'सबका मालिक एक है': जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने ऑपरेशन सिंदूर से लेकर पारिवारिक मूल्यों तक नैतिकता के महत्व पर प्रकाश डाला

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'सबका मालिक एक है': जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने ऑपरेशन सिंदूर से लेकर पारिवारिक मूल्यों तक नैतिकता के महत्व पर प्रकाश डाला

सारांश

जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने अपने अनुभवों से दर्शाया कि कैसे नैतिकता और मानवीय संवेदनाएं सैन्य निर्णयों में महत्वपूर्ण होती हैं। उनकी सोच एक संतुलित और आधुनिक नेतृत्व को दर्शाती है, जिसमें पारिवारिक मूल्यों की अहमियत भी है।

Key Takeaways

  • नैतिकता का सैन्य निर्णयों में महत्वपूर्ण स्थान है।
  • ऑपरेशन सिंदूर में समय का चयन मानवता को ध्यान में रखकर किया गया।
  • जनरल द्विवेदी के नेतृत्व में पारिवारिक मूल्य महत्वपूर्ण हैं।
  • उनकी बेटियाँ उनके जीवन और विचारों में प्रेरक हैं।
  • भारतीय सेना में लिंग-तटस्थ नियमों का महत्व है।

नई दिल्ली, 10 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। भारतीय सेना के प्रमुख उपेंद्र द्विवेदी ने हाल ही में एक पॉडकास्ट में अपने अनुभवों और विचारों को साझा किया। इस अवसर पर उन्होंने सैन्य निर्णयों में नैतिकता, ऑपरेशन सिंदूर, आस्था और व्यक्तिगत जीवन के प्रभाव जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर खुलकर चर्चा की।

आईआईएमयूएन के पॉडकास्ट के एक एपिसोड में, जनरल द्विवेदी ने उन प्रभावों के बारे में बताया, जिन्होंने पिछले कुछ वर्षों में उनके नेतृत्व को आकार दिया है। इस पॉडकास्ट को ऋषभ शाह द्वारा होस्ट किया गया है, जो सार्वजनिक हस्तियों के जीवन के प्रारंभिक अनुभवों को उजागर करने के लिए जाना जाता है।

जनरल द्विवेदी ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान लिए गए निर्णयों पर चर्चा करते हुए बताया कि सेना केवल रणनीति के आधार पर ही नहीं, बल्कि मानवीय और नैतिक मूल्यों को ध्यान में रखकर भी कार्य करती है। उन्होंने एक महत्वपूर्ण उदाहरण साझा करते हुए कहा कि ऑपरेशन के दौरान लक्ष्य को नष्ट करने के लिए समय पूरी तरह उनके नियंत्रण में था, लेकिन उन्होंने एक विशेष समय पर हमला नहीं करने का फैसला किया।

जब उनसे पूछा गया कि क्या ऑपरेशन सिंदूर के दौरान उन्होंने भगवान कृष्ण द्वारा अर्जुन को दिए गए उपदेशों पर विचार किया था, तो जनरल द्विवेदी ने बताया, "जब हमें इन लक्ष्यों को नष्ट करना था, तो समय दो बजे, चार बजे यानी कभी भी हो सकता था। लेकिन हमने यह सुनिश्चित किया कि जब आतंकवादी शिविर में दूसरी तरफ के लोग अपनी नमाज अदा कर रहे हों, तो हम उस समय कोई कार्रवाई न करें; क्योंकि सबका मालिक एक है। इसीलिए हमने ऐसा समय चुना, जब हमें पता था कि वे नमाज नहीं पढ़ रहे होंगे।"

यह बयान दर्शाता है कि युद्ध जैसी परिस्थितियों में भी भारतीय सेना आस्था और मानवीय संवेदनाओं का सम्मान करती है। यह नेतृत्व का वह पक्ष है, जिसमें शक्ति और संयम दोनों साथ चलते हैं।

