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तीन साल में 1,21,805 एमएसएमई बंद: शिवसेना (यूबीटी) ने 'सामना' में केंद्र सरकार पर साधा निशाना

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तीन साल में 1,21,805 एमएसएमई बंद: शिवसेना (यूबीटी) ने 'सामना' में केंद्र सरकार पर साधा निशाना

सारांश

लोकसभा के सरकारी आँकड़ों के हवाले से शिवसेना (यूबीटी) का दावा — तीन साल में 1,21,805 एमएसएमई बंद, महाराष्ट्र सबसे बुरी तरह प्रभावित। ₹35 लाख करोड़ के ऋण के बावजूद उद्यमी परिचालन लागत और प्रशासनिक अड़चनों से जूझ रहे हैं।

मुख्य बातें

शिवसेना (यूबीटी) ने 29 जुलाई 2026 को 'सामना' संपादकीय में केंद्र पर एमएसएमई क्षेत्र की अनदेखी का आरोप लगाया।
2024-2026 के बीच देशभर में 1,21,805 एमएसएमई इकाइयाँ बंद हुईं — आँकड़े लोकसभा में पेश सरकारी डेटा पर आधारित।
महाराष्ट्र में 28,764 , तमिलनाडु में 14,176 , गुजरात में 11,150 और राजस्थान में 9,881 इकाइयाँ बंद।
पिछले 10 वर्षों में एमएसएमई को ₹35 लाख करोड़ से अधिक ऋण दिए गए, फिर भी संकट जारी।
पार्टी के अनुसार बीमार उद्योगों के पुनर्वास की कोई लक्षित योजना नहीं, जिससे बैंकों के NPA और बेरोज़गारी बढ़ रही है।

शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) ने 29 जुलाई 2026 को अपने मुखपत्र 'सामना' के संपादकीय में केंद्र सरकार पर देश के सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (एमएसएमई) क्षेत्र की घोर अनदेखी करने का आरोप लगाया। पार्टी ने लोकसभा में प्रस्तुत सरकारी आँकड़ों का हवाला देते हुए दावा किया कि 2024 से 2026 के बीच देशभर में 1,21,805 एमएसएमई इकाइयाँ स्थायी रूप से बंद हो गईं, जिसके चलते लाखों युवाओं की आजीविका छिन गई।

मुख्य घटनाक्रम

संपादकीय में पार्टी ने तीखे शब्दों में लिखा: 'पिछले 12 वर्षों से देश में पुराने उद्योग बंद हो रहे हैं और नए उद्योग शुरू करने की बातें हो रही हैं। जिस शासन में युवाओं के हाथों में रोज़गार देने के बजाय उनके मन में धार्मिक उन्माद भरा जाए, वहाँ इससे अलग परिणाम की उम्मीद कैसे की जा सकती है?' यह बयान सरकार की आर्थिक प्राथमिकताओं पर सीधा प्रहार है।

राज्यवार आँकड़े: महाराष्ट्र सबसे अधिक प्रभावित

आँकड़ों के अनुसार, महाराष्ट्र में सर्वाधिक 28,764 एमएसएमई इकाइयाँ बंद हुईं। इसके बाद तमिलनाडु में 14,176, गुजरात में 11,150 और राजस्थान में 9,881 इकाइयों ने अपना कामकाज समेट लिया। शिवसेना (यूबीटी) ने कहा कि ये आँकड़े बड़े पैमाने पर विदेशी निवेश और रोज़गार सृजन के सरकारी दावों से मेल नहीं खाते।

₹35 लाख करोड़ के ऋण के बावजूद संकट

संपादकीय में यह भी दावा किया गया कि पिछले 10 वर्षों में सरकार ने स्टार्टअप और एमएसएमई क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए ₹35 लाख करोड़ से अधिक के ऋण उपलब्ध कराए। बावजूद इसके, उद्यमियों को बढ़ती परिचालन लागत, बाज़ार की चुनौतियों और प्रशासनिक अड़चनों का सामना करना पड़ रहा है। पार्टी के अनुसार, यह विरोधाभास नीतिगत क्रियान्वयन की खामियों को उजागर करता है।

