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पीयूष गोयल ने टोक्यो में 60,000 भारतीयों को बताया 'ब्रांड एंबेसडर', भारत-जापान व्यापार संबंध मजबूत करने का आह्वान

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पीयूष गोयल ने टोक्यो में 60,000 भारतीयों को बताया 'ब्रांड एंबेसडर', भारत-जापान व्यापार संबंध मजबूत करने का आह्वान

सारांश

वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल की टोक्यो यात्रा महज़ कूटनीतिक औपचारिकता नहीं थी — 200 से अधिक उद्योग प्रतिनिधियों का यह प्रतिनिधिमंडल भारत के सबसे बड़े जापान व्यापार मिशन के रूप में सामने आया। सेमीकंडक्टर और AI से लेकर कुशल श्रमिकों तक — दोनों देशों के बीच साझेदारी की परतें गहरी हो रही हैं।

मुख्य बातें

वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने 25 अगस्त को टोक्यो में भारतीय समुदाय को संबोधित किया।
जापान में बसे लगभग 60,000 भारतीयों को 'भारत का ब्रांड एंबेसडर' बताया गया।
यात्रा में 200 से अधिक भारतीय उद्योग प्रतिनिधि शामिल — जापान ले जाया गया अब तक का सबसे बड़ा व्यापारिक प्रतिनिधिमंडल।
जापानी कंपनियों की सेमीकंडक्टर, AI और एडवांस्ड टेक्नोलॉजी क्षेत्रों में भारत के साथ साझेदारी में बढ़ती रुचि।
भारत की औसत आयु 29 वर्ष — गोयल ने इसे वैश्विक निवेशकों के लिए प्रमुख आकर्षण बताया।
केयरगिवर, इंजीनियर, AI प्रोफेशनल सहित कई क्षेत्रों में जापान में भारतीय कुशल कर्मचारियों की माँग रेखांकित की गई।

वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने मंगलवार, 25 अगस्त को टोक्यो में भारतीय समुदाय को संबोधित करते हुए जापान में बसे लगभग 60,000 भारतीयों को 'भारत का ब्रांड एंबेसडर' करार दिया और भारत-जापान द्विपक्षीय संबंधों को सुदृढ़ करने में उनकी भूमिका की सराहना की। यह संबोधन उनकी जापान यात्रा के दौरान हुआ, जिसमें भारतीय उद्योग और व्यापार जगत के 200 से अधिक प्रतिनिधि शामिल थे — जिसे उन्होंने जापान ले जाया गया अब तक का सबसे बड़ा भारतीय व्यापारिक प्रतिनिधिमंडल बताया।

मुख्य घटनाक्रम

गोयल ने कहा कि इस यात्रा के दौरान जो ऊर्जा, उत्साह और आत्मविश्वास देखने को मिला, वह भारत-जापान संबंधों की बढ़ती प्रगाढ़ता का प्रमाण है। उन्होंने जापानी समाज के साथ अपने कार्य और जुड़ाव के माध्यम से सद्भावना स्थापित करने के लिए भारतीय समुदाय के प्रति आभार व्यक्त किया।

प्रतिनिधिमंडल की बड़ी संख्या को रेखांकित करते हुए मंत्री ने कहा कि यह दोनों देशों के बीच बिजनेस-टू-बिजनेस जुड़ाव और निवेश के अवसरों को बढ़ाने में गहरी आपसी रुचि को दर्शाता है।

भारत की वैश्विक स्थिति और जनसांख्यिकीय ताकत

गोयल ने पिछले दशक में वैश्विक मंच पर भारत की बदलती छवि का उल्लेख किया। उनके अनुसार, भारत की विकास दर, वैश्विक पहचान और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व ने दुनिया भर में भारत और उसके नागरिकों के प्रति विश्वास और सम्मान को बढ़ाया है।

उन्होंने भारत की जनसांख्यिकीय बढ़त को एक बड़ी शक्ति बताया। उनके अनुसार, भारत की युवा आबादी की औसत आयु लगभग 29 वर्ष है, जो इसे वैश्विक निवेशकों के लिए अत्यंत आकर्षक गंतव्य बनाती है।

जापानी कंपनियों की भारत में बढ़ती रुचि

मंत्री ने बताया कि जापानी कंपनियों के साथ हुई बातचीत में भारत के प्रति स्पष्ट उत्साह देखने को मिला। इनमें एडवांस्ड टेक्नोलॉजी, सेमीकंडक्टर और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के क्षेत्र में सक्रिय कंपनियाँ प्रमुख रूप से शामिल हैं। उन्होंने कहा कि जापानी व्यवसाय भारत के साथ अपना जुड़ाव बढ़ाने और हाई-टेक्नोलॉजी क्षेत्रों में नए अवसर तलाशने के इच्छुक हैं।

गोयल ने भारत के बढ़ते व्यापार समझौतों के नेटवर्क का भी उल्लेख किया और कहा कि हाल के वर्षों में कई देशों के साथ हुए व्यापार समझौते वैश्विक भागीदारों के भारतीय अर्थव्यवस्था में बढ़ते विश्वास को दर्शाते हैं।

