8 जुलाई 2026
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हरियाणा CM नायब सिंह सैनी का ऐलान: 9 जिलों में सामुदायिक तालाब, 85% सब्सिडी से हर खेत तक पहुँचेगा पानी

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हरियाणा CM नायब सिंह सैनी का ऐलान: 9 जिलों में सामुदायिक तालाब, 85% सब्सिडी से हर खेत तक पहुँचेगा पानी

सारांश

हरियाणा के CM नायब सिंह सैनी ने 9 जिलों में 85% सब्सिडी पर सामुदायिक तालाब और सूक्ष्म सिंचाई प्रणाली लागू करने की घोषणा की। हरियाणा विजन-2047 के तहत यह पहल ट्यूबवेल पर निर्भरता खत्म कर 'पर ड्रॉप—मोर क्रॉप' के सिद्धांत को ज़मीन पर उतारने की कोशिश है।

मुख्य बातें

हरियाणा CM नायब सिंह सैनी ने 23 मई 2026 को हरियाणा विजन-2047 समीक्षा बैठक में सिंचाई सुधारों की घोषणा की।
10 एकड़ या अधिक भूमि वाले किसान समूहों के लिए सामुदायिक तालाब बनाए जाएंगे, जिन पर सरकार 85% सब्सिडी देगी।
पहले चरण में 9 जिले — भिवानी, चरखी दादरी, गुरुग्राम, महेंद्रगढ़, नूह, रेवाड़ी, हिसार, झज्जर और सिरसा — शामिल होंगे।
तालाबों पर सौर पैनल लगाए जाएंगे और नहर पाइपलाइन से जलापूर्ति होगी।
ड्रिप और स्प्रिंकलर सिंचाई से ट्यूबवेल की ज़रूरत खत्म होगी और बिजली-पानी की बचत होगी।
सिंचाई विभाग इसी वर्ष आधुनिक कृषि प्रौद्योगिकी कंपनियों को शामिल करने के लिए निविदाएँ जारी कर सकता है।

हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने शनिवार, 23 मई 2026 को चंडीगढ़ में स्पष्ट किया कि राज्य सरकार प्रत्येक खेत तक पर्याप्त सिंचाई जल पहुँचाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने हरियाणा विजन-2047 के अंतर्गत सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग की पाँच वर्षीय कार्य योजना की समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करते हुए यह घोषणाएँ कीं।

सामुदायिक तालाब और सब्सिडी योजना

मुख्यमंत्री सैनी ने निर्देश दिया कि सिंचाई विभाग किसान समूह गठित कर 10 एकड़ या उससे अधिक कृषि भूमि के लिए सामुदायिक तालाबों का निर्माण करे। इन तालाबों में नहर का पानी भरा जाएगा और सूक्ष्म सिंचाई प्रणालियों के ज़रिये खेतों तक पहुँचाया जाएगा। सरकार इन तालाबों के निर्माण पर 85 प्रतिशत सब्सिडी देगी, जिससे किसानों पर वित्तीय बोझ न्यूनतम रहेगा।

नहर पाइपलाइनों के माध्यम से इन टैंकों में जलापूर्ति की जाएगी और इन पर सौर पैनल भी स्थापित किए जाएंगे, ताकि ऊर्जा पर निर्भरता कम हो। इस व्यवस्था से किसानों को सिंचाई के लिए अलग से ट्यूबवेल लगाने की आवश्यकता नहीं रहेगी।

नौ जिलों में प्रारंभिक क्रियान्वयन

मुख्यमंत्री ने इस पहल को प्रारंभ में नौ जिलोंभिवानी, चरखी दादरी, गुरुग्राम, महेंद्रगढ़, नूह, रेवाड़ी, हिसार, झज्जर और सिरसा — में लागू करने के निर्देश दिए। इन जिलों में किसान समूह गठित किए जाएंगे और पात्र किसानों को 85 प्रतिशत सरकारी सब्सिडी के साथ सामुदायिक तालाबों का लाभ मिलेगा।

सिंचाई विभाग इसी वर्ष इन चयनित जिलों में आधुनिक कृषि प्रौद्योगिकी कंपनियों को शामिल करते हुए संपूर्ण ग्रामीण कृषि भूमि को सूक्ष्म सिंचाई प्रणालियों में परिवर्तित करने के लिए निविदाएँ जारी कर सकता है।

ड्रिप और स्प्रिंकलर से बदलेगी सिंचाई की तस्वीर

मुख्यमंत्री ने कहा कि जुड़े हुए खेतों में ड्रिप और स्प्रिंकलर सिंचाई प्रणाली लागू की जाएगी, जिससे किसान आवश्यकतानुसार फसलों की सिंचाई कर सकेंगे। खुले खेतों में पारंपरिक सिंचाई बंद की जाएगी, जिससे कम पानी में अधिक क्षेत्र की सिंचाई संभव होगी और बिजली तथा जल संसाधनों पर निर्भरता घटेगी।

