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मनुस्मृति विवाद: शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने राहुल गांधी को दी चेतावनी, बोले — 'भ्रामक प्रचार बंद करें'

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मनुस्मृति विवाद: शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने राहुल गांधी को दी चेतावनी, बोले — 'भ्रामक प्रचार बंद करें'

सारांश

पुणे के 'छात्रों की गूंज' कार्यक्रम में राहुल गांधी के मनुस्मृति-संबंधी बयान पर ज्योतिर्मठ के शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने तीखी प्रतिक्रिया दी है — श्लोक की व्याख्या को गलत बताया, BJP-मनुस्मृति जोड़ को निराधार कहा और चेतावनी दी कि भ्रामक बयानबाजी जारी रही तो सनातन समाज का विरोध और मुखर होगा।

मुख्य बातें

शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने 25 अगस्त को राहुल गांधी के मनुस्मृति पर दिए पुणे बयान की कड़ी आलोचना की।
शंकराचार्य ने कहा कि 'पिता रक्षति कौमारे, भर्ता रक्षति यौवने' श्लोक स्त्री की परतन्त्रता नहीं, बल्कि उसकी सुरक्षा और सम्मान का विधान करता है।
उन्होंने BJP को मनुस्मृति से जोड़ने की राहुल गांधी की धारणा को 'पूर्णतः निराधार' बताया।
शंकराचार्य ने याद दिलाया कि राहुल गांधी को पूर्व में 'हिन्दू धर्म से बहिष्कृत' घोषित किया जा चुका है।
चेतावनी दी कि भ्रामक और अपमानजनक टिप्पणियाँ जारी रहीं तो सनातन समाज का विरोध और तेज़ होगा।

ज्योतिर्मठ के शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने 25 अगस्त को लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के उस बयान पर कड़ी आपत्ति जताई है, जो उन्होंने पुणे में आयोजित 'छात्रों की गूंज' कार्यक्रम में मनुस्मृति को लेकर दिया था। शंकराचार्य ने राहुल गांधी से हिंदू धर्मशास्त्रों के बारे में असत्य प्रचार और भ्रम फैलाना बंद करने की माँग की है।

शंकराचार्य का मुख्य आरोप

शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद की ओर से जारी बयान में कहा गया कि राहुल गांधी द्वारा मनुस्मृति और सनातन सांस्कृतिक विचारों पर दिया गया बयान उनकी 'घोर अज्ञानता, सतही समझ और सनातन परम्परा के प्रति दुर्भावनापूर्ण मानसिकता' को उजागर करता है। उन्होंने कहा कि 'राजनीतिक लाभ पाने के लिए प्राचीन धर्मशास्त्रों के श्लोकों को सन्दर्भ से काटकर पेश करना केवल हमारी सांस्कृतिक विरासत का अपमान ही नहीं, बल्कि समाज को भ्रमित करने का कुत्सित प्रयास है।'

श्लोक की व्याख्या पर विवाद

शंकराचार्य ने उस संस्कृत श्लोक — 'पिता रक्षति कौमारे, भर्ता रक्षति यौवने' — की व्याख्या को लेकर राहुल गांधी से असहमति जताई, जिसे उन्होंने कार्यक्रम में उद्धृत किया था। शंकराचार्य के अनुसार यह श्लोक स्त्री की परतन्त्रता का नहीं, बल्कि परिवार और समाज द्वारा उसकी सुरक्षा, सम्मान और भरण-पोषण के दायित्व का विधान करता है। उन्होंने कहा कि संस्कृत व्याकरण की दृष्टि से 'रक्षति' का अर्थ सुरक्षा है, न कि नियंत्रण।

सनातन परम्परा में नारी का स्थान

शंकराचार्य ने तर्क दिया कि भारतीय वांग्मय में नारी को केवल आश्रित नहीं, बल्कि 'शक्ति' और महानिर्मात्री माना गया है। उन्होंने ऋग्वेद की मंत्रद्रष्टा ऋषिकाओं — गार्गी, मैत्रेयी, लोपामुद्रा — का उल्लेख करते हुए कहा कि सनातन संस्कृति अधिकार-केन्द्रित संघर्ष के स्थान पर परस्पर पूरकता और सर्वोच्च आदर पर आधारित है।

