राज्यपाल कंभमपति का ओडिशा विश्वविद्यालयों को आह्वान: वैश्विक प्रतिस्पर्धा और नवाचार को बनाएं प्राथमिकता
सारांश
मुख्य बातें
ओडिशा के राज्यपाल हरि बाबू कंभमपति ने रविवार, 31 मई 2026 को राज्य के सार्वजनिक और निजी विश्वविद्यालयों के कुलपतियों को संबोधित करते हुए स्पष्ट संदेश दिया कि उच्च शिक्षा संस्थानों को भारतीय मूल्यों की जड़ों से जुड़े रहते हुए वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी, तकनीकी रूप से सक्षम और सामाजिक रूप से जिम्मेदार बनना होगा। भुवनेश्वर के लोक भवन में आयोजित इस कुलपति सम्मेलन को उन्होंने ओडिशा में उच्च शिक्षा के भविष्य को आकार देने का एक ऐतिहासिक सामूहिक प्रयास बताया।
सम्मेलन का संदर्भ और उद्देश्य
राज्यपाल कंभमपति ने कुलपतियों का स्वागत करते हुए कहा कि विश्वविद्यालय केवल डिग्री वितरण के केंद्र नहीं, बल्कि ज्ञान, नवाचार और नेतृत्व की पाठशालाएँ हैं जिनकी राष्ट्र-निर्माण में अपरिहार्य भूमिका है। उन्होंने रेखांकित किया कि तेज़ी से हो रहे तकनीकी विकास, उभरते विषयों और बदलती वैश्विक चुनौतियों के बीच उच्च शिक्षा संस्थानों की ज़िम्मेदारी और भी बढ़ गई है।
उनके अनुसार, आत्मनिर्भर भारत की परिकल्पना केवल आर्थिक स्वावलंबन तक सीमित नहीं है — यह नवाचार, प्रौद्योगिकी, विनिर्माण, स्वास्थ्य सेवा, ऊर्जा और शिक्षा को एक साथ समाहित करती है। विश्वविद्यालयों को उद्यमिता की संस्कृति विकसित करनी होगी ताकि युवा पीढ़ी समाज के विकास में उत्प्रेरक की भूमिका निभा सके।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 पर ज़ोर
राज्यपाल ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 की परिवर्तनकारी क्षमता को विस्तार से रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि यह नीति बहुविषयक शिक्षा, शैक्षणिक लचीलापन, कौशल एकीकरण, डिजिटल शिक्षा, उत्कृष्ट अनुसंधान और मज़बूत उद्योग-शिक्षा साझेदारी को एक साथ प्रोत्साहित करती है।
उन्होंने NEP के क्रियान्वयन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान और ओडिशा सरकार के प्रयासों की सराहना की। गौरतलब है कि NEP 2020 के तहत देशभर के विश्वविद्यालयों में पाठ्यक्रम सुधार की प्रक्रिया अभी भी विभिन्न चरणों में है, और ओडिशा जैसे राज्यों में इसके क्रियान्वयन की गति एक महत्वपूर्ण पहलू बनी हुई है।
आदिवासी विरासत और स्वदेशी ज्ञान का संरक्षण
ओडिशा की समृद्ध आदिवासी विरासत का उल्लेख करते हुए राज्यपाल कंभमपति ने विश्वविद्यालयों से स्वदेशी ज्ञान प्रणालियों, आदिवासी परंपराओं और सांस्कृतिक संरक्षण पर सार्थक शोध करने का आग्रह किया। उन्होंने सूचित किया कि लोक भवन के जनजातीय प्रकोष्ठ द्वारा तैयार किए गए विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूहों (PVTG) के दस्तावेजीकरण संबंधी प्रकाशन सभी विश्वविद्यालयों को उपलब्ध कराए जाएंगे, ताकि शैक्षणिक अध्ययन और अनुसंधान पहलों को बल मिल सके।
यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में आदिवासी भाषाओं और ज्ञान परंपराओं के संरक्षण को लेकर शैक्षणिक जगत में नई जागरूकता उभर रही है।
मुख्यमंत्री मांझी का दृष्टिकोण और बजट प्रतिबद्धता
मुख्यमंत्री मोहन चरण मांझी ने भी सम्मेलन में अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय महज़ डिग्री देने वाले संस्थान नहीं, बल्कि ज्ञान सृजन, नवाचार और अनुसंधान के जीवंत केंद्र हैं। उन्होंने शिक्षा क्षेत्र के लिए राज्य सरकार द्वारा किए गए बढ़े हुए बजट आवंटन का उल्लेख किया और उच्च शिक्षा को सुदृढ़ करने के लिए कई नई पहलों की रूपरेखा प्रस्तुत की।
आगे की राह
इस सम्मेलन से यह स्पष्ट संकेत मिलता है कि ओडिशा सरकार और राजभवन उच्च शिक्षा को राज्य की विकास रणनीति का केंद्रबिंदु मानते हैं। विश्वविद्यालयों से अपेक्षा है कि वे NEP 2020 के ढाँचे में रहते हुए उद्योग, अनुसंधान और समाज के बीच सेतु का काम करें। कुलपतियों के सामने अब यह चुनौती है कि वे इन निर्देशों को ठोस शैक्षणिक सुधारों में कैसे बदलते हैं।