16 जुलाई 2026
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राज्यपाल कंभमपति का ओडिशा विश्वविद्यालयों को आह्वान: वैश्विक प्रतिस्पर्धा और नवाचार को बनाएं प्राथमिकता

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राज्यपाल कंभमपति का ओडिशा विश्वविद्यालयों को आह्वान: वैश्विक प्रतिस्पर्धा और नवाचार को बनाएं प्राथमिकता

सारांश

भुवनेश्वर के लोक भवन में राज्यपाल कंभमपति ने ओडिशा के कुलपतियों को स्पष्ट संदेश दिया — विश्वविद्यालय वैश्विक प्रतिस्पर्धा, नवाचार और NEP 2020 को आत्मसात करें, आदिवासी ज्ञान परंपराओं पर शोध करें, और आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में सक्रिय भागीदार बनें।

मुख्य बातें

राज्यपाल हरि बाबू कंभमपति ने 31 मई 2026 को भुवनेश्वर के लोक भवन में ओडिशा के सार्वजनिक और निजी विश्वविद्यालयों के कुलपतियों को संबोधित किया।
विश्वविद्यालयों से वैश्विक प्रतिस्पर्धा, तकनीकी उन्नति और आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया गया।
NEP 2020 के तहत बहुविषयक शिक्षा, कौशल एकीकरण और उद्योग साझेदारी को प्राथमिकता देने पर जोर दिया गया।
PVTG दस्तावेजीकरण प्रकाशन विश्वविद्यालयों को उपलब्ध कराए जाएंगे — आदिवासी ज्ञान पर शोध को बढ़ावा देने के लिए।
मुख्यमंत्री मोहन चरण मांझी ने शिक्षा क्षेत्र के लिए बढ़े हुए बजट आवंटन और नई पहलों की रूपरेखा प्रस्तुत की।

ओडिशा के राज्यपाल हरि बाबू कंभमपति ने रविवार, 31 मई 2026 को राज्य के सार्वजनिक और निजी विश्वविद्यालयों के कुलपतियों को संबोधित करते हुए स्पष्ट संदेश दिया कि उच्च शिक्षा संस्थानों को भारतीय मूल्यों की जड़ों से जुड़े रहते हुए वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी, तकनीकी रूप से सक्षम और सामाजिक रूप से जिम्मेदार बनना होगा। भुवनेश्वर के लोक भवन में आयोजित इस कुलपति सम्मेलन को उन्होंने ओडिशा में उच्च शिक्षा के भविष्य को आकार देने का एक ऐतिहासिक सामूहिक प्रयास बताया।

सम्मेलन का संदर्भ और उद्देश्य

राज्यपाल कंभमपति ने कुलपतियों का स्वागत करते हुए कहा कि विश्वविद्यालय केवल डिग्री वितरण के केंद्र नहीं, बल्कि ज्ञान, नवाचार और नेतृत्व की पाठशालाएँ हैं जिनकी राष्ट्र-निर्माण में अपरिहार्य भूमिका है। उन्होंने रेखांकित किया कि तेज़ी से हो रहे तकनीकी विकास, उभरते विषयों और बदलती वैश्विक चुनौतियों के बीच उच्च शिक्षा संस्थानों की ज़िम्मेदारी और भी बढ़ गई है।

उनके अनुसार, आत्मनिर्भर भारत की परिकल्पना केवल आर्थिक स्वावलंबन तक सीमित नहीं है — यह नवाचार, प्रौद्योगिकी, विनिर्माण, स्वास्थ्य सेवा, ऊर्जा और शिक्षा को एक साथ समाहित करती है। विश्वविद्यालयों को उद्यमिता की संस्कृति विकसित करनी होगी ताकि युवा पीढ़ी समाज के विकास में उत्प्रेरक की भूमिका निभा सके।

राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 पर ज़ोर

राज्यपाल ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 की परिवर्तनकारी क्षमता को विस्तार से रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि यह नीति बहुविषयक शिक्षा, शैक्षणिक लचीलापन, कौशल एकीकरण, डिजिटल शिक्षा, उत्कृष्ट अनुसंधान और मज़बूत उद्योग-शिक्षा साझेदारी को एक साथ प्रोत्साहित करती है।

उन्होंने NEP के क्रियान्वयन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान और ओडिशा सरकार के प्रयासों की सराहना की। गौरतलब है कि NEP 2020 के तहत देशभर के विश्वविद्यालयों में पाठ्यक्रम सुधार की प्रक्रिया अभी भी विभिन्न चरणों में है, और ओडिशा जैसे राज्यों में इसके क्रियान्वयन की गति एक महत्वपूर्ण पहलू बनी हुई है।

आदिवासी विरासत और स्वदेशी ज्ञान का संरक्षण

ओडिशा की समृद्ध आदिवासी विरासत का उल्लेख करते हुए राज्यपाल कंभमपति ने विश्वविद्यालयों से स्वदेशी ज्ञान प्रणालियों, आदिवासी परंपराओं और सांस्कृतिक संरक्षण पर सार्थक शोध करने का आग्रह किया। उन्होंने सूचित किया कि लोक भवन के जनजातीय प्रकोष्ठ द्वारा तैयार किए गए विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूहों (PVTG) के दस्तावेजीकरण संबंधी प्रकाशन सभी विश्वविद्यालयों को उपलब्ध कराए जाएंगे, ताकि शैक्षणिक अध्ययन और अनुसंधान पहलों को बल मिल सके।

यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में आदिवासी भाषाओं और ज्ञान परंपराओं के संरक्षण को लेकर शैक्षणिक जगत में नई जागरूकता उभर रही है।

मुख्यमंत्री मांझी का दृष्टिकोण और बजट प्रतिबद्धता

मुख्यमंत्री मोहन चरण मांझी ने भी सम्मेलन में अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय महज़ डिग्री देने वाले संस्थान नहीं, बल्कि ज्ञान सृजन, नवाचार और अनुसंधान के जीवंत केंद्र हैं। उन्होंने शिक्षा क्षेत्र के लिए राज्य सरकार द्वारा किए गए बढ़े हुए बजट आवंटन का उल्लेख किया और उच्च शिक्षा को सुदृढ़ करने के लिए कई नई पहलों की रूपरेखा प्रस्तुत की।

आगे की राह

इस सम्मेलन से यह स्पष्ट संकेत मिलता है कि ओडिशा सरकार और राजभवन उच्च शिक्षा को राज्य की विकास रणनीति का केंद्रबिंदु मानते हैं। विश्वविद्यालयों से अपेक्षा है कि वे NEP 2020 के ढाँचे में रहते हुए उद्योग, अनुसंधान और समाज के बीच सेतु का काम करें। कुलपतियों के सामने अब यह चुनौती है कि वे इन निर्देशों को ठोस शैक्षणिक सुधारों में कैसे बदलते हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि ओडिशा के विश्वविद्यालय — जिनमें से कई बुनियादी ढाँचे और फैकल्टी की कमी से जूझ रहे हैं — 'वैश्विक प्रतिस्पर्धा' के इस लक्ष्य को ज़मीन पर कैसे उतारेंगे। NEP 2020 की घोषणा को पाँच वर्ष से अधिक हो चुके हैं, फिर भी कई राज्यों में क्रियान्वयन असमान है। आदिवासी ज्ञान के दस्तावेजीकरण की पहल सराहनीय है, लेकिन बिना समर्पित शोध निधि और प्रशिक्षित अनुसंधानकर्ताओं के यह केवल कागज़ी संकल्प बनकर रह सकती है। बजट आवंटन बढ़ने की बात हुई, लेकिन ठोस आँकड़े सामने नहीं आए — जवाबदेही के लिए यह पारदर्शिता ज़रूरी है।
RashtraPress
16 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

राज्यपाल कंभमपति ने ओडिशा के विश्वविद्यालयों से क्या आह्वान किया?
राज्यपाल हरि बाबू कंभमपति ने ओडिशा के विश्वविद्यालयों से भारतीय मूल्यों में जड़ें जमाए रखते हुए वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी, तकनीकी रूप से उन्नत और सामाजिक रूप से जिम्मेदार संस्थान बनने का आग्रह किया। उन्होंने उद्यमिता, नवाचार और NEP 2020 के प्रभावी क्रियान्वयन पर विशेष जोर दिया।
यह कुलपति सम्मेलन कहाँ और कब आयोजित हुआ?
यह सम्मेलन 31 मई 2026 को भुवनेश्वर स्थित लोक भवन में आयोजित किया गया, जिसमें ओडिशा के सार्वजनिक और निजी विश्वविद्यालयों के कुलपतियों ने भाग लिया।
NEP 2020 को लेकर राज्यपाल ने क्या कहा?
राज्यपाल ने NEP 2020 को परिवर्तनकारी नीति बताया जो बहुविषयक शिक्षा, शैक्षणिक लचीलापन, कौशल एकीकरण, डिजिटल शिक्षा और उद्योग-शिक्षा साझेदारी को बढ़ावा देती है। उन्होंने इसके क्रियान्वयन में प्रधानमंत्री मोदी, केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान और ओडिशा सरकार के प्रयासों की सराहना की।
ओडिशा की आदिवासी विरासत को लेकर विश्वविद्यालयों से क्या अपेक्षा जताई गई?
राज्यपाल ने विश्वविद्यालयों से स्वदेशी ज्ञान प्रणालियों, आदिवासी परंपराओं और सांस्कृतिक संरक्षण पर सार्थक शोध करने का आग्रह किया। साथ ही बताया कि लोक भवन के जनजातीय प्रकोष्ठ द्वारा तैयार PVTG दस्तावेजीकरण प्रकाशन विश्वविद्यालयों को शैक्षणिक अनुसंधान के लिए उपलब्ध कराए जाएंगे।
मुख्यमंत्री मांझी ने उच्च शिक्षा के बारे में क्या कहा?
मुख्यमंत्री मोहन चरण मांझी ने कहा कि विश्वविद्यालय ज्ञान सृजन, नवाचार और अनुसंधान के केंद्र हैं। उन्होंने शिक्षा क्षेत्र के लिए बढ़े हुए बजट आवंटन और उच्च शिक्षा को सुदृढ़ करने की नई पहलों की रूपरेखा भी प्रस्तुत की।
राष्ट्र प्रेस
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