फाल्टा उपचुनाव मतगणना से पहले मंत्री दिलीप घोष का दावा — 'टीएमसी के लोग मैदान छोड़ भागे'
सारांश
मुख्य बातें
पश्चिम बंगाल की फाल्टा विधानसभा उपचुनाव की मतगणना रविवार, 25 मई 2025 को होनी है। मतगणना से एक दिन पहले बंगाल सरकार के मंत्री दिलीप घोष ने दावा किया कि फाल्टा का परिणाम पहले से तय है और तृणमूल कांग्रेस (TMC) के कार्यकर्ता मुकाबले से पहले ही पीछे हट गए हैं। उन्होंने पत्रकारों से बातचीत में कहा, 'कोई लड़ाई नहीं हुई — टीएमसी के लोग भाग गए।'
मतगणना से पहले दिलीप घोष का दावा
पत्रकारों से बातचीत करते हुए दिलीप घोष ने कहा कि फाल्टा का नतीजा सबको पता है। उन्होंने केंद्र सरकार की ओर से 51,000 लोगों को नौकरी दिए जाने का उल्लेख करते हुए कहा कि जिस तरह वह काम पारदर्शिता से हुआ, उसी तरह यहाँ भी पारदर्शिता के साथ काम किया जाएगा।
नगर निगम की ओर से टीएमसी को नोटिस दिए जाने पर घोष ने तंज कसते हुए कहा कि पार्टी अस्थायी है और उसका कार्यालय भी अस्थायी है। उन्होंने कहा, 'जब पार्टी ही नहीं रहेगी तो दफ्तर की क्या ज़रूरत?'
काउंसलर की गिरफ्तारी और कानून-व्यवस्था पर बयान
कोलकाता के एक काउंसलर की गिरफ्तारी पर प्रतिक्रिया देते हुए घोष ने कहा कि ऐसे हज़ारों काउंसलर हैं जो 'लुटेरे और असामाजिक' हैं। उन्होंने कहा कि जैसे-जैसे साक्ष्य सामने आएंगे, पुलिस अपना काम करेगी और कानून से कोई ऊपर नहीं है। उनके अनुसार, 'बंगाल में लूटमारी का नेतृत्व इन्हीं लोगों ने किया है।'
पेट्रोल-डीजल मूल्यवृद्धि पर सफाई
पेट्रोल-डीजल की कीमतों में हाल की बढ़ोतरी पर दिलीप घोष ने कहा कि दूसरे देशों में कीमतें कहीं अधिक बढ़ी हैं। उन्होंने तर्क दिया कि सरकार ने तेल कंपनियों को लंबे समय तक दाम बढ़ाने से रोका, जिससे उन्हें भारी नुकसान उठाना पड़ा। उनके अनुसार मौजूदा हालात में तेल के दाम का कुछ हद तक बढ़ना स्वाभाविक है।
फाल्टा उपचुनाव की पृष्ठभूमि
फाल्टा विधानसभा सीट पर पहले 29 अप्रैल को मतदान हुआ था। बड़े पैमाने पर चुनावी धांधली की शिकायतें मिलने के बाद भारत निर्वाचन आयोग (ECI) ने पूरे विधानसभा क्षेत्र में पुनर्मतदान का आदेश दिया। इसके बाद 21 मई को पुनर्मतदान शांतिपूर्वक संपन्न हुआ।
पश्चिम बंगाल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी के अनुसार, 21 मई को शाम 5 बजे तक मतदान प्रतिशत 86.11% रहा — जो किसी एकल विधानसभा उपचुनाव के लिए उल्लेखनीय आँकड़ा है। 285 मतदान केंद्रों में से किसी से भी हिंसा, तनाव या धांधली की कोई रिपोर्ट नहीं आई।
सुरक्षा व्यवस्था और केंद्रीय बल
पुनर्मतदान के दौरान पूरे फाल्टा विधानसभा क्षेत्र में केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (CAPF) की 35 कंपनियाँ तैनात की गई थीं। किसी एक विधानसभा क्षेत्र के लिए इस स्तर की सुरक्षा तैनाती असामान्य मानी जाती है, जो पहले मतदान के दौरान उठी शिकायतों की गंभीरता को रेखांकित करती है। मतगणना के नतीजे स्पष्ट करेंगे कि दोबारा हुए इस मतदान का राजनीतिक समीकरणों पर क्या असर पड़ा।