9 अगस्त 2026
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AAP विधायक चैतर वसावा को 7 साल की सजा, वन अधिकारियों से मारपीट और रंगदारी मामले में राजपीपला कोर्ट का फैसला

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AAP विधायक चैतर वसावा को 7 साल की सजा, वन अधिकारियों से मारपीट और रंगदारी मामले में राजपीपला कोर्ट का फैसला

सारांश

राजपीपला सेशंस कोर्ट ने AAP विधायक चैतर वसावा और उनकी पत्नी समेत 9 लोगों को वन अधिकारियों से मारपीट व रंगदारी के मामले में 7 साल की सजा सुनाई। यह फैसला गुजरात में AAP के लिए बड़ा राजनीतिक झटका है, खासकर आदिवासी-बहुल क्षेत्रों में जहाँ वसावा पार्टी का मुख्य चेहरा थे।

मुख्य बातें

राजपीपला सेशंस कोर्ट ने 23 जून 2026 को AAP विधायक चैतर वसावा , उनकी पत्नी शकुंतला वसावा समेत 9 लोगों को 7 साल की सश्रम कारावास की सजा सुनाई।
मामला 30 अक्टूबर 2023 को नर्मदा जिले के डेडियापाडा में वन अधिकारियों के साथ मारपीट, जबरन वसूली और आर्म्स एक्ट उल्लंघन से जुड़ा है।
अभियोजन पक्ष के अनुसार वन भूमि पर अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के बाद 5 वन अधिकारियों को वसावा के आवास पर धमकाया गया और एक के साथ मारपीट की गई।
वसावा दिसंबर 2023 में आत्मसमर्पण कर जमानत पर रहे और 2024 के लोकसभा चुनाव में भरूच से AAP उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ा।
गुजरात उच्च न्यायालय ने इस वर्ष मई में अतिरिक्त गवाहों की पूछताछ की वसावा की अर्जी खारिज कर दी थी।
यह दोषसिद्धि गुजरात में AAP के आदिवासी-बहुल क्षेत्रों में पार्टी के राजनीतिक भविष्य पर गहरा असर डाल सकती है।

राजपीपला की सेशंस कोर्ट ने 23 जून 2026 को आम आदमी पार्टी (AAP) के विधायक चैतर वसावा और उनकी पत्नी शकुंतला वसावा समेत नौ दोषियों को सात-सात साल की सश्रम कारावास की सजा सुनाई। यह फैसला गुजरात के नर्मदा जिले के डेडियापाडा में 30 अक्टूबर 2023 की रात हुई उस घटना से जुड़ा है, जिसमें वन विभाग के अधिकारियों के साथ मारपीट, जबरन वसूली और आर्म्स एक्ट के तहत अपराध के आरोप लगाए गए थे।

मुख्य घटनाक्रम

एडिशनल सेशन जज ए.वी. हिरपरा ने नौ आरोपियों को दोषी ठहराने के बाद सजा सुनाई। अभियोजन पक्ष के अनुसार, विवाद की जड़ वन विभाग की वह कार्रवाई थी, जिसमें अधिकारियों ने सरकारी वन भूमि पर उगाई गई फसल को हटाया था — उस क्षेत्र में खेती पर प्रशासनिक प्रतिबंध था।

अभियोजन पक्ष का आरोप है कि इसके बाद वन विभाग के पाँच अधिकारियों को डेडियापाडा में वसावा के आवास पर बुलाया गया, जहाँ बहस के दौरान उन्हें धमकाया गया और बदसलूकी की गई। आरोप है कि एक अधिकारी के साथ मारपीट की गई और नष्ट हुई फसल के एवज में मुआवजे की माँग की गई। जाँचकर्ताओं के अनुसार, घटना के दौरान वसावा ने हवा में गोली भी चलाई।

एफआईआर और गिरफ्तारी

नवंबर 2023 में डेडियापाडा पुलिस स्टेशन में भारतीय दंड संहिता (IPC) की धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज की गई, जिसमें दंगा, जबरन वसूली, आपराधिक धमकी, सरकारी कर्मचारियों के कार्य में बाधा और आर्म्स एक्ट उल्लंघन के आरोप शामिल थे। शिकायत दर्ज होने के कुछ समय बाद कई आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया, किंतु चैतर वसावा कई सप्ताह तक फरार रहे और दिसंबर 2023 में उन्होंने आत्मसमर्पण किया। बाद में उन्हें जमानत मिल गई।

यह मामला दो वर्ष से अधिक समय तक अदालत में चला। इस वर्ष मई में गुजरात उच्च न्यायालय ने बचाव पक्ष के अतिरिक्त गवाहों से पूछताछ की इजाजत माँगने वाली वसावा की अर्जी खारिज कर दी थी।

