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IIT गुवाहाटी के 33वें स्थापना दिवस पर CM हिमंत सरमा बोले — जिंदगी रेस नहीं, सफलता की कोई तय समय-सीमा नहीं

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IIT गुवाहाटी के 33वें स्थापना दिवस पर CM हिमंत सरमा बोले — जिंदगी रेस नहीं, सफलता की कोई तय समय-सीमा नहीं

सारांश

IIT गुवाहाटी के 33वें स्थापना दिवस पर CM हिमंत बिस्वा सरमा का संदेश सीधा था — सफलता की कोई एक रफ्तार नहीं होती। दूसरों से तुलना छोड़ो, अपनी यात्रा पर भरोसा रखो। बढ़ते मानसिक दबाव के दौर में यह बात और भी मायने रखती है।

मुख्य बातें

असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने 1 सितंबर को IIT गुवाहाटी के 33वें स्थापना दिवस समारोह को संबोधित किया।
उन्होंने कहा कि 'जिंदगी कोई रेस नहीं है' — सफलता की कोई निर्धारित गति या समय-सीमा नहीं होती।
छात्रों को दूसरों से तुलना के दबाव से मुक्त होकर अपनी व्यक्तिगत यात्रा पर ध्यान देने की सलाह दी।
IIT गुवाहाटी को पूर्वोत्तर भारत के शिक्षा और इनोवेशन इकोसिस्टम का प्रमुख केंद्र बताया।
धैर्य, लगन और निरंतर सीखना — इन्हें सरमा ने युवाओं के लिए सार्थक योगदान देने की बुनियादी शर्त बताया।

असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने मंगलवार, 1 सितंबर को भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) गुवाहाटी के 33वें स्थापना दिवस समारोह में छात्रों और युवा प्रोफेशनल्स को संबोधित करते हुए कहा कि सफलता की कोई एक निर्धारित गति नहीं होती। उन्होंने जोर देकर कहा कि जीवन को एक प्रतिस्पर्धी दौड़ की तरह नहीं देखा जाना चाहिए जिसमें हर किसी से एक ही रफ्तार से आगे बढ़ने की अपेक्षा की जाए।

मुख्य संदेश: धैर्य और आत्मविश्वास

सरमा ने हल्के-फुल्के अंदाज में छात्रों से कहा, 'जिंदगी कोई रेस नहीं है। अगर आप तेज नहीं दौड़ते हैं, तो भी कोई बात नहीं। आप 'टूटे हुए अंडे' नहीं कहलाएंगे।' यह टिप्पणी उन्होंने महत्वाकांक्षा और लगन के व्यापक संदेश को सहज तरीके से समझाने के लिए की। मुख्यमंत्री ने छात्रों को प्रोत्साहित किया कि वे अपनी व्यक्तिगत यात्रा पर ध्यान दें और दूसरों से तुलना के दबाव में न आएं।

IIT गुवाहाटी की 33 साल की यात्रा

मुख्यमंत्री ने IIT गुवाहाटी को असम और पूर्वोत्तर भारत के शिक्षा व इनोवेशन इकोसिस्टम का एक महत्वपूर्ण स्तंभ बताया। उन्होंने कहा कि संस्थान की 33 वर्षों की यात्रा यह दर्शाती है कि एक ऐसा वातावरण बनाना कितना ज़रूरी है जहाँ युवा दिमाग स्वतंत्र रूप से प्रयोग कर सकें, नवाचार कर सकें और नए विचारों को आकार दे सकें। उन्होंने संस्थान को इनोवेशन, शोध और तकनीकी प्रगति का केंद्र बताते हुए बधाई दी।

युवाओं के लिए भविष्य की तैयारी

सरमा ने कहा कि IIT गुवाहाटी जैसे संस्थानों की तेज़ी से बदलती दुनिया में युवा भारतीयों को तैयार करने में अहम भूमिका है, जहाँ ज्ञान, इनोवेशन और अनुकूलन क्षमता की माँग लगातार बढ़ रही है। उन्होंने छात्रों से आग्रह किया कि वे संस्थान में बिताए समय का पूरा उपयोग करें और अपनी क्षमताओं पर भरोसा रखते हुए अपने लक्ष्यों की दिशा में आगे बढ़ें।

