हरिद्वार अस्थि विसर्जन पर कथाव्यास संजय कृष्ण भैया के बयान से विवाद, श्री गंगा सभा ने दी मुकदमे की चेतावनी
सारांश
मुख्य बातें
कथाव्यास संजय कृष्ण भैया के हरिद्वार में अस्थि विसर्जन संस्कार को लेकर दिए गए एक बयान ने तीर्थनगरी में तीखा विवाद खड़ा कर दिया है। 8 जून को सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक वीडियो के बाद तीर्थ पुरोहितों और धार्मिक संगठनों में गहरी नाराज़गी फैल गई है, और श्री गंगा सभा ने कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी है।
वायरल वीडियो में क्या कहा कथाव्यास ने
वायरल वीडियो में संजय कृष्ण भैया कथित तौर पर यह कहते दिख रहे हैं कि हरिद्वार अस्थि विसर्जन के लिए नहीं, बल्कि चारधाम यात्रा के प्रवेश द्वार के रूप में जाना जाता है। उन्होंने यह भी दावा किया कि हरिद्वार में केवल एक घाट पर अस्थि विसर्जन होता है, जहाँ गंगा में लोहे का जाल लगाया गया है।
कथाव्यास ने आगे आरोप लगाया — जिसे धार्मिक संगठनों ने भ्रामक बताया है — कि कुछ समय बाद वहाँ एकत्रित अस्थियों को निकालकर देहरादून की किसी कप-प्लेट बनाने की फ़ैक्ट्री में बेच दिया जाता है। उन्होंने यह भी कहा कि वास्तविक अस्थि विसर्जन की परंपरा न तो हरिद्वार में है और न ही गयाजी में।
श्री गंगा सभा की कड़ी प्रतिक्रिया
श्री गंगा सभा के महामंत्री तन्मय वशिष्ठ ने इस बयान की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि यह हरिद्वार की सनातन परंपराओं, धार्मिक मान्यताओं और करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था पर सीधा प्रहार है।
वशिष्ठ ने कहा, 'अपने धार्मिक स्थलों को बढ़ावा देना गलत नहीं है, लेकिन अपने स्थान का महत्व बढ़ाने के लिए हरिद्वार जैसे महत्वपूर्ण स्थान के बारे में अभद्र, झूठी और भ्रामक बातें कहना बेहद निंदनीय है।' उन्होंने स्पष्ट किया कि इस बयान को हल्के में नहीं लिया जाएगा।
श्री गंगा सभा ने घोषणा की है कि जल्द ही संजय कृष्ण भैया के खिलाफ कानूनी कार्रवाई के लिए मुकदमा दर्ज कराया जाएगा। वशिष्ठ ने कहा कि यह सिर्फ हरिद्वार का नहीं, बल्कि देवभूमि उत्तराखंड का अपमान है।
स्थानीय और सामाजिक स्तर पर असर
इस विवाद के सामने आने के बाद तीर्थनगरी में स्थानीय स्तर पर भी प्रतिक्रिया तेज़ हो गई है। तीर्थ पुरोहितों के संगठनों ने संजय कृष्ण भैया से सार्वजनिक माफ़ी की माँग की है। सोशल मीडिया पर यह मुद्दा लगातार चर्चा में बना हुआ है और वीडियो तेज़ी से वायरल हो रहा है।
गौरतलब है कि हरिद्वार को हिंदू धर्म में सात पवित्र नगरों में से एक माना जाता है और यहाँ अस्थि विसर्जन की परंपरा सदियों पुरानी है। यह ऐसे समय में आया है जब धार्मिक पर्यटन और तीर्थस्थलों की प्रतिष्ठा को लेकर संवेदनशीलता पहले से बढ़ी हुई है।
आगे क्या होगा
श्री गंगा सभा द्वारा मुकदमा दर्ज कराने की प्रक्रिया शीघ्र शुरू होने की संभावना है। धार्मिक संगठनों का कहना है कि कथाव्यास को पहले अपने धार्मिक स्थलों के बारे में पूरी जानकारी लेनी चाहिए थी। इस मामले में प्रशासनिक प्रतिक्रिया का अभी इंतज़ार है।