18 सितंबर 2026
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गढ़चिरौली: भामरागढ़ के आदिवासी स्कूलों में बिजली-पानी का अभाव, अभिजीत दीपके ने सरकार को चेताया

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गढ़चिरौली: भामरागढ़ के आदिवासी स्कूलों में बिजली-पानी का अभाव, अभिजीत दीपके ने सरकार को चेताया

सारांश

गढ़चिरौली के भामरागढ़ में आदिवासी स्कूलों की दुर्दशा फिर उजागर — बिजली नहीं, टूटे शौचालय, ₹50 रोज़ पर खाना बनाने वाले कर्मचारी। यह दौरा ऐसे वक्त में हुआ जब महाराष्ट्र के आश्रम स्कूलों में दो साल में 584 विद्यार्थियों की मौत पर राज्य सरकार पहले से घिरी है।

मुख्य बातें

अभिजीत दीपके ने 18 सितंबर 2026 को गढ़चिरौली के भामरागढ़ में आदिवासी स्कूलों का निरीक्षण किया।
ताड़गांव जिला परिषद स्कूल में बिजली, पंखे, कार्यशील वाटर प्यूरीफायर और शौचालय के दरवाज़े नहीं हैं।
मध्याह्न भोजन बनाने वाले कर्मचारियों को मात्र ₹50 प्रतिदिन का भुगतान होता है।
महाराष्ट्र के आश्रम स्कूलों में दो वर्षों में 584 विद्यार्थियों की मौत के बाद राज्य सरकार ने विशेषज्ञ समिति गठित करने की घोषणा की है।
सीजेपी ने चेतावनी दी कि कार्रवाई न होने पर बड़े स्तर का आंदोलन शुरू किया जाएगा।

गढ़चिरौली जिले की भामरागढ़ तहसील के आदिवासी स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं की गंभीर कमी उजागर हुई है, जब कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के संस्थापक और राष्ट्रीय संयोजक अभिजीत दीपके ने 18 सितंबर 2026 को इन स्कूलों का स्थलीय निरीक्षण किया। पार्टी के देशव्यापी 'आदिवासी स्कूल ठीक करो' अभियान के दूसरे दिन दीपके ने ताड़गांव स्थित जिला परिषद केंद्र स्कूल और भामरागढ़ के एक आदिवासी आश्रम स्कूल का जायज़ा लिया और वहाँ मिली खामियों को सीधे सरकार के सामने रखने की चेतावनी दी।

मुख्य घटनाक्रम

सीजेपी के अनुसार, ताड़गांव जिला परिषद स्कूल में कक्षा एक से सात तक कुल 20 विद्यार्थी नामांकित हैं और तीन शिक्षक तैनात हैं। दीपके ने दावा किया कि इस स्कूल में बिजली और पंखे की कोई व्यवस्था नहीं है, वाटर प्यूरीफायर खराब पड़ा है और शौचालयों में दरवाज़े तक नहीं हैं।

स्थानीय निवासियों ने दीपके को बताया कि स्कूल की कुछ जर्जर संरचनाएँ सुरक्षा के लिहाज़ से खतरनाक हैं — इनमें वह स्थान भी शामिल है जहाँ मध्याह्न भोजन तैयार किया जाता है। पार्टी की प्रेस विज्ञप्ति के मुताबिक, खाना बनाने वाले कर्मचारियों को महज ₹50 प्रतिदिन मिलते हैं। ग्रामीणों ने खाना पकाने के लिए एलपीजी सिलेंडर उपलब्ध कराने की भी माँग की।

गंभीर आरोप और अनुत्तरित सवाल

ग्रामीणों ने एक शिक्षक पर नियमित रूप से नशे की हालत में स्कूल आने का आरोप लगाया। हालाँकि, सीजेपी की प्रेस विज्ञप्ति में इस संदर्भ में संबंधित शिक्षक अथवा शिक्षा विभाग की कोई प्रतिक्रिया शामिल नहीं है, इसलिए यह आरोप अभी तक असत्यापित है।

इसी अभियान के पहले दिन — 17 सितंबर को — दीपके ने एटापल्ली क्षेत्र का दौरा करते हुए डुम्मे जिला परिषद स्कूल का निरीक्षण किया था। सीजेपी के अनुसार, वहाँ विद्यार्थियों को स्कूल पहुँचने के लिए घने जंगल के रास्ते से गुज़रना पड़ता है — जो बच्चों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

व्यापक संदर्भ: 584 विद्यार्थियों की मौत

यह दौरा ऐसे समय में हुआ है जब महाराष्ट्र के आदिवासी विकास मंत्री अशोक उईके ने राज्य के सरकारी और सहायता प्राप्त आश्रम स्कूलों में पिछले दो वर्षों के दौरान 584 विद्यार्थियों की मौत के मद्देनज़र जवाबदेही तय करने हेतु एक विशेषज्ञ समिति गठित करने की घोषणा की है। गौरतलब है कि यह आँकड़ा आदिवासी छात्रावासों और आश्रम विद्यालयों की बदतर स्थिति पर एक दशक से चली आ रही चिंताओं को फिर से सामने लाता है।

