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ज्ञानेश कुमार विवाद: मनोज झा का समिक भट्टाचार्य पर तंज — 'भारत रत्न मिल जाना चाहिए'

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ज्ञानेश कुमार विवाद: मनोज झा का समिक भट्टाचार्य पर तंज — 'भारत रत्न मिल जाना चाहिए'

सारांश

राजद सांसद मनोज झा ने सीईसी ज्ञानेश कुमार विवाद को नागरिक लोकतंत्र का सवाल बताया और भाजपा नेता समिक भट्टाचार्य की पद्म भूषण माँग पर तीखा व्यंग्य कसा — 'उन्हें भारत रत्न मिल जाना चाहिए।' महाभियोग, सुप्रीम कोर्ट याचिकाएँ और एनडीए के भीतर से उठती आवाज़ें इस विवाद को नई धार दे रही हैं।

मुख्य बातें

राजद सांसद मनोज झा ने 26 सितंबर 2026 को कहा कि सीईसी ज्ञानेश कुमार विवाद केवल विपक्ष-सत्ता की लड़ाई नहीं, बल्कि नागरिक लोकतंत्र का मुद्दा है।
झा ने महाभियोग को संवैधानिक विकल्प बताया; कहा कि सर्वोच्च न्यायालय में दाखिल याचिकाओं पर अदालत स्वतः संज्ञान ले सकती है।
केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान , सांसद उपेंद्र कुशवाहा और टीडीपी की ओर से भी नियुक्ति प्रक्रिया पर सवाल उठने का उल्लेख।
समिक भट्टाचार्य की ज्ञानेश कुमार को पद्म भूषण दिए जाने की माँग पर झा का तंज — 'उन्हें भारत रत्न मिल जाना चाहिए।' झा ने सीधे आरोप लगाया — 'तुम मुझे पद्म भूषण दो, मैं तुम्हें बंगाल दूंगा।'

राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के राज्यसभा सांसद मनोज झा ने 26 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार से जुड़े विवाद पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह मामला अब केवल विपक्ष और सत्ताधारी दल के बीच की राजनीतिक लड़ाई नहीं रह गया है, बल्कि यह आम नागरिकों की लोकतांत्रिक चिंताओं से भी जुड़ा सवाल बन चुका है। उन्होंने स्पष्ट किया कि चुनावी प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर उठ रहे सवालों को केवल राजनीतिक नज़रिये से नहीं देखा जाना चाहिए।

महाभियोग और सुप्रीम कोर्ट का विकल्प

सीईसी के विरुद्ध महाभियोग लाने की विपक्ष की संभावित तैयारी पर पूछे गए सवाल के जवाब में मनोज झा ने कहा कि महाभियोग एक संवैधानिक विकल्प है और विपक्ष इस संबंध में पहले भी प्रस्ताव प्रस्तुत कर चुका है। उन्होंने बताया कि इस मामले में सर्वोच्च न्यायालय में याचिकाएँ भी दाखिल हुई हैं और अदालत उपलब्ध तथ्यों तथा साक्ष्यों के आधार पर स्वतः संज्ञान ले सकती है। झा ने जोड़ा कि अब इस विषय पर नागरिक भी अपनी रणनीति स्वयं तय करेंगे।

उनका कहना था कि चुनाव को महज एक चुनावी चक्र के तौर पर नहीं, बल्कि पूरी चुनावी प्रक्रिया की विश्वसनीयता के व्यापक संदर्भ में देखा जाना चाहिए — और यही इस विवाद को असाधारण रूप से संवेदनशील बनाता है।

एनडीए के भीतर से भी उठे सवाल

मनोज झा ने रेखांकित किया कि यह मुद्दा अब केवल विपक्षी खेमे तक सीमित नहीं है। उन्होंने केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान और सांसद उपेंद्र कुशवाहा का नाम लेते हुए कहा कि एनडीए के कुछ घटक दलों की ओर से भी इस नियुक्ति को लेकर सवाल उठाए गए हैं। उन्होंने तेलुगु देशम पार्टी (टीडीपी) की ओर से आई प्रतिक्रिया का भी उल्लेख किया।

इसके अलावा, आंध्र प्रदेश के प्रमुख विपक्षी नेता जगन मोहन रेड्डी की ओर से नियुक्ति प्रक्रिया को लेकर उठाए गए सवालों का भी झा ने जिक्र किया। उनका कहना था कि इन चिंताओं को बिना जवाब दिए खारिज करना लोकतांत्रिक मूल्यों के साथ न्याय नहीं होगा।

समिक भट्टाचार्य की माँग पर तीखा व्यंग्य

पश्चिम बंगाल भाजपा अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य द्वारा सीईसी ज्ञानेश कुमार को पद्म भूषण दिए जाने की माँग पर मनोज झा ने तीखे व्यंग्यात्मक अंदाज़ में प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि यदि समिक भट्टाचार्य के पास इतना ज्ञान और समझ है, तो उन्हें स्वयं भारत रत्न मिल जाना चाहिए।