वसावा की राजनीतिक पृष्ठभूमि

चैतर वसावा डेडियापाडा विधानसभा क्षेत्र से 2022 के विधानसभा चुनाव में जीतकर AAP के सबसे प्रमुख आदिवासी नेताओं में से एक बनकर उभरे थे। दक्षिण गुजरात के आदिवासी-बहुल इलाकों में पार्टी का आधार मजबूत करने में उनकी अहम भूमिका रही है। जमानत पर रहते हुए उन्होंने भरूच से AAP उम्मीदवार के रूप में 2024 का लोकसभा चुनाव भी लड़ा था।

आदिवासी भूमि और वन अधिकारों के पैरोकार के रूप में वसावा की पहचान रही है, जिसके चलते वे आदिवासी समुदायों में पार्टी की पहुँच बनाने का केंद्रीय चेहरा बने। यह मामला ऐसे समय में आया है जब AAP गुजरात में अपनी उपस्थिति को और विस्तार देने की कोशिश में है।

गुजरात में AAP पर राजनीतिक असर

सजा सुनाए जाने के बाद दोषसिद्धि के कानूनी परिणाम गुजरात में विपक्षी AAP के लिए गंभीर राजनीतिक चुनौती खड़ी कर सकते हैं। गौरतलब है कि वसावा उन आदिवासी-बहुल क्षेत्रों में पार्टी का सबसे मजबूत चेहरा रहे हैं, जहाँ पार्टी ने 2022 में अपनी सबसे उल्लेखनीय सफलता हासिल की थी। आने वाले दिनों में पार्टी की रणनीति और नेतृत्व संरचना पर इस फैसले का असर देखा जाएगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

वह काफी हद तक वसावा के व्यक्तित्व पर टिकी थी। अब जब उनका सबसे प्रमुख आदिवासी चेहरा सात साल की सजा के साथ बाहर है, तो पार्टी के पास इस शून्य को भरने का कोई तैयार विकल्प नहीं दिखता। यह मामला यह भी रेखांकित करता है कि वन भूमि विवादों में जन-प्रतिनिधियों की भूमिका को लेकर कानूनी और नैतिक रेखा कितनी महीन और संवेदनशील है।
RashtraPress
9 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

AAP विधायक चैतर वसावा को किस मामले में सजा मिली?
चैतर वसावा को 30 अक्टूबर 2023 को गुजरात के नर्मदा जिले के डेडियापाडा में वन विभाग के अधिकारियों के साथ मारपीट, जबरन वसूली और आर्म्स एक्ट उल्लंघन के मामले में दोषी ठहराया गया। राजपीपला सेशंस कोर्ट ने 23 जून 2026 को उन्हें और उनकी पत्नी समेत 9 लोगों को 7 साल की सश्रम कारावास की सजा सुनाई।
डेडियापाडा में वन अधिकारियों के साथ क्या हुआ था?
अभियोजन पक्ष के अनुसार, वन विभाग द्वारा सरकारी वन भूमि से अतिक्रमण हटाने के बाद पाँच अधिकारियों को वसावा के आवास पर बुलाया गया, जहाँ उन्हें धमकाया गया और एक अधिकारी के साथ मारपीट की गई। जाँचकर्ताओं के अनुसार नष्ट हुई फसल के लिए मुआवजे की माँग की गई और हवा में गोली भी चलाई गई।
चैतर वसावा ने कब आत्मसमर्पण किया और क्या वे जमानत पर थे?
एफआईआर दर्ज होने के बाद वसावा कई सप्ताह तक फरार रहे और दिसंबर 2023 में उन्होंने आत्मसमर्पण किया। इसके बाद उन्हें जमानत मिल गई और वे जमानत पर रहते हुए 2024 के लोकसभा चुनाव में भरूच से AAP उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़े।
इस फैसले का गुजरात में AAP पर क्या असर पड़ेगा?
वसावा गुजरात में AAP के सबसे प्रमुख आदिवासी नेता थे और दक्षिण गुजरात के आदिवासी-बहुल क्षेत्रों में पार्टी की पहुँच में उनकी केंद्रीय भूमिका थी। उनकी दोषसिद्धि से पार्टी के उन क्षेत्रों में राजनीतिक आधार कमजोर पड़ सकता है, जहाँ AAP ने 2022 विधानसभा चुनाव में उल्लेखनीय सफलता हासिल की थी।
गुजरात उच्च न्यायालय ने वसावा की अर्जी क्यों खारिज की?
इस वर्ष मई में गुजरात उच्च न्यायालय ने वसावा की उस अर्जी को खारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने बचाव पक्ष के अतिरिक्त गवाहों से पूछताछ की अनुमति माँगी थी। इस निर्णय के बाद मामला अंतिम फैसले की ओर बढ़ा और सेशंस कोर्ट ने सजा सुनाई।
राष्ट्र प्रेस
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