नीट पेपर लीक: आदित्य ठाकरे ने जेन-Z आंदोलन का समर्थन किया, महाराष्ट्र में गिरफ्तार छात्रों को मुफ्त कानूनी सहायता का वादा
सारांश
मुख्य बातें
शिवसेना (UBT) नेता आदित्य ठाकरे ने मंगलवार, 28 जुलाई को नई दिल्ली के जंतर मंतर पर हुए जेन-Z विरोध प्रदर्शन का खुलकर समर्थन किया और घोषणा की कि महाराष्ट्र में जिन प्रदर्शनकारी छात्रों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई या जिन्हें हिरासत में लिया गया, उन्हें निःशुल्क कानूनी सहायता प्रदान की जाएगी। यह आंदोलन मूलतः केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे और नीट पेपर लीक मामले में कड़ी कार्रवाई की माँग को लेकर शुरू हुआ था।
आंदोलन का विस्तार और मुद्दे
ठाकरे ने पत्रकारों से बातचीत में बताया कि यह प्रदर्शन शुरुआत में नीट पेपर लीक और शिक्षा मंत्री के इस्तीफे तक सीमित था, लेकिन धीरे-धीरे इसका दायरा बढ़ता गया। उनके अनुसार, राम मंदिर चढ़ावा चोरी, इथेनॉल नीति और सरकार की कार्यशैली जैसे विषय भी इस आंदोलन का हिस्सा बन गए। उन्होंने कहा कि छात्रों के आक्रोश की जद में केवल एक मंत्री नहीं, बल्कि सरकार के कई स्तंभ आ गए।
लाठीचार्ज और सुरक्षाबलों के कथित दुर्व्यवहार पर आरोप
ठाकरे ने आरोप लगाया कि दिल्ली सहित देश के अन्य हिस्सों में प्रदर्शनकारी छात्रों पर सरकार की ओर से लाठीचार्ज किया गया। उनके अनुसार, कथित तौर पर लाठियों पर जंग लगे कीले भी लगे हुए थे। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि छात्रों की आवाज दबाने के लिए एके-47 जैसे हथियारों का प्रदर्शन किया गया। ठाकरे ने कहा कि वे स्वयं इस दृश्य के प्रत्यक्षदर्शी रहे और भारतीय व अंतरराष्ट्रीय मीडिया में भी यह मामला व्यापक रूप से उठाया गया। राष्ट्र प्रेस इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं कर सका है।
कानूनी सहायता की घोषणा
ठाकरे ने स्पष्ट किया कि महाराष्ट्र में विरोध प्रदर्शन के दौरान जिन छात्रों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई या जिन्हें हिरासत में लिया गया, वे उन्हें ईमेल करें। उन्होंने कहा, 'हम उन्हें मुफ्त कानूनी सहायता प्रदान करेंगे और यह सुनिश्चित करेंगे कि उन्हें किसी भी प्रकार की दिक्कत न हो।' उनके अनुसार यह सहायता इसलिए दी जाएगी क्योंकि यह आंदोलन पूरी तरह छात्र हित में था।
जेन-Z की मूल माँग क्या थी
ठाकरे के अनुसार, जेन-Z पीढ़ी की मूल माँग सीधी और स्पष्ट थी — नीट पेपर लीक में शामिल सभी दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई और केंद्रीय शिक्षा मंत्री का तत्काल इस्तीफा। उन्होंने कहा कि यह पीढ़ी अपनी भूमिका और अपने इरादे स्पष्ट करना चाहती थी।
आगे क्या
यह देखना होगा कि महाराष्ट्र में गिरफ्तार छात्र इस कानूनी सहायता का लाभ उठाते हैं या नहीं, और क्या केंद्र सरकार नीट लीक मामले में किसी ठोस कार्रवाई की घोषणा करती है। नीट विवाद पहले से ही सर्वोच्च न्यायालय में विचाराधीन है।