गुजरात का रक्षा शक्ति स्कूल: कक्षा 6 से ही CAPF और पुलिस करियर की तैयारी, गांधीनगर में अनूठा मॉडल
सारांश
मुख्य बातें
गुजरात सरकार का रक्षा शक्ति स्कूल गांधीनगर के लावड क्षेत्र में स्थित राष्ट्रीय रक्षा विश्वविद्यालय के परिसर से एक नई मिसाल पेश कर रहा है — जहाँ कक्षा 6 से 12 तक के छात्रों को नियमित शिक्षा के साथ-साथ केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (CAPF) और राज्य पुलिस बलों में करियर के लिए तैयार किया जाता है। यह आवासीय विद्यालय राज्य सरकार द्वारा सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) मॉडल के तहत संचालित है।
स्कूल की स्थापना और उद्देश्य
रक्षा शक्ति स्कूल की स्थापना सैनिक स्कूल की अवधारणा से प्रेरित होकर की गई थी, ताकि सुरक्षा और रक्षा क्षेत्रों में जाने के इच्छुक युवाओं को बचपन से ही विशेष तैयारी का मंच मिल सके। संस्थान का मुख्य लक्ष्य छात्रों को औपचारिक शिक्षा जारी रखते हुए वर्दीधारी सेवाओं की शारीरिक और मानसिक माँगों के अनुकूल बनाना है।
गौरतलब है कि यह स्कूल उस समय एक महत्त्वपूर्ण पहल बनकर उभरा है जब CAPF और राज्य पुलिस बलों में भर्ती प्रतियोगिता हर वर्ष तीव्र होती जा रही है और ग्रामीण पृष्ठभूमि के छात्रों के लिए विशेष तैयारी के संसाधन सीमित हैं।
शैक्षणिक और प्रशिक्षण कार्यक्रम
स्कूल के कार्यक्रम में अकादमिक शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के साथ-साथ अनुशासन, शारीरिक फिटनेस, टीम वर्क और जिम्मेदारी की भावना पर विशेष बल दिया जाता है। छात्र अपनी दैनिक दिनचर्या के अंतर्गत नियमित ड्रिल अभ्यास में भाग लेते हैं।
फुटबॉल और वॉलीबॉल जैसे खेल पाठ्यक्रम का अनिवार्य हिस्सा हैं, जो छात्रों के शारीरिक और मानसिक विकास में सहायक भूमिका निभाते हैं। स्कूल की शिक्षिका रितु ने बताया कि ड्रिल और खेल छात्रों में एकाग्रता, सहनशीलता और सामूहिक कार्यशैली का संचार करते हैं।
छात्रों के अनुभव
स्कूल के छात्र आयुष परमार और स्मित कुमार पटेल ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि यहाँ का वातावरण उन्हें न केवल परीक्षाओं के लिए, बल्कि जीवन की वास्तविक चुनौतियों के लिए भी तैयार कर रहा है। दोनों छात्रों ने शारीरिक प्रशिक्षण और कक्षा शिक्षण के संतुलित समन्वय को इस संस्थान की सबसे बड़ी विशेषता बताया।
निदेशक की दृष्टि
रक्षा शक्ति स्कूल के निदेशक बी. आर. राव ने बताया कि संस्थान का पूरा फोकस छात्रों को CAPF और राज्य पुलिस बलों में चयन की दिशा में व्यापक रूप से तैयार करना है। उन्होंने कहा कि विशेष प्रशिक्षण का ढाँचा इस प्रकार डिज़ाइन किया गया है कि छात्र किशोरावस्था से ही शारीरिक और मानसिक अनुशासन को आत्मसात कर सकें।
राव के अनुसार, शिक्षा को शारीरिक फिटनेस और संरचित गतिविधियों के साथ जोड़कर, संस्थान छात्रों को पुलिस व अन्य सुरक्षा सेवाओं में करियर का प्रारंभिक आधार देता है और साथ ही उन्हें प्रतियोगी परीक्षाओं की कठोर आवश्यकताओं के अनुकूल भी बनाता है।
आगे की राह
यह स्कूल गुजरात में शिक्षा और सुरक्षा सेवाओं के बीच एक नया सेतु बनाने की कोशिश है। यह ऐसे समय में आया है जब केंद्र और राज्य सरकारें वर्दीधारी सेवाओं में युवाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए नई-नई पहलें कर रही हैं। यदि यह PPP मॉडल सफल रहा, तो अन्य राज्यों के लिए भी यह एक अनुकरणीय उदाहरण बन सकता है।