चैतर वसावा के समर्थन में आप का गुजरात भर में मार्च, कानूनी लड़ाई का ऐलान
सारांश
मुख्य बातें
आम आदमी पार्टी (AAP) ने 26 जून को पूरे गुजरात में डेडियापाडा के विधायक चैतर वसावा के समर्थन में राज्यव्यापी 'सपोर्ट मार्च' निकाले। नर्मदा जिले की राजपीपला सेशन कोर्ट ने वसावा को वन विभाग के अधिकारियों के साथ कथित मारपीट, सरकारी कर्तव्य में बाधा और जबरन वसूली के एक मामले में सात साल की कठोर कैद की सजा सुनाई है। पार्टी ने इस सजा को राजनीतिक षड्यंत्र करार देते हुए सभी उपलब्ध कानूनी रास्ते अपनाने का संकल्प लिया है।
तीन चरणों वाला आंदोलन
AAP की गुजरात यूनिट के इंचार्ज गोपाल राय ने 24 जून को इस राज्यव्यापी अभियान की घोषणा की थी। उन्होंने बताया कि तीन चरणों वाले इस आंदोलन के तहत 26 जून को हर जिले में पैदल मार्च निकाले जाएंगे और 28 जून को सभी विधानसभा क्षेत्रों में भी मार्च होंगे। राय ने स्पष्ट किया कि पार्टी इस मामले में अदालती लड़ाई से पीछे नहीं हटेगी।
मुख्य घटनाक्रम: किसने-कहाँ नेतृत्व किया
जूनागढ़ में मार्च का नेतृत्व विधायक गोपाल इटालिया और राज्य संगठन सचिव राजू बोरखतरिया ने किया। सूरत में प्रदेश उपाध्यक्ष रामभाई धड़ुक, प्रदेश संगठन सचिव धर्मेश भंडेरी और सूरत लोकसभा प्रभारी रजनीकांत वाघानी अग्रणी रहे। अहमदाबाद में राज्य उपाध्यक्ष गौरीबेन देसाई, राज्य संगठन सचिव डॉ. करण बारोट, राज्य छात्र विंग अध्यक्ष धार्मिक मथुकिया और राज्य मालधारी सेल अध्यक्ष किरण देसाई समेत कई पदाधिकारी शामिल हुए। इसके अलावा बारडोली, साबरकांठा और अन्य क्षेत्रों में भी मार्च निकाले गए।
अदालती फैसले का ब्यौरा
राजपीपला सेशन कोर्ट के एडिशनल सेशन जज एवी हिरपारा ने वसावा, उनकी पत्नी शकुंतला वसावा और सात अन्य को 30 अक्टूबर 2023 को हुई एक घटना के लिए दोषी ठहराया। अभियोजन पक्ष के अनुसार, वन अधिकारियों ने डेडियापाड़ा में सरकारी वन भूमि से कथित अतिक्रमण हटाया था। इसके बाद विवाद सुलझाने के लिए बुलाई गई बैठक में अधिकारियों के साथ कथित तौर पर मारपीट की गई और उन्हें धमकाया गया। अभियोजन पक्ष ने यह भी आरोप लगाया कि वसावा ने बिना लाइसेंस की पिस्तौल से गोली चलाई। सभी नौ दोषियों को सात साल की कठोर कैद और प्रत्येक पर ₹25,000 का जुर्माना सुनाया गया।
विधायकी सदस्यता पर संकट
इस सजा के बाद गुजरात विधानसभा में वसावा की सदस्यता पर भी प्रश्नचिह्न लग गया है। उप-स्पीकर पूर्णेश मोदी ने कहा कि जन प्रतिनिधित्व अधिनियम के प्रावधानों के तहत दो या अधिक वर्ष की सजा मिलने पर विधायक सदन के सदस्य नहीं रहते। हालाँकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यदि किसी उच्च न्यायालय से अपील में स्टे मिलता है, तो स्थिति बदल सकती है। वसावा ने संकेत दिया है कि वे इस फैसले को गुजरात उच्च न्यायालय में चुनौती देंगे।
आप और केजरीवाल का रुख
AAP के राष्ट्रीय संयोजक एवं दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने पहले ही वसावा के समर्थन में बयान देते हुए आरोपों को झूठा और राजनीतिक रूप से प्रेरित बताया था। पार्टी का दावा है कि वसावा आदिवासी समुदाय के हकों के लिए आवाज उठाते रहे हैं और उन्हें इसी कारण निशाना बनाया गया। यह ऐसे समय में आया है जब AAP गुजरात में अपनी जड़ें मजबूत करने की कोशिश में है और आदिवासी बहुल इलाकों में पार्टी की पैठ बढ़ाना उसकी रणनीति का अहम हिस्सा है। आगे गुजरात उच्च न्यायालय का फैसला तय करेगा कि वसावा की विधायकी बची रहती है या नहीं।