गुजरात डीजीपी केएलएन राव ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से कच्छ अदालत में दी गवाही, 2021 ACB मामले में पेशी
सारांश
मुख्य बातें
गुजरात के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) केएलएन राव मंगलवार, 26 मई 2026 को गांधीनगर स्थित जिला न्यायालय के औपचारिक गवाह बयान केंद्र से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के ज़रिए कच्छ की एक अदालत में पेश हुए और 2021 के भ्रष्टाचार विरोधी ब्यूरो (ACB) मामले में अभियोजन पक्ष की मंजूरी से जुड़ी गवाही दर्ज कराई। अधिकारियों ने इसे गुजरात में न्यायिक कार्यवाही के डिजिटलीकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण व्यावहारिक कदम बताया।
गवाही की प्रक्रिया
सुनवाई गांधीधाम, कच्छ स्थित अदालत में चल रही थी, जबकि राव गांधीनगर से जुड़े। उनकी गवाही अदालत की वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग प्रणाली के माध्यम से दूरस्थ रूप से रिकॉर्ड की गई। इस व्यवस्था से गांधीनगर और कच्छ के बीच लंबी दूरी की यात्रा की आवश्यकता समाप्त हो गई और पूरी प्रक्रिया कम समय में संपन्न हुई।
डिजिटल न्यायिक प्रणाली का व्यापक लक्ष्य
पुलिस विभाग के अनुसार, यह वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग सुविधा समय, ईंधन और रसद लागत बचाने के उद्देश्य से विकसित की गई है। साथ ही यह सुनिश्चित किया जाता है कि गवाहों की अनुपलब्धता या यात्रा संबंधी बाधाओं के कारण अदालती सुनवाई में देरी न हो। यह प्रणाली नियमित सुनवाई के लिए कैदियों को जेल से अदालत तक लाने की ज़रूरत को भी कम करती है।
गौरतलब है कि यह पहल न्यायपालिका और पुलिस विभाग के उस व्यापक प्रयास का हिस्सा है जिसके तहत गवाहों, अधिकारियों और कानूनी कार्रवाई में शामिल नागरिकों के लिए शारीरिक यात्रा को न्यूनतम किया जा सके।
डीजीपी राव का बयान
राव ने कहा, 'प्रौद्योगिकी को अपनाना समय की माँग है। यह प्रणाली समय, ऊर्जा और ईंधन बचाने में मदद करती है, जो एक राष्ट्रीय संसाधन है।' उन्होंने राज्य भर में पुलिस कर्मियों, गवाहों और कानूनी कार्रवाई में शामिल नागरिकों से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग सुविधाओं का व्यापक उपयोग करने की अपील भी की।
बकरी ईद सुरक्षा समीक्षा बैठक
उसी दिन, डीजीपी राव ने बकरी ईद की तैयारियों को लेकर पुलिस भवन से वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से एक अलग राज्यव्यापी सुरक्षा समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की। इस बैठक में राज्य के सभी शहर पुलिस आयुक्त, रेंज महानिरीक्षक और जिला पुलिस अधीक्षक वर्चुअल रूप से शामिल हुए।
आगे की राह
राव की इस पहल से यह संकेत मिलता है कि गुजरात पुलिस और न्यायपालिका मिलकर डिजिटल अवसंरचना को प्रशासनिक कार्यकुशलता के एक स्थायी माध्यम के रूप में स्थापित करने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस मॉडल को राज्य के सभी जिलों में विस्तारित किया जाए, तो न्यायिक प्रक्रियाओं में होने वाली देरी में उल्लेखनीय कमी आ सकती है।