपा को आसान जीत देने का संकेत, या तृणमूल कांग्रेस का आंतरिक विवाद।
भाजपा और माकपा की तीखी प्रतिक्रिया
भारतीय जनता पार्टी (BJP) के प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने तृणमूल कांग्रेस पर सीधा निशाना साधते हुए कहा, "तृणमूल कांग्रेस एक डरपोक, भागने वाली और आत्मसमर्पण करने वाली पार्टी है। बंगाल चुनाव में जनता का मूड और माहौल देखकर उनके उम्मीदवार ने चुनाव से पीछे हटने का फैसला किया।" उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि तृणमूल केवल भय के दम पर चुनाव जीतना चाहती थी।
माकपा (CPI-M) नेता हन्नान मोल्लाह ने कहा, "संघर्ष से भागने से विकास नहीं होता। हमारी पार्टी छोटी है और हम हर दिन हमलों का सामना कर रहे हैं, फिर भी हमने अपना उम्मीदवार उतारा है। नतीजा चाहे जो भी हो, अन्याय के खिलाफ आवाज उठाना जरूरी है।" उन्होंने तृणमूल पर कटाक्ष करते हुए कहा, "जब समय अच्छा होता है तो वे सबसे आगे रहते हैं, लेकिन मुश्किल समय आते ही भाग जाते हैं — यही तृणमूल कांग्रेस का चरित्र है।"
समाजवादी पार्टी का समर्थन
'इंडिया ब्लॉक' की सहयोगी समाजवादी पार्टी (SP) के नेता एसटी हसन ने तृणमूल उम्मीदवार के फैसले का खुलकर समर्थन किया। उन्होंने कहा, "अब चुनावों की कोई प्रासंगिकता नहीं बची है। चुनावों में धांधली हो रही है और चुनाव आयोग खुद एक राजनीतिक पार्टी की तरह काम कर रहा है।" हसन ने यह भी कहा कि रिपोल में जहांगीर खान की हार तय थी, इसलिए यह फैसला व्यावहारिक था।
आईएसएफ का विश्लेषण
नौशाद सिद्दीकी ने दावा किया कि यदि जहांगीर खान चुनाव लड़ते तो वे चौथे या पाँचवें स्थान पर रहते, जो पार्टी के लिए बड़ी शर्मिंदगी होती। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि विधानसभा चुनाव में तृणमूल की हार के महज एक महीने के भीतर पार्टी के भीतर रिपोल लड़ने की इच्छाशक्ति नहीं बची — यह संगठनात्मक कमज़ोरी का संकेत है।
आगे क्या होगा
फाल्टा पुनर्मतदान अब तृणमूल कांग्रेस के बिना ही होगा, जिससे भाजपा की राह आसान मानी जा रही है। गौरतलब है कि यह क्षेत्र पहले से ही राजनीतिक रूप से संवेदनशील रहा है और इस नाम वापसी ने 2026 के बंगाल चुनाव परिदृश्य में तृणमूल की स्थिति को लेकर नई बहस छेड़ दी है।