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नोएडा इंडोर स्टेडियम टेंडर विवाद: फर्जी दस्तावेजों के आरोप, आरपी सिंह से जुड़े पक्ष पर सवाल, निष्पक्ष जांच की मांग

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नोएडा इंडोर स्टेडियम टेंडर विवाद: फर्जी दस्तावेजों के आरोप, आरपी सिंह से जुड़े पक्ष पर सवाल, निष्पक्ष जांच की मांग

सारांश

नोएडा प्राधिकरण के 2021 के इंडोर स्टेडियम टेंडर पर गंभीर सवाल — कथित फर्जी अनुभव प्रमाणपत्र, आउटडोर कोचों को इंडोर अनुभव दिखाने के आरोप, और एओए का लिखित खंडन। सिक्योरिटी सॉल्यूशंस को 78.78 अंक बनाम पीएफआई इंडिया के 70 अंक — अब स्वतंत्र जांच की मांग उठ रही है।

मुख्य बातें

नोएडा प्राधिकरण के वर्ष 2021 के इंडोर स्टेडियम टेंडर पर फर्जी दस्तावेज़ों के गंभीर आरोप सामने आए हैं।
कंपनी सिक्योरिटी सॉल्यूशंस और पूर्व क्रिकेटर आरपी सिंह से जुड़े पक्ष पर कथित तौर पर भ्रामक अनुभव प्रमाणपत्र व कोच प्रोफाइल प्रस्तुत करने के आरोप हैं।
सुपरटेक एमराल्ड कोर्ट एओए ने लिखित रूप से पुष्टि की कि 2016 के बाद कंपनी से कोई अनुबंध या संबंध नहीं रहा।
तकनीकी मूल्यांकन में कंपनी को 78.78 अंक मिले, जबकि प्रतिस्पर्धी पीएफआई इंडिया को 70 अंक दिए गए।
आरोप है कि आउटडोर खेलों के कोचों की प्रोफाइल को इंडोर खेलों के अनुभव के रूप में प्रस्तुत किया गया।
स्वतंत्र एजेंसी से पूरे टेंडर रिकॉर्ड की निष्पक्ष जांच और दोषियों पर कानूनी कार्रवाई की मांग तेज हो रही है।

नोएडा प्राधिकरण द्वारा वर्ष 2021 में नोएडा इंडोर स्टेडियम के संचालन हेतु जारी किए गए टेंडर को लेकर गंभीर आरोप सामने आए हैं। कथित तौर पर फर्जी अनुभव प्रमाणपत्र, भ्रामक कोच प्रोफाइल और गलत जानकारियों के आधार पर टेंडर हासिल किए जाने के दावों ने पूरी प्रक्रिया की पारदर्शिता और निष्पक्षता पर गहरे सवाल खड़े कर दिए हैं। 21 जुलाई 2026 को यह मामला एक बार फिर चर्चा में आया है, जब संबंधित दस्तावेज़ सार्वजनिक हुए।

मुख्य आरोप: क्या हुआ टेंडर प्रक्रिया में?

आरोप है कि टेंडर हासिल करने वाली कंपनी सिक्योरिटी सॉल्यूशंस और पूर्व भारतीय क्रिकेटर आरपी सिंह से जुड़े पक्ष ने तकनीकी मूल्यांकन में अधिक अंक पाने के लिए कथित तौर पर फर्जी दस्तावेज़ प्रस्तुत किए। इन्हीं दस्तावेज़ों के आधार पर कंपनी को तकनीकी मूल्यांकन में 78.78 अंक दिए गए, जबकि प्रतिस्पर्धी संस्था पीएफआई इंडिया को 70 अंक देकर पीछे कर दिया गया।

आरोपों के अनुसार कंपनी ने अपना अनुभव सिद्ध करने के लिए नोएडा सेक्टर-93 स्थित सुपरटेक एमराल्ड कोर्ट का एक अनुभव प्रमाणपत्र प्रस्तुत किया। हालांकि, संबंधित अपार्टमेंट ओनर्स एसोसिएशन (एओए) ने लिखित रूप से इस दावे का खंडन किया है।

एओए का खंडन: 2016 के बाद कोई संबंध नहीं

एसोसिएशन का कहना है कि वर्ष 2016 के बाद से कंपनी के साथ उनका किसी भी प्रकार का अनुबंध, वित्तीय लेन-देन अथवा खेल सुविधाओं के संचालन से जुड़ा कोई संबंध नहीं रहा। इसके अतिरिक्त आरोप यह भी है कि अनुभव प्रमाणपत्र में जिन खेल सुविधाओं का उल्लेख किया गया, उनमें से कई उस समय परिसर में मौजूद ही नहीं थीं।

तकनीकी मूल्यांकन पर सवाल

विवाद का एक अहम पहलू तकनीकी मूल्यांकन से भी जुड़ा है। दावा किया जा रहा है कि कंपनी ने इंडोर स्टेडियम के संचालन के लिए जारी टेंडर में आउटडोर खेलों के कोचों की प्रोफाइल को इंडोर खेलों के अनुभव के रूप में प्रस्तुत किया। यदि ये आरोप सही साबित होते हैं, तो तकनीकी मूल्यांकन की पूरी प्रक्रिया पर सवाल उठना स्वाभाविक है।

