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गुजरात: बीएनजेडी पर ₹1,143 करोड़ के फर्जी चंदे का मामला, सीआईडी क्राइम ने दर्ज की एफआईआर

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गुजरात: बीएनजेडी पर ₹1,143 करोड़ के फर्जी चंदे का मामला, सीआईडी क्राइम ने दर्ज की एफआईआर

सारांश

गुजरात में एक पंजीकृत राजनीतिक पार्टी पर ₹1,143 करोड़ के फर्जी चंदे और हवाला के ज़रिए कर चोरी का आरोप — सीआईडी क्राइम ने एफआईआर दर्ज कर ली है। 56,238 दानदाताओं के नाम जुड़े होने से यह मामला राजनीतिक चंदे की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

मुख्य बातें

सीआईडी क्राइम (गांधीनगर ज़ोन) ने 25 सितंबर 2026 को बीएनजेडी और चार पदाधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की।
कथित घोटाले की राशि ₹1,143.85 करोड़ ; 56,238 दानदाता इस मामले से जुड़े हैं।
आयकर विभाग का अनुमान है कि सरकारी खजाने को ₹343 करोड़ का प्रत्यक्ष कर नुकसान हुआ।
कथित लेन-देन वित्त वर्ष 2019-20 से 2024-25 के बीच, धन अंगड़िया चैनलों और हवाला नेटवर्क के ज़रिए लौटाने का आरोप।
नामजद आरोपियों में बीएनजेडी अध्यक्ष सुरेंद्रकुमार गजेरा , महासचिव विपुल सोलंकी , कोषाध्यक्ष रौनकसिंह चावड़ा और ऑडिटर आदिल सैयद शामिल हैं।
तलाशी में 2.91 लाख रसीदें बरामद; आयकर विभाग ने नवंबर 2025 में छापेमारी की थी।

गुजरात पुलिस की सीआईडी क्राइम (गांधीनगर ज़ोन) ने 25 सितंबर 2026 को राज्य की पंजीकृत राजनीतिक पार्टी भारतीय राष्ट्रीय जनता दल (बीएनजेडी) और उसके चार पदाधिकारियों के खिलाफ ₹1,143.85 करोड़ के कथित फर्जी राजनीतिक चंदे के मामले में आपराधिक प्रकरण दर्ज किया है। आयकर विभाग की शिकायत के आधार पर दर्ज इस एफआईआर में 56,238 दानदाताओं के नाम जुड़े हैं और अनुमानित कर नुकसान ₹343 करोड़ बताया गया है।

मुख्य घटनाक्रम

आयकर विभाग ने नवंबर 2025 में गांधीनगर स्थित बीएनजेडी कार्यालय और पदाधिकारियों से जुड़े परिसरों पर तलाशी अभियान चलाया था। उस तलाशी के बाद की गई जांच के आधार पर ही 25 सितंबर 2026 को एफआईआर दर्ज की गई।

कथित लेन-देन वित्तीय वर्ष 2019-20 से 2024-25 के बीच हुए बताए जाते हैं। जांचकर्ताओं के अनुसार, तलाशी के दौरान परिसरों से लगभग 2.91 लाख रसीदें बरामद की गईं।

आरोपों का ब्यौरा

शिकायत में आरोप है कि करदाताओं ने आरटीजीएस सहित बैंकिंग चैनलों के माध्यम से पार्टी को धन हस्तांतरित किया। इसके बदले में उन्हें दान रसीदें जारी की गईं, जिससे वे आयकर अधिनियम के तहत राजनीतिक दलों को दिए अंशदान पर उपलब्ध कटौतियों का दावा कर सकें।

जांचकर्ताओं का आरोप है कि पार्टी खातों से यह धन जे ट्रेडिंग, काजल एंटरप्राइजेज और परमार एसोसिएट्स जैसी मध्यस्थ फर्मों को स्थानांतरित किया गया। इसके बाद खाद्यान्न, दालों और अन्य वस्तुओं की खरीद दर्शाने वाले कथित फर्जी बिल और चालान तैयार कर नकद में धन निकाला गया।

शिकायत के अनुसार, 2% से 10% तक कमीशन काटकर शेष राशि अंगड़िया चैनलों और हवाला नेटवर्क के माध्यम से मूल दानदाताओं को लौटा दी गई। इसके अतिरिक्त, फर्जी लेखा अभिलेख और फॉर्म 24ए में अंशदान रिपोर्ट तैयार कर चुनाव आयोग को प्रस्तुत की गई, जिसमें कथित लेन-देन को वास्तविक राजनीतिक दान के रूप में दिखाया गया।

नामजद आरोपी

एफआईआर में बीएनजेडी अध्यक्ष सुरेंद्रकुमार गजेरा, महासचिव विपुल सोलंकी, कोषाध्यक्ष रौनकसिंह चावड़ा और चार्टर्ड अकाउंटेंट-सह-ऑडिटर आदिल सैयद सहित पार्टी के अन्य सदस्य नामजद हैं। ये सभी आरोप अभी तक अदालत द्वारा सिद्ध नहीं हुए हैं।

