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हजारीबाग में लापता भाई-बहन के शव बरामद: 12 वर्षीय तमन्ना और 3 वर्षीय रिजवान की हत्या की आशंका, एसआईटी गठित

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हजारीबाग में लापता भाई-बहन के शव बरामद: 12 वर्षीय तमन्ना और 3 वर्षीय रिजवान की हत्या की आशंका, एसआईटी गठित

सारांश

हजारीबाग में पाँच दिन से लापता 12 वर्षीय तमन्ना परवीन का शव सिंदूर नदी से और 3 वर्षीय भाई रिजवान का शव एक कुएं से मिला। हत्या की आशंका के बीच एसआईटी गठित, फॉरेंसिक टीमें सक्रिय। परिवार का आरोप — पुलिस ने शुरुआत में लापरवाही बरती।

मुख्य बातें

27 मई को हजारीबाग के कटकमदाग थाना क्षेत्र से 12 वर्षीय तमन्ना परवीन और 3 वर्षीय रिजवान लापता हुए थे।
1 जून को तमन्ना का शव सिंदूर नदी और रिजवान का शव सिंदूर इलाके के एक कुएं से बरामद किया गया।
पुलिस को दोनों बच्चों की हत्या की आशंका है; पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार है।
एसपी अमन कुमार के निर्देश पर एएसपी अमित कुमार के नेतृत्व में एसआईटी गठित की गई है।
पीड़ित परिवार ने आरोप लगाया कि गुमशुदगी की शिकायत के बाद पुलिस ने समय पर कार्रवाई नहीं की ।
फॉरेंसिक और तकनीकी विशेषज्ञों की टीमें साक्ष्य जुटाने में लगी हैं; कई टीमें छापेमारी कर रही हैं।

झारखंड के हजारीबाग जिले के कटकमदाग थाना क्षेत्र से 27 मई को लापता हुए सगे भाई-बहन — 12 वर्षीय तमन्ना परवीन और 3 वर्षीय रिजवान — के शव 1 जून को अलग-अलग स्थानों से बरामद किए गए। पुलिस के अनुसार, दोनों बच्चों की हत्या की आशंका है। मामले की गंभीरता को देखते हुए हजारीबाग पुलिस अधीक्षक अमन कुमार ने तत्काल विशेष जांच दल (एसआईटी) गठित करने के आदेश दिए हैं।

शव कहाँ और कैसे मिले

पुलिस के अनुसार, रविवार की देर रात तमन्ना परवीन का शव कोर्रा थाना क्षेत्र स्थित सिंदूर नदी से बरामद हुआ। इसके अगले दिन सोमवार दोपहर उसके छोटे भाई रिजवान का शव सिंदूर इलाके के एक कुएं से निकाला गया। दोनों बच्चे पाँच दिन से लापता थे और उनके परिजन तथा पुलिस लगातार उनकी तलाश में जुटे थे।

परिवार की पीड़ा और आरोप

पीड़ित परिवार मूलरूप से उत्तर प्रदेश का निवासी है और हजारीबाग में खिलौने बेचकर जीविका चलाता है। बच्चों के पिता ने गुमशुदगी की सूचना मिलते ही कटकमदाग थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। परिवार का आरोप है कि शिकायत के बावजूद पुलिस ने शुरुआत में मामले को पर्याप्त गंभीरता से नहीं लिया। परिजनों का कहना है कि यदि समय पर तत्परता से कार्रवाई होती, तो दोनों बच्चे आज जीवित होते। शव मिलने के बाद परिवार गहरे सदमे में है और पूरे इलाके में आक्रोश व्याप्त है।

एसआईटी गठन और जांच की स्थिति

पुलिस अधीक्षक अमन कुमार के निर्देश पर अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक अमित कुमार के नेतृत्व में एसआईटी का गठन किया गया है। फॉरेंसिक और तकनीकी विशेषज्ञों की टीमें भी जांच में लगाई गई हैं। एएसपी अमित कुमार ने बताया कि पुलिस सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए जांच कर रही है और घटना में शामिल लोगों की पहचान व गिरफ्तारी के लिए कई टीमें लगातार छापेमारी कर रही हैं।

आगे की जांच

पुलिस अभी पोस्टमार्टम रिपोर्ट, तकनीकी साक्ष्यों और घटनास्थलों से मिले सुरागों के आधार पर बच्चों की मृत्यु के कारण और इस घटना के पीछे की साजिश का खुलासा करने में जुटी है। अधिकारियों के अनुसार, जल्द ही मामले में सफलता मिलने की उम्मीद है। यह घटना झारखंड में बच्चों की सुरक्षा और पुलिस की प्रतिक्रिया की गति पर एक बार फिर सवाल खड़े करती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

एक ऐसे पैटर्न की ओर इशारा करता है जो हाशिये पर रहने वाले, प्रवासी और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के मामलों में बार-बार सामने आता है। एसआईटी गठन एक आवश्यक कदम है, लेकिन असली जवाबदेही तब होगी जब यह जांच यह भी स्पष्ट करे कि पाँच दिन की देरी में क्या चूक हुई।
RashtraPress
19 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

हजारीबाग में लापता भाई-बहन कौन थे और उनके शव कहाँ मिले?
लापता बच्चे 12 वर्षीय तमन्ना परवीन और उसका 3 वर्षीय भाई रिजवान थे, जो 27 मई को हजारीबाग के कटकमदाग थाना क्षेत्र से गायब हुए थे। तमन्ना का शव सिंदूर नदी से और रिजवान का शव सिंदूर इलाके के एक कुएं से 1 जून को बरामद किया गया।
क्या दोनों बच्चों की हत्या हुई है?
पुलिस को हत्या की आशंका है, हालांकि मृत्यु का आधिकारिक कारण अभी पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर निर्धारित किया जाएगा। फॉरेंसिक टीमें घटनास्थलों से साक्ष्य एकत्र कर रही हैं।
हजारीबाग में एसआईटी का गठन किसने और क्यों किया?
हजारीबाग पुलिस अधीक्षक अमन कुमार ने मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए तत्काल एसआईटी गठित करने का आदेश दिया। अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक अमित कुमार के नेतृत्व में यह दल सभी पहलुओं की जांच कर रहा है और आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए छापेमारी जारी है।
पीड़ित परिवार ने पुलिस पर क्या आरोप लगाए हैं?
परिवार का आरोप है कि कटकमदाग थाने में गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराने के बावजूद पुलिस ने शुरुआत में मामले को गंभीरता से नहीं लिया। परिजनों का कहना है कि समय पर कार्रवाई होती तो दोनों बच्चे बचाए जा सकते थे।
पीड़ित परिवार कहाँ का है और हजारीबाग में क्या करता था?
पीड़ित परिवार मूलरूप से उत्तर प्रदेश का निवासी है। वे हजारीबाग में खिलौने बेचकर अपनी जीविका चलाते थे। बच्चों की मौत के बाद परिवार गहरे सदमे में है।
राष्ट्र प्रेस
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