11 अगस्त 2026
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पश्चिम बंगाल: प्राइमरी से यूनिवर्सिटी तक सिलेबस में जुड़ेंगी स्वतंत्रता सेनानियों की जीवनियाँ, CM सुवेंदु अधिकारी का ऐलान

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पश्चिम बंगाल: प्राइमरी से यूनिवर्सिटी तक सिलेबस में जुड़ेंगी स्वतंत्रता सेनानियों की जीवनियाँ, CM सुवेंदु अधिकारी का ऐलान

सारांश

पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने केशपुर में खुदीराम बोस आत्मबलिदान दिवस पर ऐलान किया कि प्राइमरी से यूनिवर्सिटी तक सिलेबस में स्वतंत्रता सेनानियों की जीवनियाँ जोड़ी जाएंगी। पूर्ववर्ती लेफ्ट और TMC सरकारों पर इतिहास की अनदेखी का आरोप लगाते हुए उन्होंने 2028 से बड़े पाठ्यक्रम बदलाव की घोषणा की।

मुख्य बातें

CM सुवेंदु अधिकारी ने 11 अगस्त 2026 को प्राइमरी से विश्वविद्यालय स्तर तक सिलेबस में स्वतंत्रता सेनानियों की जीवनियाँ शामिल करने का ऐलान किया।
खुदीराम बोस को अब तक पाठ्यक्रम में मात्र चार पंक्तियों तक सीमित रखा गया था; नई सरकार इसे बदलेगी।
हर वर्ष 11 अगस्त को 'खुदीराम बोस आत्मबलिदान दिवस' मनाया जाएगा; 1908 में इसी तिथि को 18 वर्ष की आयु में उन्हें फाँसी दी गई थी।
2027 शैक्षणिक सत्र में मौजूदा पाठ्यपुस्तकों की समीक्षा होगी; 2028 में बड़े बदलाव लागू होंगे।
पूर्ववर्ती लेफ्ट फ्रंट और TMC सरकारों पर स्वतंत्रता आंदोलन के इतिहास की अनदेखी का आरोप।
खुदीराम बोस के पैतृक घर के नवीनीकरण की पहल भी शुरू।

पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने मंगलवार, 11 अगस्त 2026 को घोषणा की कि राज्य में प्राइमरी स्कूल से लेकर विश्वविद्यालय स्तर तक के पाठ्यक्रम में महान स्वतंत्रता सेनानियों की जीवनियाँ अनिवार्य रूप से शामिल की जाएंगी। यह ऐलान उन्होंने पश्चिम मेदिनीपुर जिले के केशपुर में आयोजित 'खुदीराम बोस आत्मबलिदान दिवस' समारोह में किया।

मुख्य घोषणाएँ

मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि अब तक खुदीराम बोस को पाठ्यक्रम में मात्र चार पंक्तियों तक सीमित रखा गया था, जो उनके बलिदान के साथ न्याय नहीं करता। उन्होंने शिक्षा विभाग से अपील की कि खुदीराम बोस का जीवन इतिहास स्कूल से लेकर विश्वविद्यालय स्तर तक पढ़ाया जाए। साथ ही उन्होंने घोषणा की कि प्रत्येक वर्ष 11 अगस्त को 'खुदीराम बोस आत्मबलिदान दिवस' के रूप में मनाया जाएगा।

गौरतलब है कि खुदीराम बोस को ब्रिटिश शासकों ने 1908 में इसी तिथि को फाँसी दी थी, जब वे मात्र 18 वर्ष के थे। राज्य सरकार ने खुदीराम बोस के पैतृक घर के नवीनीकरण की पहल भी शुरू की है, जिसे अब तक उपेक्षित रखा गया था।

पिछली सरकारों पर तीखा हमला

अधिकारी ने पूर्ववर्ती लेफ्ट फ्रंट और तृणमूल कांग्रेस (TMC) सरकारों पर स्वतंत्रता सेनानियों के इतिहास की अनदेखी का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, "पिछली सरकार के दौरान, हुगली जिले के सिंगुर से कार परियोजना को हटाने के लिए तृणमूल कांग्रेस के आंदोलन पर स्कूल के सिलेबस में एक चैप्टर शामिल किया गया था। यहाँ तक कि पिछली लेफ्ट फ्रंट सरकार भी नहीं चाहती थी कि हमारे छात्र भारत में स्वतंत्रता आंदोलन के असली इतिहास के बारे में जानें। लेकिन, नई सरकार चाहती है कि वे हमारे महान स्वतंत्रता सेनानियों के बलिदानों के बारे में जानें।"

