नोएडा मुआवजा घोटाला: SIT ने ₹100 करोड़ से अधिक के मामले में 6 FIR दर्ज कीं, तीन पूर्व लॉ ऑफिसर आरोपी
सारांश
मुख्य बातें
नोएडा के बहुचर्चित मुआवजा घोटाले में विशेष जांच दल (SIT) ने 13 जून 2025 को थाना फेज-1, नोएडा में 6 अलग-अलग FIR दर्ज कराई हैं। ₹100 करोड़ से अधिक के इस कथित घोटाले में नोएडा प्राधिकरण के तीन पूर्व लॉ ऑफिसरों और उनके कथित सहयोगियों को आरोपी बनाया गया है। सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों पर गठित SIT की जांच पूरी होने के बाद अब कानूनी कार्रवाई का दौर शुरू हो गया है।
मामले की पृष्ठभूमि
जांच के अनुसार, वर्ष 2021 में गेझा तिलपताबाद गांव में भूमि अधिग्रहण से जुड़े अतिरिक्त मुआवजे के वितरण में बड़े पैमाने पर अनियमितताओं के आरोप सामने आए थे। शिकायतें मिलने के बाद मामला न्यायालय तक पहुंचा और अंततः सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश पर SIT का गठन किया गया। सुनवाई के दौरान शीर्ष अदालत ने जांच को लेकर गंभीर टिप्पणियां भी की थीं।
SIT ने विस्तृत जांच के दौरान किसानों और लाभार्थियों के बयान दर्ज किए, दस्तावेजों की पड़ताल की और वित्तीय लेनदेन की जांच की।
मुख्य आरोपी और आरोप
जांच में सामने आया कि नोएडा प्राधिकरण के तत्कालीन लॉ ऑफिसर राजेश कुमार, दिनेश कुमार सिंह और वीरेंद्र कुमार नागर ने कथित तौर पर कुछ बिचौलियों के साथ मिलकर मुआवजा वितरण प्रक्रिया में अनियमितताएं कीं। इसके अलावा, समाजवादी पार्टी के नेता विजेंद्र कुमार त्यागी, राजकुमार त्यागी और राजकुमार को भी आरोपी बनाया गया है।
आरोप है कि अदालत के आदेश पर जारी अतिरिक्त मुआवजे की रकम में से एक संगठित सिंडिकेट ने लाभार्थियों से 10 प्रतिशत तक नकद कमीशन वसूला। जांच एजेंसी के दावे के अनुसार, लाभार्थियों के नाम पर फर्जी बैंक खाते खुलवाकर करोड़ों रुपये का गबन भी किया गया।
SIT की जांच प्रक्रिया और विशेष व्यवस्था
इन मामलों की विवेचना सामान्य थाने की पुलिस के बजाय SIT से जुड़े एक राजपत्रित अधिकारी द्वारा की जाएगी, जिससे जांच की निष्पक्षता और प्रभावशीलता सुनिश्चित हो सके। यह व्यवस्था मामले की संवेदनशीलता और सर्वोच्च न्यायालय की निगरानी को देखते हुए की गई है।
गौरतलब है कि यह मामला वर्षों से चर्चा में रहा है और यह पहली बार है जब जांच के बाद ठोस कानूनी कार्रवाई के रूप में FIR दर्ज की गई हैं।
आगे की कार्रवाई
दर्ज FIR के आधार पर अब आरोपियों से पूछताछ, संभावित गिरफ्तारी और आगे की कानूनी प्रक्रिया की तैयारी की जा रही है। यह मामला भूमि अधिग्रहण मुआवजे की प्रक्रिया में पारदर्शिता और जवाबदेही के लिहाज से एक महत्वपूर्ण मिसाल बन सकता है, जिस पर पूरे उत्तर प्रदेश की नज़र है।