नोएडा इंडोर स्टेडियम टेंडर घोटाला: विजेंद्र सिंह ने CM योगी से माँगी सख्त कार्रवाई
सारांश
मुख्य बातें
ओलंपिक पदक विजेता बॉक्सर विजेंद्र सिंह ने 1 अगस्त 2026 को सोशल मीडिया पोस्ट के ज़रिए नोएडा इंडोर स्टेडियम टेंडर विवाद में सीधे हस्तक्षेप करते हुए नोएडा पुलिस और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से निष्पक्ष जाँच और दोषियों पर कड़ी कानूनी कार्रवाई की माँग की। सेक्टर-21ए स्थित इस स्टेडियम का संचालन टेंडर हासिल करने वाली सिक्योरिटी सॉल्यूशंस कंपनी पर फर्जी दस्तावेज़ों के आधार पर अनुबंध लेने के गंभीर आरोप हैं।
मुख्य आरोप क्या हैं
जाँच एजेंसियों के अनुसार, सिक्योरिटी सॉल्यूशंस कंपनी ने टेंडर प्रक्रिया के दौरान ऐसे दस्तावेज़ प्रस्तुत किए जिनमें कथित तौर पर कई अनियमितताएँ पाई गई हैं। इससे भी गंभीर आरोप यह है कि कंपनी ने विजेंद्र सिंह सहित कई अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ियों के नाम और उपलब्धियों का बिना अनुमति के व्यावसायिक लाभ के लिए उपयोग किया। यह मामला सेक्टर-24 थाना क्षेत्र के अंतर्गत दर्ज है।
विजेंद्र सिंह की प्रतिक्रिया
विजेंद्र ने अपनी सोशल मीडिया पोस्ट में स्पष्ट कहा कि खिलाड़ियों की प्रतिष्ठा और उपलब्धियों का किसी भी निजी लाभ के लिए दुरुपयोग बर्दाश्त नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने संबंधित एजेंसियों से पूरे मामले की गहन जाँच कराने की अपील की। गौरतलब है कि विजेंद्र सिंह ने 2008 बीजिंग ओलंपिक में देश के लिए ऐतिहासिक कांस्य पदक जीता था, जिससे उनकी साख राष्ट्रीय स्तर पर अत्यंत ऊँची है।
नोएडा प्राधिकरण की कार्रवाई
नोएडा प्राधिकरण के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (CEO) ने मामले को गंभीरता से लेते हुए संबंधित कंपनी को नोटिस जारी करने की पुष्टि की है। प्राधिकरण की प्रारंभिक जाँच में टेंडर दस्तावेज़ों में गड़बड़ियों के संकेत मिले हैं। अधिकारियों के अनुसार, यदि फर्जीवाड़े या नियम-उल्लंघन की पुष्टि होती है तो कंपनी के विरुद्ध नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी।
खेल जगत और पारदर्शिता का सवाल
यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब देश में खेल संस्थानों के प्रशासन और टेंडर प्रक्रियाओं की पारदर्शिता पर पहले से सवाल उठते रहे हैं। खिलाड़ियों और खेल प्रेमियों का कहना है कि यदि खेल सुविधाओं के संचालन में जवाबदेही सुनिश्चित नहीं हुई तो इसका सीधा असर नई प्रतिभाओं के विकास और खेलों में निवेश के प्रति विश्वास पर पड़ेगा।
आगे क्या होगा
नोएडा प्राधिकरण ने विस्तृत जाँच का आश्वासन दिया है। आलोचकों का कहना है कि केवल नोटिस जारी करने से काम नहीं चलेगा — FIR दर्ज होनी चाहिए और टेंडर रद्द कर पुनः निविदा प्रक्रिया शुरू की जानी चाहिए। मामले की अगली सुनवाई और प्राधिकरण की अंतिम जाँच रिपोर्ट पर सभी की नज़रें टिकी हैं।