पश्चिम बंगाल: प्राइमरी से यूनिवर्सिटी तक सिलेबस में जुड़ेंगी स्वतंत्रता सेनानियों की जीवनियाँ, CM सुवेंदु अधिकारी का ऐलान
सारांश
मुख्य बातें
पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने मंगलवार, 11 अगस्त 2026 को घोषणा की कि राज्य में प्राइमरी स्कूल से लेकर विश्वविद्यालय स्तर तक के पाठ्यक्रम में महान स्वतंत्रता सेनानियों की जीवनियाँ अनिवार्य रूप से शामिल की जाएंगी। यह ऐलान उन्होंने पश्चिम मेदिनीपुर जिले के केशपुर में आयोजित 'खुदीराम बोस आत्मबलिदान दिवस' समारोह में किया।
मुख्य घोषणाएँ
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि अब तक खुदीराम बोस को पाठ्यक्रम में मात्र चार पंक्तियों तक सीमित रखा गया था, जो उनके बलिदान के साथ न्याय नहीं करता। उन्होंने शिक्षा विभाग से अपील की कि खुदीराम बोस का जीवन इतिहास स्कूल से लेकर विश्वविद्यालय स्तर तक पढ़ाया जाए। साथ ही उन्होंने घोषणा की कि प्रत्येक वर्ष 11 अगस्त को 'खुदीराम बोस आत्मबलिदान दिवस' के रूप में मनाया जाएगा।
गौरतलब है कि खुदीराम बोस को ब्रिटिश शासकों ने 1908 में इसी तिथि को फाँसी दी थी, जब वे मात्र 18 वर्ष के थे। राज्य सरकार ने खुदीराम बोस के पैतृक घर के नवीनीकरण की पहल भी शुरू की है, जिसे अब तक उपेक्षित रखा गया था।
पिछली सरकारों पर तीखा हमला
अधिकारी ने पूर्ववर्ती लेफ्ट फ्रंट और तृणमूल कांग्रेस (TMC) सरकारों पर स्वतंत्रता सेनानियों के इतिहास की अनदेखी का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, "पिछली सरकार के दौरान, हुगली जिले के सिंगुर से कार परियोजना को हटाने के लिए तृणमूल कांग्रेस के आंदोलन पर स्कूल के सिलेबस में एक चैप्टर शामिल किया गया था। यहाँ तक कि पिछली लेफ्ट फ्रंट सरकार भी नहीं चाहती थी कि हमारे छात्र भारत में स्वतंत्रता आंदोलन के असली इतिहास के बारे में जानें। लेकिन, नई सरकार चाहती है कि वे हमारे महान स्वतंत्रता सेनानियों के बलिदानों के बारे में जानें।"
पाठ्यक्रम सुधार का रोडमैप
मुख्यमंत्री ने बताया कि सिलेबस कमेटी ने राज्य की वर्तमान और आने वाली पीढ़ियों के समग्र विकास के लिए एक दीर्घकालिक रोडमैप तैयार करना शुरू कर दिया है। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि यह मिशन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देशभक्ति के मूल्यों के प्रसार की व्यापक दिशा के अनुरूप है।
शैक्षणिक बदलाव की समयसीमा
राज्य के स्कूल शिक्षा मंत्री ने 4 अगस्त को स्पष्ट किया था कि 2027 शैक्षणिक सत्र में मौजूदा पाठ्यपुस्तकों की समीक्षा की जाएगी और उन्हें यथावत रखा जाएगा। हालाँकि, 2028 शैक्षणिक सत्र में राज्य की शिक्षा प्रणाली और पाठ्यक्रम में बड़े बदलाव लाने की सरकार की स्पष्ट योजना है।
यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में राष्ट्रीय पाठ्यक्रम ढाँचे को लेकर बहस तेज़ है और कई राज्य अपने स्थानीय इतिहास को पाठ्यक्रम में उचित स्थान देने की माँग कर रहे हैं। पश्चिम बंगाल में यह पहल राज्य की नई सरकार के शैक्षिक एजेंडे की दिशा को स्पष्ट करती है।