दावोस बनाम घरेलू उद्योग

संपादकीय में आरोप लगाया गया कि राज्य सरकारों के नेता और केंद्रीय मंत्री दावोस में आयोजित वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम जैसे अंतरराष्ट्रीय मंचों पर नए निवेश और उद्योग लाने की कोशिश करते हैं, लेकिन पहले से संकट झेल रहे घरेलू उद्योगों को दोबारा खड़ा करने के लिए ठोस कदम नहीं उठाए जाते। यह ऐसे समय में आया है जब महाराष्ट्र में पिछले तीन वर्षों में 75 लाख से अधिक नए उद्यम पंजीकृत हुए, फिर भी 28 हज़ार से ज़्यादा एमएसएमई इकाइयाँ बंद हो गईं।

आम जनता और अर्थव्यवस्था पर असर

गौरतलब है कि एमएसएमई क्षेत्र को भारतीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ माना जाता है — यह कृषि के बाद देश में सबसे अधिक रोज़गार देने वाला क्षेत्र है और निर्यात में भी इसकी महत्वपूर्ण भूमिका है। शिवसेना (यूबीटी) का कहना है कि बीमार उद्योगों के पुनर्वास के लिए कोई लक्षित योजना न होने से बैंकों के नॉन-परफॉर्मिंग एसेट्स (NPA) बढ़ रहे हैं और हज़ारों युवाओं की नौकरियाँ अचानक समाप्त हो रही हैं। पार्टी ने माँग की है कि सरकार इन उद्योगों को सहारा देने, दोबारा खड़ा करने और पुनर्जीवित करने के लिए प्रभावी कदम उठाए।

संपादकीय दृष्टिकोण

क्योंकि इन्हें नकारना मुश्किल है। लेकिन असली सवाल यह है कि ₹35 लाख करोड़ के ऋण के बावजूद इकाइयाँ क्यों बंद हो रही हैं — क्या समस्या पूँजी की है या नीतिगत क्रियान्वयन की? महाराष्ट्र में एक साथ 75 लाख नए उद्यमों का पंजीकरण और 28 हज़ार इकाइयों का बंद होना यह भी दर्शाता है कि पंजीकरण और टिकाऊ व्यापार संचालन के बीच की खाई को नीति-निर्माताओं ने अब तक नहीं पाटा। बिना पुनर्वास ढाँचे के, यह चक्र — ऋण, बंदी, NPA — दोहराता रहेगा।
RashtraPress
29 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

तीन साल में कितनी एमएसएमई इकाइयाँ बंद हुईं?
लोकसभा में पेश सरकारी आँकड़ों के अनुसार, 2024 से 2026 के बीच देशभर में 1,21,805 एमएसएमई इकाइयाँ बंद हो गईं। शिवसेना (यूबीटी) ने इन्हीं आँकड़ों का हवाला देते हुए केंद्र सरकार की नीतियों पर सवाल उठाए हैं।
कौन से राज्य सबसे अधिक प्रभावित हुए?
महाराष्ट्र में सर्वाधिक 28,764 एमएसएमई बंद हुईं। इसके बाद तमिलनाडु (14,176), गुजरात (11,150) और राजस्थान (9,881) का स्थान है। ये चारों राज्य मिलकर कुल बंदी का लगभग आधा हिस्सा हैं।
शिवसेना (यूबीटी) ने सामना में क्या माँग की?
पार्टी ने माँग की है कि सरकार बंद हो रही एमएसएमई इकाइयों के पुनर्वास के लिए एक लक्षित योजना बनाए। संपादकीय में कहा गया कि केवल नए निवेश आकर्षित करना काफी नहीं, बल्कि मौजूदा उद्योगों को बचाना भी उतना ही ज़रूरी है।
₹35 लाख करोड़ के ऋण के बावजूद एमएसएमई क्यों बंद हो रहे हैं?
शिवसेना (यूबीटी) के अनुसार, बढ़ती परिचालन लागत, बाज़ार की चुनौतियाँ और प्रशासनिक अड़चनें उद्यमियों के लिए मुख्य बाधाएँ हैं। पार्टी का कहना है कि केवल ऋण उपलब्ध कराना पर्याप्त नहीं — इन बुनियादी समस्याओं के समाधान के बिना संकट जारी रहेगा।
एमएसएमई क्षेत्र का भारतीय अर्थव्यवस्था में क्या महत्व है?
एमएसएमई क्षेत्र को भारतीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ माना जाता है। यह कृषि के बाद देश में सबसे अधिक रोज़गार देने वाला क्षेत्र है और देश के कुल निर्यात में भी इसकी बड़ी भागीदारी है। इसीलिए इस क्षेत्र में बड़े पैमाने पर बंदी का सीधा असर युवा बेरोज़गारी और बैंकों के NPA पर पड़ता है।
राष्ट्र प्रेस
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