भारतीय पेशेवरों के लिए जापान में अवसर

गोयल ने जापान में भारतीय पेशेवरों के लिए उपलब्ध रोज़गार अवसरों पर विशेष ज़ोर दिया। उन्होंने बताया कि केयरगिवर, नर्स, वेल्डर, बढ़ई, इलेक्ट्रीशियन, प्लंबर, ड्राइवर, इंजीनियर, AI प्रोफेशनल, चार्टर्ड अकाउंटेंट और समुद्री कर्मचारियों समेत कई क्षेत्रों में कुशल भारतीय कर्मचारियों की जापान में उल्लेखनीय माँग है।

प्रवासी भारतीयों का आर्थिक योगदान और सरकार की प्रतिबद्धता

मंत्री ने रेमिटेंस के माध्यम से प्रवासी भारतीयों के देश की अर्थव्यवस्था में योगदान को महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि विदेश से भेजी जाने वाली यह धनराशि परिवारों को सहारा देती है, आर्थिक गतिविधियाँ बढ़ाती है और बचत व निवेश को प्रोत्साहित करती है — जिससे प्रवासी भारतीय देश की विकास यात्रा के अभिन्न भागीदार बनते हैं।

उन्होंने विदेशों में संकट के समय भारतीय नागरिकों को निकालने और उनकी सहायता करने के सरकार के प्रयासों का उल्लेख करते हुए स्पष्ट किया कि सरकार प्रत्येक भारतीय नागरिक की सुरक्षा और भलाई सुनिश्चित करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है, चाहे वे विश्व में कहीं भी हों। यह यात्रा भारत-जापान आर्थिक साझेदारी को नई ऊँचाइयों पर ले जाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली कसौटी यह होगी कि इन बातचीतों से ठोस निवेश और रोज़गार समझौते कितने निकलते हैं। भारत-जापान संबंध वर्षों से 'रणनीतिक साझेदारी' के दायरे में हैं, फिर भी द्विपक्षीय व्यापार अपनी पूरी क्षमता से कम रहा है। सेमीकंडक्टर और AI में जापानी रुचि की बात उत्साहजनक है, लेकिन यह देखना बाकी है कि यह रुचि वास्तविक पूँजी प्रतिबद्धताओं में कब तब्दील होती है। प्रवासी भारतीयों को 'ब्रांड एंबेसडर' कहना प्रेरक है, पर उनकी वास्तविक ज़रूरतों — वीज़ा सुगमता, श्रम अधिकार, द्विपक्षीय सामाजिक सुरक्षा समझौते — पर ठोस घोषणाएँ अभी भी अपेक्षित हैं।
RashtraPress
26 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पीयूष गोयल की जापान यात्रा का मुख्य उद्देश्य क्या था?
वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल की जापान यात्रा का मुख्य उद्देश्य भारत-जापान व्यापार और निवेश संबंधों को मजबूत करना था। इस यात्रा में 200 से अधिक भारतीय उद्योग प्रतिनिधि शामिल हुए, जो जापान ले जाया गया अब तक का सबसे बड़ा भारतीय व्यापारिक प्रतिनिधिमंडल बताया गया।
जापान में कितने भारतीय रहते हैं और उनकी क्या भूमिका है?
जापान में लगभग 60,000 भारतीय निवास करते हैं। गोयल ने इन्हें 'भारत का ब्रांड एंबेसडर' बताते हुए कहा कि ये अपने कार्य और जापानी समाज के साथ जुड़ाव के माध्यम से दोनों देशों के बीच सद्भावना और विश्वास बनाने में अहम भूमिका निभाते हैं।
जापान में भारतीय पेशेवरों के लिए किन क्षेत्रों में अवसर हैं?
गोयल के अनुसार जापान में केयरगिवर, नर्स, वेल्डर, बढ़ई, इलेक्ट्रीशियन, प्लंबर, ड्राइवर, इंजीनियर, AI प्रोफेशनल, चार्टर्ड अकाउंटेंट और समुद्री कर्मचारियों की उल्लेखनीय माँग है। यह भारतीय कुशल कार्यबल के लिए जापान में विविध रोज़गार संभावनाओं को दर्शाता है।
जापानी कंपनियाँ भारत में किन क्षेत्रों में निवेश करने में रुचि रखती हैं?
गोयल ने बताया कि जापानी कंपनियाँ विशेष रूप से एडवांस्ड टेक्नोलॉजी, सेमीकंडक्टर और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के क्षेत्रों में भारत के साथ सहयोग बढ़ाने की इच्छुक हैं। ये कंपनियाँ भारत के हाई-टेक्नोलॉजी क्षेत्रों में नए अवसर तलाश रही हैं।
प्रवासी भारतीयों का भारत की अर्थव्यवस्था में क्या योगदान है?
गोयल ने रेखांकित किया कि विदेशों में रहने वाले भारतीय रेमिटेंस के माध्यम से देश की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं। यह धनराशि परिवारों को सहारा देती है, आर्थिक गतिविधियाँ बढ़ाती है और बचत व निवेश को प्रोत्साहित करती है, जिससे प्रवासी भारतीय देश की विकास यात्रा के अभिन्न भागीदार बनते हैं।
राष्ट्र प्रेस
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