11 जुलाई 2026
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गुजरात डीजीपी केएलएन राव ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से कच्छ अदालत में दी गवाही, 2021 ACB मामले में पेशी

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गुजरात डीजीपी केएलएन राव ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से कच्छ अदालत में दी गवाही, 2021 ACB मामले में पेशी

सारांश

गुजरात के डीजीपी केएलएन राव ने गांधीनगर से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के ज़रिए कच्छ अदालत में 2021 ACB मामले में गवाही दी — बिना एक किलोमीटर की यात्रा किए। यह छोटा कदम राज्य में न्यायिक प्रक्रियाओं के डिजिटलीकरण की बड़ी मंशा का संकेत देता है।

मुख्य बातें

गुजरात डीजीपी केएलएन राव ने 26 मई 2026 को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के ज़रिए कच्छ की अदालत में 2021 ACB मामले में गवाही दर्ज कराई।
गवाही गांधीनगर जिला न्यायालय के औपचारिक गवाह बयान केंद्र से दी गई; मामले की सुनवाई गांधीधाम, कच्छ में हुई।
इस व्यवस्था से गांधीनगर और कच्छ के बीच लंबी दूरी की यात्रा की आवश्यकता समाप्त हुई और समय की बचत हुई।
राव ने कहा — 'यह प्रणाली समय, ऊर्जा और ईंधन बचाती है, जो एक राष्ट्रीय संसाधन है।' उसी दिन राव ने बकरी ईद की तैयारियों को लेकर राज्यव्यापी वर्चुअल सुरक्षा समीक्षा बैठक की अध्यक्षता भी की।

गुजरात के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) केएलएन राव मंगलवार, 26 मई 2026 को गांधीनगर स्थित जिला न्यायालय के औपचारिक गवाह बयान केंद्र से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के ज़रिए कच्छ की एक अदालत में पेश हुए और 2021 के भ्रष्टाचार विरोधी ब्यूरो (ACB) मामले में अभियोजन पक्ष की मंजूरी से जुड़ी गवाही दर्ज कराई। अधिकारियों ने इसे गुजरात में न्यायिक कार्यवाही के डिजिटलीकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण व्यावहारिक कदम बताया।

गवाही की प्रक्रिया

सुनवाई गांधीधाम, कच्छ स्थित अदालत में चल रही थी, जबकि राव गांधीनगर से जुड़े। उनकी गवाही अदालत की वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग प्रणाली के माध्यम से दूरस्थ रूप से रिकॉर्ड की गई। इस व्यवस्था से गांधीनगर और कच्छ के बीच लंबी दूरी की यात्रा की आवश्यकता समाप्त हो गई और पूरी प्रक्रिया कम समय में संपन्न हुई।

डिजिटल न्यायिक प्रणाली का व्यापक लक्ष्य

पुलिस विभाग के अनुसार, यह वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग सुविधा समय, ईंधन और रसद लागत बचाने के उद्देश्य से विकसित की गई है। साथ ही यह सुनिश्चित किया जाता है कि गवाहों की अनुपलब्धता या यात्रा संबंधी बाधाओं के कारण अदालती सुनवाई में देरी न हो। यह प्रणाली नियमित सुनवाई के लिए कैदियों को जेल से अदालत तक लाने की ज़रूरत को भी कम करती है।

गौरतलब है कि यह पहल न्यायपालिका और पुलिस विभाग के उस व्यापक प्रयास का हिस्सा है जिसके तहत गवाहों, अधिकारियों और कानूनी कार्रवाई में शामिल नागरिकों के लिए शारीरिक यात्रा को न्यूनतम किया जा सके।

डीजीपी राव का बयान

राव ने कहा, 'प्रौद्योगिकी को अपनाना समय की माँग है। यह प्रणाली समय, ऊर्जा और ईंधन बचाने में मदद करती है, जो एक राष्ट्रीय संसाधन है।' उन्होंने राज्य भर में पुलिस कर्मियों, गवाहों और कानूनी कार्रवाई में शामिल नागरिकों से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग सुविधाओं का व्यापक उपयोग करने की अपील भी की।

बकरी ईद सुरक्षा समीक्षा बैठक

उसी दिन, डीजीपी राव ने बकरी ईद की तैयारियों को लेकर पुलिस भवन से वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से एक अलग राज्यव्यापी सुरक्षा समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की। इस बैठक में राज्य के सभी शहर पुलिस आयुक्त, रेंज महानिरीक्षक और जिला पुलिस अधीक्षक वर्चुअल रूप से शामिल हुए।

आगे की राह

राव की इस पहल से यह संकेत मिलता है कि गुजरात पुलिस और न्यायपालिका मिलकर डिजिटल अवसंरचना को प्रशासनिक कार्यकुशलता के एक स्थायी माध्यम के रूप में स्थापित करने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस मॉडल को राज्य के सभी जिलों में विस्तारित किया जाए, तो न्यायिक प्रक्रियाओं में होने वाली देरी में उल्लेखनीय कमी आ सकती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

न किसी एक हाई-प्रोफाइल गवाही में।
RashtraPress
11 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

गुजरात डीजीपी केएलएन राव ने किस मामले में कच्छ अदालत में गवाही दी?
डीजीपी केएलएन राव ने 2021 के भ्रष्टाचार विरोधी ब्यूरो (ACB) मामले में अभियोजन पक्ष की मंजूरी से संबंधित गवाही दी। यह गवाही 26 मई 2026 को गांधीनगर से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से दर्ज की गई।
वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से अदालत में गवाही देने का क्या फायदा है?
इस व्यवस्था से गवाहों और अधिकारियों को लंबी दूरी की यात्रा नहीं करनी पड़ती, जिससे समय, ईंधन और रसद लागत की बचत होती है। साथ ही गवाह की अनुपलब्धता के कारण सुनवाई में होने वाली देरी भी कम होती है।
गुजरात में यह वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग सुविधा किसके लिए उपलब्ध है?
पुलिस विभाग के अनुसार यह सुविधा पुलिस कर्मियों, गवाहों और कानूनी कार्रवाई में शामिल नागरिकों के लिए उपलब्ध है। डीजीपी राव ने राज्य भर में इसके व्यापक उपयोग की अपील भी की है।
26 मई को डीजीपी राव ने बकरी ईद को लेकर क्या किया?
उसी दिन डीजीपी राव ने पुलिस भवन से वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से बकरी ईद की तैयारियों के लिए एक राज्यव्यापी सुरक्षा समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की। इसमें सभी शहर पुलिस आयुक्त, रेंज महानिरीक्षक और जिला पुलिस अधीक्षक वर्चुअल रूप से शामिल हुए।
क्या यह प्रणाली कैदियों की अदालत में पेशी पर भी लागू होती है?
हाँ, पुलिस विभाग के अनुसार यह प्रणाली नियमित सुनवाई के लिए कैदियों को जेल से अदालत परिसर तक लाने की आवश्यकता को भी कम करती है। इससे सुरक्षा जोखिम और परिवहन लागत दोनों में कमी आती है।
राष्ट्र प्रेस
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