भामरागढ़ दौरे के दौरान सीजेपी ने एक वीडियो भी जारी किया। कार्यक्रम में दीया जलाकर और 'हैप्पी बर्थडे' गाकर स्कूल की दुर्दशा को प्रतीकात्मक रूप से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन के 'उपहार' के तौर पर पेश किया गया — सरकार पर कटाक्ष करते हुए।

सरकार पर दबाव और आगे की रणनीति

दीपके ने स्पष्ट किया कि निरीक्षण में सामने आई खामियों की विस्तृत रिपोर्ट राज्य सरकार के अधिकारियों को सौंपी जाएगी। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि प्रशासन ने समयबद्ध कार्रवाई नहीं की, तो सीजेपी इस मुद्दे पर बड़े स्तर का आंदोलन शुरू करेगी।

सीजेपी के अनुसार, 'आदिवासी स्कूल ठीक करो' अभियान के तहत आदिवासी क्षेत्रों के स्कूलों का निरीक्षण आगे भी जारी रहेगा। यह अभियान महाराष्ट्र से परे देश के अन्य राज्यों तक भी फैलाने की योजना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि महाराष्ट्र के आदिवासी शिक्षा तंत्र की एक पुरानी और व्यवस्थागत विफलता का नमूना है — जिसे दो वर्षों में 584 विद्यार्थियों की मौत के आँकड़ों ने और भी बेनकाब किया है। सवाल यह है कि राज्य सरकार की विशेषज्ञ समिति केवल जवाबदेही तय करने तक सीमित रहेगी या बुनियादी ढाँचे में ठोस सुधार तक पहुँचेगी। 'आदिवासी स्कूल ठीक करो' जैसे राजनीतिक अभियान जमीनी सच्चाई सामने लाने में उपयोगी हैं, लेकिन मुख्यधारा की कवरेज अक्सर यह चूक जाती है कि इन स्कूलों के बजट आवंटन और व्यय में वर्षों से कितना अंतर रहा है — वही असली जवाबदेही की कसौटी है।
RashtraPress
18 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

गढ़चिरौली के आदिवासी स्कूलों में क्या समस्याएँ पाई गईं?
सीजेपी के निरीक्षण के अनुसार, भामरागढ़ के ताड़गांव जिला परिषद स्कूल में बिजली, पंखे, कार्यशील वाटर प्यूरीफायर और शौचालय के दरवाज़े नहीं हैं। मध्याह्न भोजन बनाने की जगह जर्जर हालत में है और कर्मचारियों को मात्र ₹50 प्रतिदिन मिलते हैं।
'आदिवासी स्कूल ठीक करो' अभियान क्या है?
यह कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) का देशव्यापी अभियान है, जिसके तहत आदिवासी क्षेत्रों के सरकारी स्कूलों का स्थलीय निरीक्षण कर वहाँ की समस्याओं की रिपोर्ट राज्य सरकार के अधिकारियों को सौंपी जाती है। इसका उद्देश्य सरकार पर बुनियादी सुविधाएँ सुनिश्चित कराने का दबाव बनाना है।
महाराष्ट्र के आश्रम स्कूलों में विद्यार्थियों की मौत का मामला क्या है?
महाराष्ट्र के आदिवासी विकास मंत्री अशोक उईके ने घोषणा की है कि राज्य के सरकारी और सहायता प्राप्त आश्रम स्कूलों में पिछले दो वर्षों में 584 विद्यार्थियों की मौत हुई है। जवाबदेही तय करने के लिए एक विशेषज्ञ समिति गठित की जा रही है।
अभिजीत दीपके ने सरकार को क्या चेतावनी दी?
दीपके ने कहा कि निरीक्षण में सामने आई समस्याओं की रिपोर्ट राज्य सरकार को सौंपी जाएगी। यदि प्रशासन ने समयबद्ध कार्रवाई नहीं की, तो सीजेपी इस मुद्दे पर बड़े स्तर का आंदोलन शुरू करेगी।
डुम्मे और भामरागढ़ के स्कूलों में क्या अंतर पाया गया?
17 सितंबर को निरीक्षण किए गए एटापल्ली के डुम्मे जिला परिषद स्कूल में विद्यार्थियों को स्कूल पहुँचने के लिए घने जंगल से गुज़रना पड़ता है, जो सुरक्षा की दृष्टि से चिंताजनक है। भामरागढ़ के ताड़गांव स्कूल में बिजली, शौचालय और स्वच्छ पानी जैसी बुनियादी सुविधाओं का अभाव पाया गया।
राष्ट्र प्रेस
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