नोएडा इंडोर स्टेडियम टेंडर विवाद: फर्जी दस्तावेजों के आरोप, आरपी सिंह से जुड़े पक्ष पर सवाल, निष्पक्ष जांच की मांग
सारांश
मुख्य बातें
नोएडा प्राधिकरण द्वारा वर्ष 2021 में नोएडा इंडोर स्टेडियम के संचालन हेतु जारी किए गए टेंडर को लेकर गंभीर आरोप सामने आए हैं। कथित तौर पर फर्जी अनुभव प्रमाणपत्र, भ्रामक कोच प्रोफाइल और गलत जानकारियों के आधार पर टेंडर हासिल किए जाने के दावों ने पूरी प्रक्रिया की पारदर्शिता और निष्पक्षता पर गहरे सवाल खड़े कर दिए हैं। 21 जुलाई 2026 को यह मामला एक बार फिर चर्चा में आया है, जब संबंधित दस्तावेज़ सार्वजनिक हुए।
मुख्य आरोप: क्या हुआ टेंडर प्रक्रिया में?
आरोप है कि टेंडर हासिल करने वाली कंपनी सिक्योरिटी सॉल्यूशंस और पूर्व भारतीय क्रिकेटर आरपी सिंह से जुड़े पक्ष ने तकनीकी मूल्यांकन में अधिक अंक पाने के लिए कथित तौर पर फर्जी दस्तावेज़ प्रस्तुत किए। इन्हीं दस्तावेज़ों के आधार पर कंपनी को तकनीकी मूल्यांकन में 78.78 अंक दिए गए, जबकि प्रतिस्पर्धी संस्था पीएफआई इंडिया को 70 अंक देकर पीछे कर दिया गया।
आरोपों के अनुसार कंपनी ने अपना अनुभव सिद्ध करने के लिए नोएडा सेक्टर-93 स्थित सुपरटेक एमराल्ड कोर्ट का एक अनुभव प्रमाणपत्र प्रस्तुत किया। हालांकि, संबंधित अपार्टमेंट ओनर्स एसोसिएशन (एओए) ने लिखित रूप से इस दावे का खंडन किया है।
एओए का खंडन: 2016 के बाद कोई संबंध नहीं
एसोसिएशन का कहना है कि वर्ष 2016 के बाद से कंपनी के साथ उनका किसी भी प्रकार का अनुबंध, वित्तीय लेन-देन अथवा खेल सुविधाओं के संचालन से जुड़ा कोई संबंध नहीं रहा। इसके अतिरिक्त आरोप यह भी है कि अनुभव प्रमाणपत्र में जिन खेल सुविधाओं का उल्लेख किया गया, उनमें से कई उस समय परिसर में मौजूद ही नहीं थीं।
तकनीकी मूल्यांकन पर सवाल
विवाद का एक अहम पहलू तकनीकी मूल्यांकन से भी जुड़ा है। दावा किया जा रहा है कि कंपनी ने इंडोर स्टेडियम के संचालन के लिए जारी टेंडर में आउटडोर खेलों के कोचों की प्रोफाइल को इंडोर खेलों के अनुभव के रूप में प्रस्तुत किया। यदि ये आरोप सही साबित होते हैं, तो तकनीकी मूल्यांकन की पूरी प्रक्रिया पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
यह भी पूछा जा रहा है कि टेंडर प्रक्रिया के दौरान प्रस्तुत अनुभव प्रमाणपत्रों, कोचों की योग्यता और अन्य दस्तावेज़ों का सत्यापन किस स्तर पर किया गया था। यदि दस्तावेज़ों में भ्रामक जानकारी थी, तो उन्हें स्वीकार करने वाले अधिकारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में आनी चाहिए।
विशेषज्ञों की राय
विशेषज्ञों का मानना है कि सरकारी टेंडर प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी और निष्पक्ष होनी चाहिए, क्योंकि इससे सार्वजनिक संसाधनों का संचालन और खिलाड़ियों का भविष्य जुड़ा होता है। यदि किसी संस्था ने गलत जानकारी देकर अनुचित लाभ प्राप्त किया है, तो यह केवल एक टेंडर का मामला नहीं, बल्कि सरकारी व्यवस्था को गुमराह करने और निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा को प्रभावित करने का गंभीर विषय हो सकता है।
आगे क्या: निष्पक्ष जांच की मांग
जनहित में पूरे टेंडर रिकॉर्ड, अनुभव प्रमाणपत्रों, कोचों की प्रोफाइल, तकनीकी मूल्यांकन और अंक आवंटन की स्वतंत्र एजेंसी से निष्पक्ष जांच कराने की मांग लगातार तेज हो रही है। मांग की जा रही है कि यदि जांच में आरोप सही साबित हों, तो संबंधित कंपनी के साथ-साथ इस प्रक्रिया में शामिल जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ भी नियमानुसार कठोर कानूनी कार्रवाई की जाए। फिलहाल इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि या खंडन संबंधित जांच के बाद ही संभव होगा।