डॉ. शमिका रवि: डिजिटल युग में वित्तीय साक्षरता एक अनिवार्य कौशल

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डॉ. शमिका रवि: डिजिटल युग में वित्तीय साक्षरता एक अनिवार्य कौशल

सारांश

डॉ. शमिका रवि ने कहा है कि तेजी से बदलती डिजिटल अर्थव्यवस्था में वित्तीय साक्षरता आवश्यक है। इसे हर व्यक्ति तक पहुंचाना जरूरी है।

मुख्य बातें

फाइनेंशियल लिटरेसी डिजिटल युग की एक अनिवार्य आवश्यकता है।
हर व्यक्ति को वित्तीय निर्णय लेने के लिए प्रशिक्षित किया जाना चाहिए।
आरबीआई और सेबी की भूमिका महत्वपूर्ण है, लेकिन यह अकेले पर्याप्त नहीं है।
फाइनेंशियल लिटरेसी को शिक्षा प्रणाली में शामिल किया जाना चाहिए।
भविष्य में वित्तीय बाजार और जटिल होंगे, इसलिए जागरूकता जरूरी है।

नई दिल्ली, 26 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद की सदस्य डॉ. शमिका रवि ने कहा कि तेजी से विकसित हो रही डिजिटल अर्थव्यवस्था और नए वित्तीय उत्पादों के संदर्भ में फाइनेंशियल लिटरेसी (वित्तीय साक्षरता) एक आवश्यक जीवन कौशल बन गई है, जिसे हर व्यक्ति तक पहुंचाना अत्यंत आवश्यक है।

डॉ. शमिका रवि ने राष्ट्र प्रेस से चर्चा में बताया कि डिजिटाइजेशन के कारण अधिकांश लेनदेन अब मोबाइल फोन के माध्यम से सुगमता से हो रहे हैं, लेकिन इसके साथ जुड़े जोखिमों के प्रति लोग पूरी तरह से जागरूक नहीं होते। इसलिए, सही वित्तीय निर्णय लेने के लिए लोगों को प्रशिक्षित करना आवश्यक है।

उन्होंने भारतीय रिज़र्व बैंक (आरबीआई) और भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) की भूमिका पर ज़ोर देते हुए कहा कि ये दोनों संस्थाएं निवेशकों को जागरूक करने और उनकी सुरक्षा के लिए प्रयासरत हैं, लेकिन यह पर्याप्त नहीं है। उन्होंने कहा कि केवल रेगुलेटर्स के भरोसे पूरे समाज को वित्तीय रूप से जागरूक नहीं किया जा सकता।

डॉ. रवि के अनुसार, फाइनेंशियल लिटरेसी को स्कूलों, कॉलेजों और स्किलिंग प्रोग्राम्स का हिस्सा बनाना होगा, ताकि यह हर व्यक्ति के लिए एक बुनियादी जीवन कौशल बन सके।

पश्चिम एशिया की मौजूदा स्थिति पर उन्होंने कहा कि भारत में घबराने जैसी कोई स्थिति नहीं है। देश के पास पर्याप्त ऊर्जा भंडार हैं और छोटी अर्थव्यवस्थाओं के मुकाबले यहां पैनिक देखने को नहीं मिल रहा है।

हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि लंबे समय में भारत को बाहरी बाजारों पर निर्भरता कम करनी होगी। इसके लिए ऊर्जा स्रोतों में विविधता लाने, इंफ्रास्ट्रक्चर बढ़ाने और रिन्यूएबल एनर्जी पर अधिक ध्यान देने की आवश्यकता है। इसे आत्मनिर्भरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया गया।

डॉ. रवि ने कहा कि भारत के पूंजी बाजार तेजी से विकसित हो रहे हैं और अब 10 करोड़ से अधिक लोग इक्विटी मार्केट में भाग ले रहे हैं। यह दर्शाता है कि लोगों की निवेश में रुचि बढ़ रही है।

उन्होंने कहा कि जैसे-जैसे वित्तीय बाजार जटिल और आधुनिक होते जाएंगे, वैसे-वैसे जोखिम भी बढ़ेंगे। इसलिए निवेश के साथ जागरूकता का बढ़ना अत्यंत आवश्यक है।

उन्होंने नेशनल स्टॉक एक्सचेंज ऑफ़ इंडिया (एनएसई) और इंडिया हैबिटेट सेंटर के बीच फाइनेंशियल लिटरेसी को बढ़ावा देने के लिए हुए समझौते की सराहना की और इसे एक महत्वपूर्ण कदम बताया।

डॉ. रवि ने कहा कि बीमा, बचत, पेंशन और क्रेडिट जैसे सभी क्षेत्रों में तेजी से नवाचार हो रहा है, जिससे आने वाले समय में वित्तीय बाजार और भी बड़े और जटिल होंगे। ऐसे में वित्तीय साक्षरता को समानांतर रूप से बढ़ाना अत्यंत आवश्यक है।

संपादकीय दृष्टिकोण

तो लोगों को सही वित्तीय निर्णय लेने के लिए प्रशिक्षित करना आवश्यक है।
RashtraPress
13 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

फाइनेंशियल लिटरेसी क्या है?
फाइनेंशियल लिटरेसी का मतलब है वित्तीय मामलों के बारे में जानकारी और समझ होना, ताकि व्यक्ति सही वित्तीय निर्णय ले सके।
डिजिटल अर्थव्यवस्था में फाइनेंशियल लिटरेसी क्यों जरूरी है?
डिजिटल अर्थव्यवस्था में लेनदेन के नए तरीके आ रहे हैं, जिससे जोखिम बढ़ रहे हैं। सही निर्णय लेने के लिए वित्तीय साक्षरता आवश्यक है।
भारत में फाइनेंशियल लिटरेसी को कैसे बढ़ावा दिया जा सकता है?
स्कूलों, कॉलेजों और स्किलिंग प्रोग्राम्स में इसे शामिल करके फाइनेंशियल लिटरेसी को बढ़ावा दिया जा सकता है।
राष्ट्र प्रेस