झा ने आगे कहा कि भट्टाचार्य ने निश्चित रूप से इस विवाद से जुड़ी सभी खबरें देखी होंगी — फिर भी किसी खबर का खंडन किए बिना वे पद्म भूषण की माँग कर रहे हैं। राजद सांसद ने व्यंग्य करते हुए कहा, 'इसका मतलब वही है जो लोगों के जेहन में है — तुम मुझे पद्म भूषण दो, मैं तुम्हें बंगाल दूंगा।'

विशेषज्ञों और राजनीतिक हलकों में प्रतिक्रिया

गौरतलब है कि सीईसी की नियुक्ति प्रक्रिया को लेकर विवाद ऐसे समय में गहरा रहा है जब देश में आगामी विधानसभा चुनावों की तैयारियाँ चल रही हैं। चुनाव आयोग की स्वायत्तता और निष्पक्षता के सवाल पर राष्ट्रीय बहस तेज हो गई है। मनोज झा का यह बयान इस बहस में एक नया पहलू जोड़ता है — कि सत्ता पक्ष के भीतर से ही असंतोष के स्वर उभर रहे हैं।

आने वाले दिनों में सर्वोच्च न्यायालय में दाखिल याचिकाओं पर सुनवाई और विपक्ष की आगामी रणनीति इस विवाद की दिशा तय करेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसके भीतर एक गंभीर संवैधानिक प्रश्न दबा है — क्या चुनाव आयोग की नियुक्ति प्रक्रिया की स्वतंत्रता सुनिश्चित करने के लिए मौजूदा ढाँचा पर्याप्त है? एनडीए के घटक दलों — चिराग पासवान, उपेंद्र कुशवाहा, टीडीपी — तक से असंतोष के स्वर उठना यह बताता है कि यह विवाद अब केवल विपक्षी बयानबाज़ी नहीं रहा। समिक भट्टाचार्य की पद्म भूषण माँग मुख्यधारा की मीडिया में महज एक राजनीतिक बयान की तरह ट्रीट हो रही है, जबकि यह चुनाव आयोग की संस्थागत छवि पर सीधा असर डालती है — और इस पहलू को गहराई से टटोला जाना बाकी है।
RashtraPress
26 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मनोज झा ने ज्ञानेश कुमार विवाद पर क्या कहा?
राजद सांसद मनोज झा ने कहा कि सीईसी ज्ञानेश कुमार से जुड़ा विवाद अब केवल विपक्ष और सत्ताधारी दल के बीच की राजनीतिक लड़ाई नहीं है, बल्कि यह आम नागरिकों से भी जुड़ा लोकतांत्रिक सवाल बन चुका है। उन्होंने महाभियोग और सुप्रीम कोर्ट में दाखिल याचिकाओं का भी उल्लेख किया।
समिक भट्टाचार्य की पद्म भूषण माँग पर मनोज झा ने क्या कहा?
मनोज झा ने व्यंग्यात्मक अंदाज़ में कहा कि यदि पश्चिम बंगाल भाजपा अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य के पास इतना ज्ञान और समझ है तो उन्हें स्वयं भारत रत्न मिल जाना चाहिए। झा ने इस माँग को 'तुम मुझे पद्म भूषण दो, मैं तुम्हें बंगाल दूंगा' जैसे कथित सौदे के संकेत के रूप में देखा।
क्या एनडीए के घटक दलों ने भी सीईसी नियुक्ति पर सवाल उठाए हैं?
हाँ, मनोज झा के अनुसार केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान, सांसद उपेंद्र कुशवाहा और तेलुगु देशम पार्टी की ओर से भी इस नियुक्ति प्रक्रिया को लेकर सवाल सामने आए हैं। आंध्र प्रदेश के विपक्षी नेता जगन मोहन रेड्डी ने भी इस विषय पर आपत्ति जताई है।
सीईसी ज्ञानेश कुमार पर महाभियोग की संभावना क्या है?
मनोज झा ने महाभियोग को एक उपलब्ध संवैधानिक विकल्प बताया और कहा कि विपक्ष इससे संबंधित प्रस्ताव पहले भी प्रस्तुत कर चुका है। सुप्रीम कोर्ट में दाखिल याचिकाओं पर न्यायालय के स्वतः संज्ञान लेने की भी संभावना उन्होंने जताई, हालाँकि अंतिम निर्णय नागरिकों और न्यायपालिका पर निर्भर करेगा।
चुनाव आयोग की विश्वसनीयता पर यह विवाद क्यों महत्वपूर्ण है?
चुनाव आयोग की स्वायत्तता और निष्पक्षता भारतीय लोकतंत्र की नींव है। यह विवाद ऐसे समय में उठा है जब आगामी विधानसभा चुनावों की तैयारियाँ चल रही हैं, जिससे चुनावी प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर राष्ट्रीय बहस और तेज हो गई है। सत्ता पक्ष के भीतर से भी असंतोष उभरना इसे और संवेदनशील बनाता है।
राष्ट्र प्रेस
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