यह कदम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'पर ड्रॉप—मोर क्रॉप' के सिद्धांत के अनुरूप है, जो सीमित जल संसाधनों के कुशलतम उपयोग पर बल देता है।

विजन-2047 और विकसित भारत का लक्ष्य

सैनी ने विभाग को पारंपरिक सिंचाई प्रणालियों से आगे बढ़कर भविष्योन्मुखी योजनाएँ बनाने का निर्देश दिया, जो '2047 तक विकसित भारत' के लक्ष्य को प्राप्त करने में सहायक हों। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि सीमित जल संसाधनों के बावजूद उनका अधिकतम उपयोग संभव है और विभागीय योजनाओं का प्रभाव ज़मीनी स्तर पर दिखना चाहिए।

साथ ही उन्होंने निर्देश दिया कि किसानों को खुले खेतों में सिंचाई कम करने के लिए जागरूक किया जाए और सिंचाई की लागत किसानों के लिए न्यूनतम रखी जाए। यह योजना हरियाणा के जल-संकट वाले क्षेत्रों में कृषि उत्पादकता बढ़ाने की दिशा में एक महत्त्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली परीक्षा क्रियान्वयन की होगी — राज्य में सिंचाई परियोजनाओं का इतिहास घोषणाओं और ज़मीनी नतीजों के बीच बड़े अंतर का रहा है। 85% सब्सिडी का प्रावधान किसानों को लुभाएगा, परंतु यह स्पष्ट नहीं है कि किसान समूहों के गठन और भूमि पात्रता की शर्तें छोटे एवं सीमांत किसानों को योजना से बाहर तो नहीं रखेंगी। 'पर ड्रॉप—मोर क्रॉप' का नारा वर्षों से प्रचलित है, किंतु हरियाणा में भूजल स्तर लगातार गिर रहा है — ऐसे में सूक्ष्म सिंचाई की ओर यह बदलाव ज़रूरी है, बशर्ते निविदा प्रक्रिया पारदर्शी हो और लाभ वास्तव में उन नौ जिलों के किसानों तक पहुँचे जो सबसे अधिक जल-संकट से जूझ रहे हैं।
RashtraPress
8 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

हरियाणा सरकार की नई सिंचाई योजना क्या है?
हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने 23 मई 2026 को घोषणा की कि राज्य सरकार 10 एकड़ या अधिक भूमि वाले किसान समूहों के लिए सामुदायिक तालाब बनाएगी और इन पर 85% सब्सिडी देगी। तालाबों से ड्रिप व स्प्रिंकलर प्रणाली के ज़रिये खेतों तक पानी पहुँचाया जाएगा।
इस योजना के पहले चरण में कौन-से जिले शामिल हैं?
पहले चरण में नौ जिले शामिल हैं — भिवानी, चरखी दादरी, गुरुग्राम, महेंद्रगढ़, नूह, रेवाड़ी, हिसार, झज्जर और सिरसा। इन जिलों में किसान समूह गठित किए जाएंगे और सामुदायिक तालाबों का निर्माण किया जाएगा।
किसानों को इस योजना से क्या फायदा होगा?
किसानों को ट्यूबवेल लगाने की ज़रूरत नहीं रहेगी और सिंचाई की लागत न्यूनतम होगी। तालाबों पर सौर पैनल लगने से बिजली पर निर्भरता घटेगी और ड्रिप-स्प्रिंकलर प्रणाली से कम पानी में अधिक क्षेत्र की सिंचाई संभव होगी।
यह योजना 'पर ड्रॉप—मोर क्रॉप' से कैसे जुड़ी है?
मुख्यमंत्री सैनी ने स्पष्ट किया कि यह पहल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'पर ड्रॉप—मोर क्रॉप' सिद्धांत के अनुरूप है, जो सीमित जल संसाधनों के कुशलतम उपयोग पर बल देता है। सूक्ष्म सिंचाई प्रणाली अपनाने से खुले खेतों में होने वाली पानी की बर्बादी रोकी जाएगी।
सामुदायिक तालाब योजना के लिए निविदाएँ कब जारी होंगी?
मुख्यमंत्री के निर्देशानुसार सिंचाई विभाग इसी वर्ष चयनित नौ जिलों में आधुनिक कृषि प्रौद्योगिकी कंपनियों को शामिल करते हुए निविदाएँ जारी कर सकता है। हालाँकि, निविदा जारी करने की सटीक तिथि अभी घोषित नहीं की गई है।
राष्ट्र प्रेस
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