31 जुलाई 2026
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भारत में सोशल मीडिया से पब्लिक डिप्लोमेसी: अमेरिका की चीन-विरोधी सूचना रणनीति में एशिया सबसे आगे

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भारत में सोशल मीडिया से पब्लिक डिप्लोमेसी: अमेरिका की चीन-विरोधी सूचना रणनीति में एशिया सबसे आगे

सारांश

अमेरिका की USAGM की नामित प्रमुख सारा रोजर्स ने सीनेट में साफ किया — भारत और जापान अब अमेरिकी सूचना-युद्ध की अग्रिम पंक्ति में हैं। चीन के बढ़ते प्रचार अभियान का मुकाबला करने के लिए वाशिंगटन पारंपरिक रेडियो-टीवी से हटकर शॉर्ट-फॉर्म वीडियो, पॉडकास्ट और डायस्पोरा चैट की ओर रुख कर रहा है।

मुख्य बातें

USAGM की नामित प्रमुख सारा रोजर्स ने 31 जुलाई को सीनेट फॉरेन रिलेशंस कमेटी में कहा कि एशिया अमेरिकी पब्लिक डिप्लोमेसी की सर्वोच्च प्राथमिकता है।
भारत और जापान को उन प्रमुख देशों के रूप में चिह्नित किया गया जहाँ एक्स (ट्विटर) के ज़रिये अमेरिकी कंटेंट अभियान चलाया जा रहा है।
रणनीति में शॉर्ट-फॉर्म वीडियो , पॉडकास्ट और डायस्पोरा ग्रुप चैट जैसे डिजिटल माध्यमों को पारंपरिक प्रसारण के साथ जोड़ने की योजना है।
प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में एशिया , मध्य पूर्व , ईरान , अफगानिस्तान और क्यूबा शामिल हैं।
रोजर्स ने एजेंसी को स्थिर करने, नेतृत्व मजबूत करने और पहुँच व दर्शक संख्या मापने की क्षमता बहाल करने को पहली प्राथमिकता बताया।

अमेरिका की यूएस एजेंसी फॉर ग्लोबल मीडिया (USAGM) की राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नामित प्रमुख सारा रोजर्स ने 31 जुलाई को सीनेट फॉरेन रिलेशंस कमेटी को बताया कि भारत और जापान अमेरिका की नई पब्लिक डिप्लोमेसी रणनीति के केंद्र में हैं, जिसे चीन और अन्य अधिनायकवादी सरकारों के बढ़ते सूचना अभियानों के जवाब में तैयार किया जा रहा है। रोजर्स ने स्पष्ट किया कि एशिया एजेंसी की सर्वोच्च प्राथमिकता होगी।

एशिया पर केंद्रित नई रणनीति

सुनवाई के दौरान रोजर्स ने कहा, 'एशिया पर हमारा फोकस सबसे ज्यादा है।' उनकी एजेंसी वॉयस ऑफ अमेरिका (VOA), रेडियो फ्री यूरोप/रेडियो लिबर्टी (RFE/RL), रेडियो फ्री एशिया (RFA) और अन्य अमेरिका-वित्त पोषित अंतरराष्ट्रीय मीडिया संस्थाओं की देखरेख करती है। रणनीतिक प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में एशिया, मध्य पूर्व, ईरान, अफगानिस्तान और क्यूबा को चिह्नित किया गया है।

भारत और सोशल मीडिया की भूमिका

रोजर्स ने सीनेटरों को बताया कि उन्होंने पब्लिक डिप्लोमेसी के तहत जापान और भारत से संबंधित बड़ी मात्रा में कंटेंट एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट किया है। उन्होंने कहा, 'मैंने जापान और कुछ भारत के बारे में भी बहुत सारा कंटेंट ट्वीट किया है। ये उन देशों में से हैं, जहाँ ट्विटर सबसे ज्यादा लोकप्रिय है।' यह स्वीकृति इस बात का संकेत है कि वाशिंगटन भारत को एक महत्वपूर्ण सूचना-युद्ध के मोर्चे के रूप में देख रहा है।

पारंपरिक प्रसारण से डिजिटल की ओर बदलाव

रोजर्स ने ज़ोर दिया कि USAGM को केवल रेडियो और टेलीविजन पर निर्भर रहने के बजाय आधुनिक मीडिया उपभोग की आदतों के अनुरूप ढलना होगा। उन्होंने कहा, 'अगर पुष्टि हो जाती है तो USAGM शॉर्ट-फॉर्म वीडियो, डायस्पोरा ग्रुप चैट, पॉडकास्ट और जुड़ाव के अन्य समयानुकूल तरीकों में विस्तार करेगा, जबकि जहाँ पारंपरिक प्रसारण प्रभावी है, वहाँ उसे जारी रखेगा।' उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिकी अंतरराष्ट्रीय प्रसारण का ध्यान उन देशों पर होना चाहिए जहाँ स्वतंत्र सूचना तक पहुँच अभी भी सीमित है।