भारतीय जनता पार्टी और मनुस्मृति पर टिप्पणी

शंकराचार्य ने यह भी कहा कि राहुल गांधी की यह धारणा कि भारतीय जनता पार्टी (BJP) मनुस्मृति की समर्थक पार्टी है, 'पूर्णतः निराधार और सत्य से परे' है। उन्होंने स्पष्ट किया कि स्वतंत्र भारत का शासन केवल भारत के संविधान से होता है और किसी राजनीतिक दल को जबरन मनुस्मृति से जोड़ना 'मनगढ़ंत असत्य' है।

चेतावनी और आगे की राह

शंकराचार्य ने याद दिलाया कि राहुल गांधी के लगातार मनुस्मृति-विरोधी बयानों के कारण उन्हें पूर्व में 'हिन्दू धर्म से बहिष्कृत' घोषित किया जा चुका है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि राहुल गांधी और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) बिना पूर्ण शास्त्रीय अध्ययन के सनातन धर्मग्रन्थों पर भ्रामक और अपमानजनक टिप्पणियाँ करते रहे, तो 'देश का प्रबुद्ध और सनातनप्रेमी समाज उनकी इस वैचारिक अपरिपक्वता का तीव्र और मुखर विरोध जारी रखेगा।' यह विवाद ऐसे समय में उभरा है जब हिंदू धर्मग्रंथों की राजनीतिक व्याख्या को लेकर देश में बहस तेज़ हो रही है।

संपादकीय दृष्टिकोण

दोनों ही अपने-अपने समर्थक वर्ग को संबोधित करते हैं, लेकिन इस बहस में शास्त्रीय संवाद कम और राजनीतिक ध्रुवीकरण अधिक दिखता है। मुख्यधारा की कवरेज प्रायः यह चूक जाती है कि मनुस्मृति को लेकर स्वयं हिंदू विद्वानों में भी गहरे मतभेद हैं। असली प्रश्न यह है कि क्या सार्वजनिक मंचों पर धर्मग्रंथों की चर्चा शैक्षणिक गहराई से हो रही है या केवल वोट-बैंक की राजनीति के लिए।
RashtraPress
25 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने राहुल गांधी की आलोचना क्यों की?
ज्योतिर्मठ के शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने राहुल गांधी के पुणे में 'छात्रों की गूंज' कार्यक्रम में मनुस्मृति पर दिए बयान को 'घोर अज्ञानता' और 'भ्रामक प्रचार' बताया। उनका कहना है कि धर्मशास्त्रों के श्लोकों को संदर्भ से काटकर पेश करना सांस्कृतिक विरासत का अपमान है।
मनुस्मृति के उस श्लोक का सही अर्थ क्या है जिसे राहुल गांधी ने उद्धृत किया?
शंकराचार्य के अनुसार 'पिता रक्षति कौमारे, भर्ता रक्षति यौवने' श्लोक स्त्री की परतन्त्रता का नहीं, बल्कि परिवार और समाज द्वारा उसकी सुरक्षा और सम्मान के दायित्व का विधान करता है। उन्होंने कहा कि संस्कृत में 'रक्षति' का अर्थ सुरक्षा करना है, न कि नियंत्रण।
क्या BJP मनुस्मृति की समर्थक पार्टी है?
शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने इस धारणा को 'पूर्णतः निराधार और सत्य से परे' बताया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि स्वतंत्र भारत का शासन केवल भारत के संविधान से होता है, और किसी दल को जबरन मनुस्मृति से जोड़ना 'मनगढ़ंत असत्य' है।
राहुल गांधी को पहले 'हिन्दू धर्म से बहिष्कृत' कब और क्यों घोषित किया गया था?
शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने अपने बयान में उल्लेख किया कि राहुल गांधी के संसद से लेकर सार्वजनिक मंचों तक मनुस्मृति और धर्मशास्त्रों पर बार-बार 'असत्य व भ्रामक प्रचार' के कारण उन्हें पूर्व में 'हिन्दू धर्म से बहिष्कृत' घोषित किया गया था। इस बयान में उन्होंने इसी चेतावनी को दोहराया है।
इस विवाद का आम जनता और राजनीति पर क्या असर होगा?
शंकराचार्य ने चेतावनी दी है कि यदि राहुल गांधी और कांग्रेस सनातन धर्मग्रन्थों पर भ्रामक टिप्पणियाँ जारी रखते हैं, तो सनातन समाज का विरोध और मुखर होगा। यह विवाद धार्मिक पहचान और राजनीतिक विमर्श के बीच बढ़ते टकराव को दर्शाता है, जो आगामी चुनावी माहौल में और तीव्र हो सकता है।
राष्ट्र प्रेस
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