पाठ्यक्रम सुधार का रोडमैप

मुख्यमंत्री ने बताया कि सिलेबस कमेटी ने राज्य की वर्तमान और आने वाली पीढ़ियों के समग्र विकास के लिए एक दीर्घकालिक रोडमैप तैयार करना शुरू कर दिया है। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि यह मिशन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देशभक्ति के मूल्यों के प्रसार की व्यापक दिशा के अनुरूप है।

शैक्षणिक बदलाव की समयसीमा

राज्य के स्कूल शिक्षा मंत्री ने 4 अगस्त को स्पष्ट किया था कि 2027 शैक्षणिक सत्र में मौजूदा पाठ्यपुस्तकों की समीक्षा की जाएगी और उन्हें यथावत रखा जाएगा। हालाँकि, 2028 शैक्षणिक सत्र में राज्य की शिक्षा प्रणाली और पाठ्यक्रम में बड़े बदलाव लाने की सरकार की स्पष्ट योजना है।

यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में राष्ट्रीय पाठ्यक्रम ढाँचे को लेकर बहस तेज़ है और कई राज्य अपने स्थानीय इतिहास को पाठ्यक्रम में उचित स्थान देने की माँग कर रहे हैं। पश्चिम बंगाल में यह पहल राज्य की नई सरकार के शैक्षिक एजेंडे की दिशा को स्पष्ट करती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो क्रियान्वयन की गंभीरता पर सवाल खड़ा करता है। देशभक्ति-केंद्रित पाठ्यक्रम सुधार की यह प्रवृत्ति कई राज्यों में देखी जा रही है, पर इतिहास की विविध व्याख्याओं को संतुलित करना एक जटिल शैक्षणिक चुनौती बनी रहेगी।
RashtraPress
11 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पश्चिम बंगाल के सिलेबस में स्वतंत्रता सेनानियों की जीवनियाँ कब से शामिल होंगी?
राज्य सरकार की योजना के अनुसार 2027 शैक्षणिक सत्र में मौजूदा पाठ्यपुस्तकों की समीक्षा होगी और 2028 शैक्षणिक सत्र से बड़े बदलाव लागू किए जाएंगे। CM सुवेंदु अधिकारी ने शिक्षा विभाग से इस दिशा में काम शुरू करने की अपील की है।
खुदीराम बोस आत्मबलिदान दिवस क्यों मनाया जाता है?
खुदीराम बोस को ब्रिटिश शासकों ने 11 अगस्त 1908 को फाँसी दी थी, जब वे मात्र 18 वर्ष के थे। उनके बलिदान की स्मृति में पश्चिम बंगाल सरकार ने हर वर्ष इस तिथि को 'खुदीराम बोस आत्मबलिदान दिवस' के रूप में मनाने की घोषणा की है।
CM अधिकारी ने पिछली सरकारों पर क्या आरोप लगाए?
मुख्यमंत्री ने कहा कि पूर्ववर्ती लेफ्ट फ्रंट सरकार नहीं चाहती थी कि छात्र स्वतंत्रता आंदोलन का असली इतिहास जानें। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि TMC सरकार ने सिंगुर आंदोलन जैसे राजनीतिक घटनाक्रमों को सिलेबस में जगह दी, जबकि स्वतंत्रता सेनानियों की उपेक्षा की गई।
खुदीराम बोस के पैतृक घर को लेकर सरकार की क्या योजना है?
राज्य सरकार खुदीराम बोस के पैतृक घर के नवीनीकरण की पहल कर रही है, जिसे अब तक उपेक्षित रखा गया था। CM अधिकारी ने इसे स्वतंत्रता सेनानियों की विरासत को सम्मान देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया।
पाठ्यक्रम सुधार के लिए सिलेबस कमेटी क्या कर रही है?
सिलेबस कमेटी ने राज्य की वर्तमान और आने वाली पीढ़ियों के विकास को ध्यान में रखते हुए एक दीर्घकालिक रोडमैप तैयार करना शुरू कर दिया है। हालाँकि, इस रोडमैप का विस्तृत विवरण अभी सार्वजनिक नहीं किया गया है।
राष्ट्र प्रेस
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