10 अगस्त 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

नोएडा मुआवजा घोटाला: SIT ने ₹100 करोड़ से अधिक के मामले में 6 FIR दर्ज कीं, तीन पूर्व लॉ ऑफिसर आरोपी

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
नोएडा मुआवजा घोटाला: SIT ने ₹100 करोड़ से अधिक के मामले में 6 FIR दर्ज कीं, तीन पूर्व लॉ ऑफिसर आरोपी

सारांश

नोएडा मुआवजा घोटाले में SIT की कार्रवाई तेज — ₹100 करोड़ से अधिक के इस मामले में 6 FIR दर्ज, तीन पूर्व लॉ ऑफिसर और SP नेता आरोपी। सर्वोच्च न्यायालय की निगरानी में चल रही जांच में फर्जी बैंक खातों और 10% नकद कमीशन वसूली के गंभीर आरोप।

मुख्य बातें

SIT ने 13 जून 2025 को थाना फेज-1, नोएडा में 6 FIR दर्ज कीं।
नोएडा प्राधिकरण के तीन पूर्व लॉ ऑफिसर — राजेश कुमार , दिनेश कुमार सिंह और वीरेंद्र कुमार नागर — आरोपी बनाए गए।
समाजवादी पार्टी के नेता विजेंद्र कुमार त्यागी , राजकुमार त्यागी और राजकुमार भी आरोपी।
कथित घोटाले की राशि ₹100 करोड़ से अधिक ; लाभार्थियों से 10% तक नकद कमीशन वसूलने और फर्जी बैंक खातों से गबन का आरोप।
मामला सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश पर गठित SIT द्वारा जांचा गया; विवेचना राजपत्रित अधिकारी करेगा।

नोएडा के बहुचर्चित मुआवजा घोटाले में विशेष जांच दल (SIT) ने 13 जून 2025 को थाना फेज-1, नोएडा में 6 अलग-अलग FIR दर्ज कराई हैं। ₹100 करोड़ से अधिक के इस कथित घोटाले में नोएडा प्राधिकरण के तीन पूर्व लॉ ऑफिसरों और उनके कथित सहयोगियों को आरोपी बनाया गया है। सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों पर गठित SIT की जांच पूरी होने के बाद अब कानूनी कार्रवाई का दौर शुरू हो गया है।

मामले की पृष्ठभूमि

जांच के अनुसार, वर्ष 2021 में गेझा तिलपताबाद गांव में भूमि अधिग्रहण से जुड़े अतिरिक्त मुआवजे के वितरण में बड़े पैमाने पर अनियमितताओं के आरोप सामने आए थे। शिकायतें मिलने के बाद मामला न्यायालय तक पहुंचा और अंततः सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश पर SIT का गठन किया गया। सुनवाई के दौरान शीर्ष अदालत ने जांच को लेकर गंभीर टिप्पणियां भी की थीं।

SIT ने विस्तृत जांच के दौरान किसानों और लाभार्थियों के बयान दर्ज किए, दस्तावेजों की पड़ताल की और वित्तीय लेनदेन की जांच की।

मुख्य आरोपी और आरोप

जांच में सामने आया कि नोएडा प्राधिकरण के तत्कालीन लॉ ऑफिसर राजेश कुमार, दिनेश कुमार सिंह और वीरेंद्र कुमार नागर ने कथित तौर पर कुछ बिचौलियों के साथ मिलकर मुआवजा वितरण प्रक्रिया में अनियमितताएं कीं। इसके अलावा, समाजवादी पार्टी के नेता विजेंद्र कुमार त्यागी, राजकुमार त्यागी और राजकुमार को भी आरोपी बनाया गया है।

आरोप है कि अदालत के आदेश पर जारी अतिरिक्त मुआवजे की रकम में से एक संगठित सिंडिकेट ने लाभार्थियों से 10 प्रतिशत तक नकद कमीशन वसूला। जांच एजेंसी के दावे के अनुसार, लाभार्थियों के नाम पर फर्जी बैंक खाते खुलवाकर करोड़ों रुपये का गबन भी किया गया।