जांचकर्ताओं ने गजेरा को कथित मुख्य आरोपी और इस ऑपरेशन का सूत्रधार बताया है। आरोप है कि उन्होंने नेटवर्क की निगरानी की और कमीशन दरें निर्धारित कीं। सोलंकी पर मैसेजिंग प्लेटफॉर्म के माध्यम से दानदाताओं के विवरण का समन्वय करने और हस्ताक्षरित दान रसीदें जारी करने का आरोप है।

आयकर विभाग की तलाशी में चावड़ा से जुड़े परिसरों से लेन-देन के रिकॉर्ड और डिजिटल संचार बरामद किए गए। सैयद पर आरोप है कि उन्होंने पार्टी कार्यालय का दौरा किए बिना और वास्तविक लेन-देन की जांच किए बिना डिजिटल हस्ताक्षर वाली ऑडिट रिपोर्ट तैयार की।

कानूनी धाराएं और पार्टी की पृष्ठभूमि

यह मामला भारतीय न्याय संहिता की धोखाधड़ी, आपराधिक साजिश, जालसाजी और जाली दस्तावेजों के उपयोग से संबंधित धाराओं के तहत दर्ज है। गौरतलब है कि बीएनजेडी एक पंजीकृत लेकिन गैर-मान्यता प्राप्त राजनीतिक दल है, जिसने गुजरात में चुनाव लड़े हैं। सार्वजनिक अभिलेखों से पता चलता है कि इसने पिछले वर्षों में अपने दस्तावेजों में पर्याप्त चंदा दर्शाया है।

आगे की जांच

सीआईडी क्राइम अब इस मामले की आगे जांच करेगी। यह प्रकरण ऐसे समय में सामने आया है जब देशभर में राजनीतिक दलों को मिलने वाले चंदे की पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर बहस तेज़ है। आने वाले दिनों में आरोपियों से पूछताछ और संभावित गिरफ्तारी की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

संपादकीय दृष्टिकोण

143 करोड़ जैसी विशाल राशि एक गैर-मान्यता प्राप्त दल के नाम पर जमा होना और चुनाव आयोग को फर्जी रिपोर्ट प्रस्तुत करना — यह नियामकीय निगरानी की सीमाओं पर गंभीर प्रश्नचिह्न है। यह भी ध्यान देने योग्य है कि ऑडिटर पर ही मिलीभगत का आरोप है, जो प्रमाणन प्रक्रिया की विश्वसनीयता को कटघरे में खड़ा करता है। असली परीक्षा यह होगी कि क्या जांच हवाला नेटवर्क के पीछे मौजूद बड़े लाभार्थियों तक पहुँच पाती है, या फिर यह मामला चार नामजद पदाधिकारियों तक ही सीमित रह जाता है।
RashtraPress
28 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बीएनजेडी पार्टी पर क्या आरोप हैं?
भारतीय राष्ट्रीय जनता दल (बीएनजेडी) पर आरोप है कि उसने वित्त वर्ष 2019-20 से 2024-25 के बीच 56,238 दानदाताओं से ₹1,143.85 करोड़ का फर्जी राजनीतिक चंदा एकत्र किया। दानदाताओं को टैक्स कटौती के लिए रसीदें जारी की गईं, जबकि धन बाद में हवाला नेटवर्क के ज़रिए वापस लौटाया गया।
इस मामले में कितना कर नुकसान हुआ?
आयकर विभाग के अनुमान के अनुसार, इस कथित व्यवस्था के परिणामस्वरूप सरकारी खजाने को लगभग ₹343 करोड़ का प्रत्यक्ष कर नुकसान हुआ है। यह अनुमान विभाग की जांच और नवंबर 2025 में की गई तलाशी पर आधारित है।
एफआईआर में कौन-कौन नामजद हैं?
एफआईआर में बीएनजेडी अध्यक्ष सुरेंद्रकुमार गजेरा, महासचिव विपुल सोलंकी, कोषाध्यक्ष रौनकसिंह चावड़ा और पार्टी के चार्टर्ड अकाउंटेंट-सह-ऑडिटर आदिल सैयद के साथ-साथ पार्टी के अन्य सदस्य भी नामजद हैं। ये सभी आरोप अभी तक अदालत में सिद्ध नहीं हुए हैं।
धन को कैसे छुपाया गया बताया जा रहा है?
जांचकर्ताओं का आरोप है कि पार्टी खातों से धन जे ट्रेडिंग, काजल एंटरप्राइजेज और परमार एसोसिएट्स जैसी मध्यस्थ फर्मों को स्थानांतरित किया गया। इसके बाद फर्जी खरीद बिल तैयार कर नकद निकाला गया और 2% से 10% कमीशन काटकर शेष राशि अंगड़िया चैनलों व हवाला नेटवर्क के ज़रिए दानदाताओं को लौटाई गई।
बीएनजेडी क्या है और इसकी राजनीतिक स्थिति क्या है?
बीएनजेडी (भारतीय राष्ट्रीय जनता दल) एक पंजीकृत लेकिन गैर-मान्यता प्राप्त राजनीतिक दल है जिसने गुजरात में चुनाव लड़े हैं। सार्वजनिक अभिलेखों के अनुसार, इसने पिछले वर्षों में अपने दस्तावेजों में पर्याप्त चंदा दर्शाया है, जो अब जांच के केंद्र में है।
राष्ट्र प्रेस
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