गुजरात CM भूपेंद्र पटेल का पंचायत प्रतिनिधियों को संदेश: जनता सुनें, नियम मानें, गुणवत्ता सुनिश्चित करें
सारांश
मुख्य बातें
गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने मंगलवार, 1 सितंबर को गांधीनगर में त्रिस्तरीय पंचायती राज व्यवस्था के नवनिर्वाचित पदाधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए — नागरिकों की बात ध्यान से सुनें, प्रासंगिक नियमों को आत्मसात करें और विकास परियोजनाओं में गुणवत्ता से कोई समझौता न करें। उन्होंने यह बात गुजरात विधानसभा सचिवालय में आयोजित एक दिवसीय 'पंचायत संस्कार कार्यशाला' में कही, जिसमें 188 पंचायत पदाधिकारी शामिल हुए — जिनमें 70 महिला प्रतिनिधि भी थीं।
मुख्यमंत्री का मुख्य संदेश
मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने 1995 से अपने सार्वजनिक जीवन के अनुभव साझा करते हुए कहा कि चुने हुए प्रतिनिधियों को नागरिकों को पर्याप्त समय देना चाहिए। उन्होंने कहा, 'जनता का भरोसा इस बात पर निर्भर करता है कि स्थानीय प्रतिनिधि लोगों की जरूरतों को कितनी अच्छी तरह पूरा करते हैं।' उनका स्पष्ट संदेश था कि नागरिकों को केवल सरकारी अधिकारियों के पास भेज देना पर्याप्त नहीं है — बल्कि प्रतिनिधियों को खुद समस्या समझकर संबंधित अधिकारी से चर्चा कर समाधान निकालना चाहिए।
उन्होंने यह भी कहा, 'प्रतिनिधियों को मुद्दे समझने चाहिए, लागू नियमों से खुद को परिचित करना चाहिए, और फिर समाधान खोजने के लिए संबंधित अधिकारी के साथ मामले पर चर्चा करनी चाहिए।'
विकास कार्यों में गुणवत्ता पर जोर
पटेल ने सड़क, स्कूल और पंचायत भवनों जैसे बुनियादी विकास कार्यों में गुणवत्ता की अनिवार्यता पर बल दिया। उनके अनुसार, टिकाऊ और सुनियोजित परियोजनाएं सरकार और जनप्रतिनिधियों दोनों में आम नागरिकों का विश्वास मजबूत करती हैं। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में गांव से राज्य स्तर तक विकास के लिए धन की कमी नहीं है — शर्त केवल उचित योजना, नियमों की समझ और काम के प्रति प्रतिबद्धता की है।
कल्याणकारी योजनाओं की निरंतरता
मुख्यमंत्री ने 'नल से जल' और 'प्रधानमंत्री आवास योजना' जैसी योजनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि जनहित के आवश्यक कार्य राजनीतिक बदलावों के बावजूद बाधित नहीं होने चाहिए। उन्होंने कहा, 'भले ही किसी परियोजना या अनुबंध में किसी अनियमितता की जांच चल रही हो, पानी और आवास जैसी बुनियादी सुविधाएं नहीं रोकी जानी चाहिए।' उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि केंद्र और राज्य की गरीब-समर्थक नीतियों ने 25 करोड़ से अधिक लोगों को गरीबी से बाहर निकालने में मदद की है।
विधानसभा अध्यक्ष और ग्रामीण विकास मंत्री की अपील
विधानसभा अध्यक्ष शंकर चौधरी ने कहा कि चुने हुए प्रतिनिधियों को पद संभालने के बाद भी निरंतर सीखते रहना चाहिए। उन्होंने जिला और तालुका पंचायत स्तरों पर भी संसद और विधानसभाओं की तरह रचनात्मक संवाद का माहौल बनाने की अपील की। उनका कहना था, 'सरकारी नियमों और सर्कुलर का मकसद सेवाओं को आसान और पारदर्शी बनाना है, न कि विकास में देरी करना।'
ग्रामीण विकास मंत्री कुंवरजी बावलिया ने बताया कि अब विकास योजनाओं का फंड सीधे लाभार्थियों और पंचायतों के बैंक खातों में जमा किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि स्वच्छ भारत मिशन के तहत गुजरात में 45 लाख से अधिक व्यक्तिगत शौचालय बनाए गए हैं और गोवर्धन योजना के तहत 14,000 से अधिक बायोगैस प्लांट स्थापित किए गए हैं।
महिला सशक्तिकरण पर विशेष ध्यान
बावलिया ने महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण पर बात करते हुए मिशन मंगलम और लखपति दीदी पहल का उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं को बिना ब्याज के लोन, ग्राम हाट में उत्पाद बेचने के अवसर और सरकारी दफ्तरों व बस स्टैंड पर कैंटीन चलाने की सुविधा दी जा रही है। ड्रोन दीदी और कौशल-आधारित प्रशिक्षण जैसी पहलों के जरिए महिलाओं को आधुनिक तकनीक से जोड़ा जा रहा है। यह कार्यशाला पंचायती राज व्यवस्था को जमीनी स्तर पर और अधिक जवाबदेह और प्रभावी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।