SIT की जांच प्रक्रिया और विशेष व्यवस्था

इन मामलों की विवेचना सामान्य थाने की पुलिस के बजाय SIT से जुड़े एक राजपत्रित अधिकारी द्वारा की जाएगी, जिससे जांच की निष्पक्षता और प्रभावशीलता सुनिश्चित हो सके। यह व्यवस्था मामले की संवेदनशीलता और सर्वोच्च न्यायालय की निगरानी को देखते हुए की गई है।

गौरतलब है कि यह मामला वर्षों से चर्चा में रहा है और यह पहली बार है जब जांच के बाद ठोस कानूनी कार्रवाई के रूप में FIR दर्ज की गई हैं।

आगे की कार्रवाई

दर्ज FIR के आधार पर अब आरोपियों से पूछताछ, संभावित गिरफ्तारी और आगे की कानूनी प्रक्रिया की तैयारी की जा रही है। यह मामला भूमि अधिग्रहण मुआवजे की प्रक्रिया में पारदर्शिता और जवाबदेही के लिहाज से एक महत्वपूर्ण मिसाल बन सकता है, जिस पर पूरे उत्तर प्रदेश की नज़र है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली परीक्षा अभी बाकी है — भूमि अधिग्रहण मुआवजे की प्रक्रिया में सिंडिकेट का इतने वर्षों तक बेरोकटोक चलते रहना प्रशासनिक निगरानी की गंभीर विफलता उजागर करता है। सर्वोच्च न्यायालय को हस्तक्षेप करना पड़ा, जो दर्शाता है कि राज्य-स्तरीय तंत्र स्वतः इस मामले को सुलझाने में सक्षम नहीं था। फर्जी बैंक खातों और संगठित कमीशन वसूली के आरोप बताते हैं कि यह छिटपुट भ्रष्टाचार नहीं, बल्कि सुनियोजित नेटवर्क था — जिसकी जड़ें प्रशासन और राजनीति दोनों में थीं।
RashtraPress
10 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

नोएडा मुआवजा घोटाला क्या है?
यह गेझा तिलपताबाद गांव में 2021 में हुए भूमि अधिग्रहण से जुड़े अतिरिक्त मुआवजे के वितरण में कथित अनियमितताओं का मामला है। आरोप है कि नोएडा प्राधिकरण के अधिकारियों और बिचौलियों ने मिलकर लाभार्थियों के नाम पर फर्जी खाते खोले और ₹100 करोड़ से अधिक की राशि का गबन किया।
SIT ने किन लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की है?
SIT ने नोएडा प्राधिकरण के तीन पूर्व लॉ ऑफिसरों — राजेश कुमार , दिनेश कुमार सिंह और वीरेंद्र कुमार नागर — के साथ-साथ समाजवादी पार्टी के नेता विजेंद्र कुमार त्यागी , राजकुमार त्यागी और राजकुमार को आरोपी बनाया है।
इस मामले में सर्वोच्च न्यायालय की क्या भूमिका रही?
मामला न्यायालयों से होते हुए सर्वोच्च न्यायालय तक पहुंचा, जहां सुनवाई के दौरान जांच को लेकर गंभीर टिप्पणियां की गईं। इसके बाद शीर्ष अदालत के निर्देश पर ही SIT का गठन किया गया और विस्तृत जांच के आदेश दिए गए।
घोटाले में किस तरह की अनियमितताएं पाई गईं?
जांच एजेंसी के अनुसार, अदालत के आदेश पर जारी मुआवजे में से लाभार्थियों से 10 प्रतिशत तक नकद कमीशन वसूला गया। इसके अलावा, लाभार्थियों के नाम पर फर्जी बैंक खाते खुलवाकर करोड़ों रुपये का गबन किए जाने का भी आरोप है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 1 सप्ताह पहले
  2. 1 महीना पहले
  3. 1 महीना पहले
  4. 1 महीना पहले
  5. 2 महीने पहले
  6. 3 महीने पहले
  7. 6 महीने पहले
  8. 8 महीने पहले