भारत-सीईएलएसी व्यापार $50 अरब के पार, जयशंकर ने न्यूयॉर्क में 30 देशों के साथ की बैठक
सारांश
मुख्य बातें
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने 22 सितंबर 2026 को न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के 81वें सत्र से इतर आयोजित भारत-सीईएलएसी विदेश मंत्रियों की बैठक (FMM) की सह-अध्यक्षता की, जहाँ यह महत्त्वपूर्ण घोषणा हुई कि भारत और लैटिन अमेरिकी एवं कैरेबियाई देशों के समूह (सीईएलएसी) के बीच द्विपक्षीय व्यापार 2025-26 में $50 अरब डॉलर के स्तर को पार कर गया है। विदेश मंत्रालय (MEA) द्वारा जारी बयान के अनुसार, इस उपलब्धि को दोनों पक्षों ने ऐतिहासिक मील का पत्थर बताया और आगे विस्तार की व्यापक संभावनाएँ रेखांकित कीं।
बैठक का स्वरूप और भागीदारी
जयशंकर ने इस बैठक की सह-अध्यक्षता उरुग्वे के विदेश मंत्री मारियो लुबेतकिन के साथ की। सेंट लूसिया के विदेश मंत्री अल्वा बैप्टिस्ट ने सीईएलएसी ट्रोइका में अपनी भूमिका के बारे में जानकारी दी। बैठक में सीईएलएसी के 33 सदस्य देशों में से 30 ने हिस्सा लिया, जिनमें 16 विदेश मंत्री और 5 उप विदेश मंत्री स्तर के प्रतिनिधि शामिल थे।
उरुग्वे, सेंट लूसिया, एंटीगुआ और बारबुडा, बारबाडोस, बोलीविया, कोस्टा रिका, क्यूबा, गुयाना, हैती, जमैका, निकारागुआ, सेंट किट्स एंड नेविस, सेंट विंसेंट एंड द ग्रेनेडाइंस, त्रिनिदाद एंड टोबैगो तथा वेनेजुएला के विदेश मंत्री इस बैठक में उपस्थित रहे।
व्यापार और साझेदारी की नई दिशा
दोनों पक्षों ने $50 अरब डॉलर के व्यापार आँकड़े को मील के पत्थर के रूप में रेखांकित करते हुए इसे और आगे बढ़ाने की प्रतिबद्धता जताई। बैठक में व्यापार, जलवायु कार्रवाई, नवीकरणीय ऊर्जा, डिजिटल परिवर्तन, स्वास्थ्य, खाद्य सुरक्षा और महत्त्वपूर्ण खनिजों सहित कई क्षेत्रों में सहयोग गहरा करने पर जोर दिया गया। इसके अलावा बुनियादी ढाँचा, अंतरिक्ष सहयोग, कृषि और मानवीय सहायता एवं आपदा राहत (HADR) भी एजेंडे में प्रमुखता से शामिल रहे।
जयशंकर ने कहा कि भारत के पास प्रौद्योगिकी, दवा, कुशल मानव संसाधन और डिजिटल क्षमताएँ हैं, जबकि लैटिन अमेरिका और कैरेबियाई क्षेत्र महत्त्वपूर्ण खनिजों, टिकाऊ ऊर्जा, कृषि और खाद्य संसाधनों के क्षेत्र में महत्त्वपूर्ण संभावनाएँ रखता है — यानी दोनों क्षेत्र एक-दूसरे की जरूरतों के अनुरूप पूरक हैं।
संस्थागत तंत्र की स्थापना पर सहमति
बैठक में दोनों पक्षों ने आपसी संपर्कों और सहयोग की नियमित समीक्षा के लिए एक संस्थागत तंत्र स्थापित करने पर काम करने की सहमति जताई। इस तंत्र का उद्देश्य भारत और सीईएलएसी देशों के बीच होने वाली गतिविधियों और समझौतों की समय-समय पर समीक्षा करना तथा सहयोग के नए अवसर तलाशना होगा। यह कदम रिश्तों को अनौपचारिक संवाद से आगे ले जाकर संस्थागत ढाँचे में ढालने की दिशा में महत्त्वपूर्ण है।
मानवीय सहायता में भारत की भूमिका की सराहना
सीईएलएसी सदस्य देशों ने 2025 और 2026 में आए भूकंपों के बाद जमैका, वेनेजुएला और कोलंबिया को भारत द्वारा दी गई तत्काल मानवीय सहायता के लिए भारत की प्रशंसा की। भारत ने इन प्रयासों को अपनी वैश्विक दक्षिण के साथ व्यापक साझेदारी का अभिन्न अंग बताया।
वैश्विक दक्षिण की धुरी के रूप में भारत का नज़रिया
भारत ने स्पष्ट किया कि वह सीईएलएसी को केवल एक क्षेत्रीय संगठन नहीं, बल्कि अधिक प्रतिनिधित्व वाली, संतुलित और समावेशी वैश्विक व्यवस्था के निर्माण में एक महत्त्वपूर्ण साझेदार के रूप में देखता है। यह दृष्टिकोण भारत की बहुध्रुवीय विश्व-व्यवस्था की वकालत से मेल खाता है, जिसे वह G20 और SCO जैसे मंचों पर भी प्रमुखता से उठाता रहा है। गौरतलब है कि भारत और सीईएलएसी के बीच विदेश मंत्री स्तर की यह बैठक UNGA सत्र के दौरान आयोजित हुई, जो दोनों पक्षों की राजनयिक प्राथमिकताओं को रेखांकित करती है।
आने वाले महीनों में संस्थागत तंत्र के खाके को अंतिम रूप दिया जाना अपेक्षित है, जो इस साझेदारी की अगली परीक्षा होगी।