पॉडकास्ट में जनरल द्विवेदी ने अपने व्यक्तिगत जीवन के उन पहलुओं पर भी प्रकाश डाला, जिन्होंने उनके नेतृत्व को आकार दिया। उन्होंने विशेष रूप से अपनी बेटियों का उल्लेख किया।

इस सवाल का जवाब देते हुए कि उनकी बेटियां उनके जीवन में ऐसा क्या लाती हैं जो उनकी पत्नी से अलग है, जनरल द्विवेदी ने कहा, “मेरी बेटियों ने मुझे सिखाया कि आपको किसी से बातचीत करने के लिए अपने स्तर से नीचे आना पड़ता है। आप हमेशा छह फीट ऊंचे नहीं रह सकते।” उनकी यह बात एक ऐसे नेतृत्व दृष्टिकोण को दर्शाती है जिसमें पद और अधिकार से ज्यादा मानवीय जुड़ाव को महत्व दिया जाता है।

जनरल द्विवेदी ने बताया कि उनकी बेटियां उन्हें भारतीय सेना में सामाजिक और कार्यस्थल से जुड़े बदलावों के लिए प्रेरित करती हैं।

इन सीखों को भारतीय सेना के भीतर हो रहे व्यापक बदलावों से जोड़ते हुए, उन्होंने आगे कहा, "सामाजिक स्थिति को कैसे बदला जाए? भारतीय सेना के भीतर काम करने के इन तौर-तरीकों को कैसे बदला जाए? वे हमेशा इस मामले में मेरा मार्गदर्शन करती हैं और वे मुझे जो कुछ भी बताती हैं, मैं उसे हमेशा लागू करता हूं, क्योंकि मेरे द्वारा तय किए गए सभी नियम लिंग-तटस्थ होने चाहिए। इसलिए वे मेरी मार्गदर्शक हैं; वे हमेशा मुझे बताती हैं कि इन चीज़ों को किस तरह से आगे बढ़ाया जाए।"

जनरल उपेंद्र द्विवेदी के इस इंटरव्यू ने यह स्पष्ट किया कि एक सफल सैन्य नेता केवल रणनीतिक कौशल से नहीं, बल्कि नैतिकता, संवेदनशीलता और व्यक्तिगत अनुभवों से भी बनता है। चाहे वह ऑपरेशन सिंदूर के दौरान लिया गया संयमित निर्णय हो या फिर अपनी बेटियों से मिली सीख- उनकी सोच एक संतुलित और आधुनिक नेतृत्व का उदाहरण प्रस्तुत करती है।

Point of View

बल्कि इसमें नैतिकता और मानवीय संवेदनाएं भी शामिल हैं। उनकी सोच में पारिवारिक मूल्यों का भी महत्वपूर्ण स्थान है, जो उनके निर्णयों को और मजबूत बनाता है।
NationPress
10/04/2026

Frequently Asked Questions

ऑपरेशन सिंदूर क्या था?
ऑपरेशन सिंदूर एक महत्वपूर्ण सैन्य अभियान था, जिसमें भारतीय सेना ने आतंकवादियों के खिलाफ कार्रवाई की।
जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने नैतिकता पर क्या कहा?
जनरल द्विवेदी ने बताया कि सेना के निर्णयों में नैतिकता और मानवता का महत्वपूर्ण स्थान है।
क्या जनरल द्विवेदी का व्यक्तिगत जीवन उनके नेतृत्व को प्रभावित करता है?
हाँ, जनरल द्विवेदी ने अपने व्यक्तिगत अनुभवों, विशेष रूप से अपनी बेटियों से मिली सीख को अपने नेतृत्व में शामिल किया है।
क्या 'सबका मालिक एक है' का मतलब है?
'सबका मालिक एक है' का अर्थ है कि सभी जीवों का एक ही परमेश्वर है, और यह नैतिकता के प्रति सम्मान का प्रतीक है।
इस पॉडकास्ट का उद्देश्य क्या है?
इस पॉडकास्ट का उद्देश्य सार्वजनिक हस्तियों के अनुभवों को साझा करना और उनके जीवन को समझना है।
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