एजेंसी को स्थिर करने की प्राथमिकता

रोजर्स ने अपनी तात्कालिक प्राथमिकताओं को रेखांकित करते हुए कहा, 'मेरी पहली प्राथमिकता एजेंसी को स्थिर करना, इसके नेतृत्व को मजबूत करना, इसके संचालन को आधुनिक बनाना और अनुसंधान क्षमता को फिर से ठीक करना होगा, ताकि हम वास्तव में पहुँच और दर्शक संख्या को माप सकें।' यह टिप्पणी USAGM के भीतर हालिया परिचालन अनिश्चितताओं की पृष्ठभूमि में आई है।

चीन के सूचना अभियान का बड़ा संदर्भ

यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब अमेरिका व्यापार, तकनीक और रक्षा के साथ-साथ सूचना के मोर्चे पर भी चीन से मुकाबले को लेकर अधिक आक्रामक रुख अपना रहा है। आलोचकों का कहना है कि चीन के राज्य-समर्थित मीडिया का विस्तार — विशेष रूप से दक्षिण और दक्षिण-पूर्व एशिया में — पिछले एक दशक में तेज़ हुआ है, जिससे अमेरिकी प्रति-आख्यान की ज़रूरत और अधिक महसूस की जा रही है। गौरतलब है कि भारत दुनिया के सबसे बड़े सोशल मीडिया बाज़ारों में से एक है, जो इसे इस सूचना-युद्ध में एक रणनीतिक रूप से अहम देश बनाता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो नई दिल्ली की 'रणनीतिक स्वायत्तता' की नीति से टकरा सकता है। यह भी उल्लेखनीय है कि USAGM स्वयं हालिया बजट कटौती और नेतृत्व संकट से जूझ रही है — ऐसे में चीन के सुव्यवस्थित राज्य-मीडिया तंत्र से मुकाबले का दावा कितना व्यावहारिक है, यह देखना होगा।
RashtraPress
31 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

USAGM क्या है और भारत से इसका क्या संबंध है?
USAGM (यूएस एजेंसी फॉर ग्लोबल मीडिया) अमेरिका की वह सरकारी एजेंसी है जो VOA, RFA और RFE/RL जैसे अंतरराष्ट्रीय मीडिया संस्थानों की देखरेख करती है। नामित प्रमुख सारा रोजर्स ने भारत को उन प्रमुख देशों में शामिल किया है जहाँ एजेंसी सोशल मीडिया के ज़रिये अपनी पहुँच बढ़ाना चाहती है।
अमेरिका भारत में सोशल मीडिया का उपयोग पब्लिक डिप्लोमेसी के लिए क्यों कर रहा है?
रोजर्स के अनुसार, भारत उन देशों में है जहाँ एक्स (ट्विटर) सबसे अधिक लोकप्रिय है, जिससे यह अमेरिकी संदेश पहुँचाने के लिए एक प्रभावी मंच बनता है। यह रणनीति चीन के बढ़ते सूचना अभियानों के जवाब में तैयार की गई है।
अमेरिका की नई पब्लिक डिप्लोमेसी रणनीति में क्या बदलाव है?
नई रणनीति पारंपरिक रेडियो और टेलीविजन प्रसारण से आगे बढ़कर शॉर्ट-फॉर्म वीडियो, पॉडकास्ट और डायस्पोरा ग्रुप चैट जैसे डिजिटल माध्यमों को अपनाने पर केंद्रित है। एजेंसी उन देशों को प्राथमिकता देगी जहाँ स्वतंत्र सूचना तक पहुँच सीमित है।
इस रणनीति में चीन की क्या भूमिका है?
रोजर्स ने स्पष्ट किया कि USAGM की पुनर्संरचना का मुख्य कारण चीन और अन्य अधिनायकवादी सरकारों के बढ़ते सूचना अभियानों का मुकाबला करना है। अमेरिका अब व्यापार और रक्षा के साथ-साथ सूचना के क्षेत्र में भी चीन से प्रतिस्पर्धा को गंभीरता से ले रहा है।
सारा रोजर्स की USAGM के लिए तत्काल प्राथमिकताएँ क्या हैं?
रोजर्स ने एजेंसी को स्थिर करना, नेतृत्व को मजबूत करना, संचालन को आधुनिक बनाना और पहुँच व दर्शक संख्या मापने की अनुसंधान क्षमता बहाल करना — इन चार बिंदुओं को अपनी पहली प्राथमिकता बताया। उनकी नियुक्ति की पुष्टि अभी सीनेट से होनी बाकी है।
राष्ट्र प्रेस
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