यह भी पूछा जा रहा है कि टेंडर प्रक्रिया के दौरान प्रस्तुत अनुभव प्रमाणपत्रों, कोचों की योग्यता और अन्य दस्तावेज़ों का सत्यापन किस स्तर पर किया गया था। यदि दस्तावेज़ों में भ्रामक जानकारी थी, तो उन्हें स्वीकार करने वाले अधिकारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में आनी चाहिए।

विशेषज्ञों की राय

विशेषज्ञों का मानना है कि सरकारी टेंडर प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी और निष्पक्ष होनी चाहिए, क्योंकि इससे सार्वजनिक संसाधनों का संचालन और खिलाड़ियों का भविष्य जुड़ा होता है। यदि किसी संस्था ने गलत जानकारी देकर अनुचित लाभ प्राप्त किया है, तो यह केवल एक टेंडर का मामला नहीं, बल्कि सरकारी व्यवस्था को गुमराह करने और निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा को प्रभावित करने का गंभीर विषय हो सकता है।

आगे क्या: निष्पक्ष जांच की मांग

जनहित में पूरे टेंडर रिकॉर्ड, अनुभव प्रमाणपत्रों, कोचों की प्रोफाइल, तकनीकी मूल्यांकन और अंक आवंटन की स्वतंत्र एजेंसी से निष्पक्ष जांच कराने की मांग लगातार तेज हो रही है। मांग की जा रही है कि यदि जांच में आरोप सही साबित हों, तो संबंधित कंपनी के साथ-साथ इस प्रक्रिया में शामिल जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ भी नियमानुसार कठोर कानूनी कार्रवाई की जाए। फिलहाल इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि या खंडन संबंधित जांच के बाद ही संभव होगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

जहाँ दस्तावेज़ सत्यापन की जिम्मेदारी अक्सर कागज़ों तक ही सिमटी रहती है। गौरतलब है कि यदि एओए का लिखित खंडन और आउटडोर-कोच-प्रोफाइल वाला आरोप सही है, तो प्रश्न केवल कंपनी की नीयत का नहीं, बल्कि उन अधिकारियों की जवाबदेही का भी है जिन्होंने बिना सत्यापन के दस्तावेज़ स्वीकार किए। खिलाड़ियों के भविष्य से जुड़ी सुविधाओं का संचालन यदि संदिग्ध प्रक्रिया से तय हो, तो यह सार्वजनिक विश्वास पर सीधा आघात है। स्वतंत्र जांच ही एकमात्र रास्ता है जो इस मामले में पारदर्शिता और जवाबदेही दोनों सुनिश्चित कर सकती है।
RashtraPress
21 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

नोएडा इंडोर स्टेडियम टेंडर विवाद क्या है?
नोएडा प्राधिकरण द्वारा वर्ष 2021 में इंडोर स्टेडियम संचालन के लिए जारी टेंडर में कंपनी सिक्योरिटी सॉल्यूशंस पर कथित तौर पर फर्जी अनुभव प्रमाणपत्र और भ्रामक कोच प्रोफाइल प्रस्तुत कर टेंडर हासिल करने के आरोप हैं। इन आरोपों की अभी आधिकारिक जांच नहीं हुई है।
सुपरटेक एमराल्ड कोर्ट एओए ने क्या कहा?
अपार्टमेंट ओनर्स एसोसिएशन ने लिखित रूप से स्पष्ट किया कि वर्ष 2016 के बाद से कंपनी के साथ उनका कोई अनुबंध, वित्तीय लेन-देन या खेल सुविधाओं के संचालन से जुड़ा संबंध नहीं रहा। साथ ही कहा गया कि प्रमाणपत्र में उल्लिखित कुछ खेल सुविधाएँ उस समय परिसर में थीं ही नहीं।
तकनीकी मूल्यांकन में अंकों का विवाद क्या है?
आरोप है कि कंपनी को तकनीकी मूल्यांकन में 78.78 अंक दिए गए, जबकि प्रतिस्पर्धी संस्था पीएफआई इंडिया को केवल 70 अंक मिले। दावा किया जा रहा है कि यह अंतर आउटडोर खेलों के कोचों की प्रोफाइल को इंडोर खेलों के अनुभव के रूप में गलत तरीके से प्रस्तुत करने के कारण बना।
इस मामले में आरपी सिंह की क्या भूमिका बताई जा रही है?
आरोपों के अनुसार पूर्व भारतीय क्रिकेटर आरपी सिंह से जुड़ा पक्ष टेंडर हासिल करने वाली कंपनी से संबद्ध था। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र जांच अभी नहीं हुई है और आधिकारिक पुष्टि या खंडन बाकी है।
अब इस मामले में क्या होगा आगे?
जनहित में पूरे टेंडर रिकॉर्ड, अनुभव प्रमाणपत्रों, कोच प्रोफाइल और अंक आवंटन की स्वतंत्र एजेंसी से निष्पक्ष जांच की मांग तेज हो रही है। यदि जांच में आरोप सही साबित होते हैं तो कंपनी और संबंधित अधिकारियों दोनों के खिलाफ नियमानुसार कानूनी कार्रवाई की माँग की जा रही है।
राष्ट्र प्रेस
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