आम जनता और युवाओं पर असर

गौरतलब है कि परीक्षा परिणामों और करियर के दबाव के बीच युवाओं में मानसिक तनाव की बढ़ती समस्या के संदर्भ में सरमा का यह संबोधन विशेष रूप से प्रासंगिक है। उनकी यह बात — कि धैर्य, लगन और निरंतर सीखते रहना सफलता के असली आधार हैं — उन छात्रों के लिए एक सकारात्मक दृष्टिकोण प्रस्तुत करती है जो तुलनात्मक दबाव में हैं। यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में छात्रों में प्रतिस्पर्धा का दबाव चिंता का विषय बना हुआ है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि क्या नीतिगत स्तर पर भी यह दर्शन परिलक्षित होता है — जहाँ परीक्षा प्रणाली और रोज़गार बाज़ार अभी भी एकरेखीय सफलता को ही पुरस्कृत करते हैं। IIT जैसे संस्थानों में प्रवेश की प्रतिस्पर्धा और उसके बाद के प्लेसमेंट दबाव को देखते हुए, 'धीरे चलो' का संदेश तब तक अधूरा है जब तक संरचनात्मक बदलाव न हो। फिर भी, एक राज्य के मुख्यमंत्री का इस मंच से यह कहना कि तुलनात्मक दबाव ग़लत है — यह सार्वजनिक विमर्श में एक ज़रूरी स्वर है।
RashtraPress
2 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

CM हिमंत बिस्वा सरमा ने IIT गुवाहाटी में क्या कहा?
मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने 1 सितंबर को IIT गुवाहाटी के 33वें स्थापना दिवस पर कहा कि जिंदगी कोई रेस नहीं है और सफलता की कोई तय गति नहीं होती। उन्होंने छात्रों को दूसरों से तुलना छोड़कर अपनी व्यक्तिगत यात्रा पर ध्यान देने की सलाह दी।
IIT गुवाहाटी का 33वाँ स्थापना दिवस कब मनाया गया?
IIT गुवाहाटी का 33वाँ स्थापना दिवस 1 सितंबर को मनाया गया, जिसमें असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। इस अवसर पर संस्थान ने अपने तीन दशकों से अधिक के शैक्षणिक और तकनीकी योगदान का जश्न मनाया।
सरमा ने युवाओं को सफलता के बारे में क्या सलाह दी?
सरमा ने कहा कि सफलता को केवल इस बात से नहीं मापा जाना चाहिए कि कोई कितनी जल्दी किसी मंजिल तक पहुँचता है। उन्होंने धैर्य, लगन और निरंतर सीखते रहने को युवाओं के लिए सबसे ज़रूरी गुण बताया।
IIT गुवाहाटी की असम में क्या भूमिका है?
मुख्यमंत्री सरमा ने IIT गुवाहाटी को असम और पूर्वोत्तर भारत के शिक्षा व इनोवेशन इकोसिस्टम का एक प्रमुख केंद्र बताया। उन्होंने कहा कि यह संस्थान युवाओं को तेज़ी से बदलती दुनिया के लिए तैयार करने में अहम भूमिका निभाता है।
क्या सरमा का यह संदेश छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ा है?
हालाँकि सरमा ने सीधे मानसिक स्वास्थ्य का उल्लेख नहीं किया, लेकिन उनका संदेश — कि दूसरों से तुलना न करें और अपनी गति से आगे बढ़ें — परीक्षा और करियर के बढ़ते दबाव के संदर्भ में प्रासंगिक माना जा रहा है। उन्होंने कहा कि धीरे चलने वाले भी 'टूटे हुए अंडे' नहीं होते।
राष्ट्र प्रेस
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