AAP विधायक चैतर वसावा को 7 साल की सजा, वन अधिकारियों से मारपीट और रंगदारी मामले में राजपीपला कोर्ट का फैसला
सारांश
मुख्य बातें
राजपीपला की सेशंस कोर्ट ने 23 जून 2026 को आम आदमी पार्टी (AAP) के विधायक चैतर वसावा और उनकी पत्नी शकुंतला वसावा समेत नौ दोषियों को सात-सात साल की सश्रम कारावास की सजा सुनाई। यह फैसला गुजरात के नर्मदा जिले के डेडियापाडा में 30 अक्टूबर 2023 की रात हुई उस घटना से जुड़ा है, जिसमें वन विभाग के अधिकारियों के साथ मारपीट, जबरन वसूली और आर्म्स एक्ट के तहत अपराध के आरोप लगाए गए थे।
मुख्य घटनाक्रम
एडिशनल सेशन जज ए.वी. हिरपरा ने नौ आरोपियों को दोषी ठहराने के बाद सजा सुनाई। अभियोजन पक्ष के अनुसार, विवाद की जड़ वन विभाग की वह कार्रवाई थी, जिसमें अधिकारियों ने सरकारी वन भूमि पर उगाई गई फसल को हटाया था — उस क्षेत्र में खेती पर प्रशासनिक प्रतिबंध था।
अभियोजन पक्ष का आरोप है कि इसके बाद वन विभाग के पाँच अधिकारियों को डेडियापाडा में वसावा के आवास पर बुलाया गया, जहाँ बहस के दौरान उन्हें धमकाया गया और बदसलूकी की गई। आरोप है कि एक अधिकारी के साथ मारपीट की गई और नष्ट हुई फसल के एवज में मुआवजे की माँग की गई। जाँचकर्ताओं के अनुसार, घटना के दौरान वसावा ने हवा में गोली भी चलाई।
एफआईआर और गिरफ्तारी
नवंबर 2023 में डेडियापाडा पुलिस स्टेशन में भारतीय दंड संहिता (IPC) की धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज की गई, जिसमें दंगा, जबरन वसूली, आपराधिक धमकी, सरकारी कर्मचारियों के कार्य में बाधा और आर्म्स एक्ट उल्लंघन के आरोप शामिल थे। शिकायत दर्ज होने के कुछ समय बाद कई आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया, किंतु चैतर वसावा कई सप्ताह तक फरार रहे और दिसंबर 2023 में उन्होंने आत्मसमर्पण किया। बाद में उन्हें जमानत मिल गई।
यह मामला दो वर्ष से अधिक समय तक अदालत में चला। इस वर्ष मई में गुजरात उच्च न्यायालय ने बचाव पक्ष के अतिरिक्त गवाहों से पूछताछ की इजाजत माँगने वाली वसावा की अर्जी खारिज कर दी थी।
वसावा की राजनीतिक पृष्ठभूमि
चैतर वसावा डेडियापाडा विधानसभा क्षेत्र से 2022 के विधानसभा चुनाव में जीतकर AAP के सबसे प्रमुख आदिवासी नेताओं में से एक बनकर उभरे थे। दक्षिण गुजरात के आदिवासी-बहुल इलाकों में पार्टी का आधार मजबूत करने में उनकी अहम भूमिका रही है। जमानत पर रहते हुए उन्होंने भरूच से AAP उम्मीदवार के रूप में 2024 का लोकसभा चुनाव भी लड़ा था।
आदिवासी भूमि और वन अधिकारों के पैरोकार के रूप में वसावा की पहचान रही है, जिसके चलते वे आदिवासी समुदायों में पार्टी की पहुँच बनाने का केंद्रीय चेहरा बने। यह मामला ऐसे समय में आया है जब AAP गुजरात में अपनी उपस्थिति को और विस्तार देने की कोशिश में है।
गुजरात में AAP पर राजनीतिक असर
सजा सुनाए जाने के बाद दोषसिद्धि के कानूनी परिणाम गुजरात में विपक्षी AAP के लिए गंभीर राजनीतिक चुनौती खड़ी कर सकते हैं। गौरतलब है कि वसावा उन आदिवासी-बहुल क्षेत्रों में पार्टी का सबसे मजबूत चेहरा रहे हैं, जहाँ पार्टी ने 2022 में अपनी सबसे उल्लेखनीय सफलता हासिल की थी। आने वाले दिनों में पार्टी की रणनीति और नेतृत्व संरचना पर इस फैसले का असर देखा जाएगा।