भारत-जापान साझेदारी: पीयूष गोयल बोले — निवेश है रिश्ते की असली नींव, मारुति से बुलेट ट्रेन तक का सफर
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने 2 जुलाई को नई दिल्ली में आयोजित 'द इंडो-जापान स्ट्रैटेजिक डायलॉग' में स्पष्ट किया कि भारत-जापान द्विपक्षीय संबंधों की असली ताकत निवेश में निहित है। उन्होंने कहा कि दशकों पुराने इस निवेश संबंध ने भारत को ऑटोमोबाइल से लेकर बुनियादी ढाँचे तक कई क्षेत्रों में वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाया है।
मारुति सुजुकी से शुरू हुई औद्योगिक क्रांति
गोयल ने जापानी निवेश का सबसे ठोस उदाहरण देते हुए मारुति सुजुकी का उल्लेख किया। उन्होंने कहा, "मारुति सुजुकी लगभग 40 साल पहले भारत आई और आधुनिक, किफायती एवं टेक्नोलॉजी पर आधारित गाड़ियाँ लेकर आई, जिसने आखिरकार भारत को ऑटो सेक्टर में ग्लोबल पावर बनने की राह पर डाल दिया।" उन्होंने आँकड़ों से इसे पुष्ट करते हुए बताया कि मई में भारत में बेची गई 4 लाख पैसेंजर गाड़ियों में से 1.47 लाख गाड़ियाँ अकेले मारुति सुजुकी की थीं — यानी बाज़ार में लगभग 37% हिस्सेदारी।
व्यापार का स्वरूप: कच्चा माल नहीं, उच्च मूल्य के उत्पाद
मंत्री ने भारत-जापान व्यापारिक संबंध की प्रकृति को रेखांकित करते हुए कहा कि यह रिश्ता एकतरफा नहीं है। भारत जापान से टेक्नोलॉजी-आधारित उत्पाद आयात करता है, जबकि बदले में वैल्यू-एडेड सामान निर्यात करता है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा, "हम कच्चा माल या इंटरमीडिएट नहीं बेच रहे। हम जापान को उच्च गुणवत्ता वाला, सटीक इंजीनियरिंग वाला मटीरियल, ऑटो पार्ट्स और इलेक्ट्रॉनिक पार्ट्स बेच रहे हैं।" गौरतलब है कि भारत का पहला डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर भी ओडिशा में जापान की साझेदारी से बना, जिसने लौह अयस्क (आयरन ओर) के निर्यात को गति दी।
मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन: देरी और नई उम्मीद
भारत-जापान सहयोग की सबसे महत्वाकांक्षी परियोजना 508 किलोमीटर लंबे मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर पर गोयल ने विस्तार से बात की। जापानी शिंकानसेन तकनीक पर आधारित यह ट्रेन 320 किमी/घंटा की रफ्तार से दौड़ेगी, जिससे दोनों शहरों के बीच यात्रा का समय छह घंटे से अधिक से घटकर दो घंटे से थोड़ा अधिक रह जाएगा।
परियोजना में हुई देरी के लिए गोयल ने महाराष्ट्र की पूर्व महा विकास आघाड़ी (MVA) सरकार को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने उद्धव ठाकरे सरकार पर "राजनीति के लिए" भूमि अधिग्रहण में अड़ंगा लगाने का आरोप लगाया और कहा, "एमवीए सरकार ने, शायद महाराष्ट्र के लोगों के प्रति द्वेष के कारण, मुख्य स्टेशनों के लिए जमीन आवंटित नहीं की।" हालाँकि, उन्होंने भरोसा दिलाया कि राज्य में BJP-नेतृत्व वाली सरकार के सत्ता में आने के बाद स्थिति बदली है और परियोजना अब 2029 की समय-सीमा के लिए पुनः पटरी पर है।
जापान में भारतीय पेशेवरों के लिए नए अवसर
गोयल ने द्विपक्षीय संबंधों के एक और आयाम — मानव संसाधन — पर भी प्रकाश डाला। जापान की तेज़ी से बढ़ती उम्रदराज़ आबादी के मद्देनज़र वहाँ कुशल केयरगिवर्स (देखभाल करने वालों) की भारी माँग है। मंत्री ने कहा, "जापान को अत्यधिक कुशल देखभाल करने वालों की तलाश है। लेकिन एक ज़रूरी शर्त यह है कि व्यक्ति को जापानी भाषा आनी चाहिए।" उन्होंने सुझाया कि भाषा कौशल और सांस्कृतिक समझ का संयोजन भारतीय हेल्थकेयर पेशेवरों के लिए जापान में रोज़गार के नए द्वार खोल सकता है। यह ऐसे समय में आया है जब भारत सरकार कई देशों के साथ गतिशीलता समझौतों (Mobility Agreements) पर काम कर रही है।
साझेदारी का अगला पड़ाव
गोयल ने संकेत दिया कि भारत इस साझेदारी को और गहरा करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा, "हम जापान के साथ अधिक व्यापार और निवेश को बढ़ावा देते हैं।" विशेषज्ञों के अनुसार, सेमीकंडक्टर, हरित ऊर्जा और डिजिटल बुनियादी ढाँचे में जापानी निवेश आकर्षित करना आने वाले वर्षों में भारत की प्राथमिकता रहेगी। आने वाले महीनों में दोनों देशों के बीच उच्च-स्तरीय वार्ता और संभावित समझौतों की उम्मीद है।