आईआईएम उदयपुर का द्विभाषी बीबीए प्रोग्राम लॉन्च, पीयूष गोयल बोले — प्रतिभा परिस्थितियों की कैदी नहीं
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय प्रबंध संस्थान (IIM) उदयपुर ने 6 जुलाई 2026 को अपने बहुप्रतीक्षित बैचलर ऑफ बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन (BBA) प्रोग्राम का वर्चुअल शुभारंभ किया — एक ऐसा कार्यक्रम जो हिंदी और अंग्रेजी दोनों माध्यमों में ऑनलाइन उपलब्ध होगा। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल मुख्य अतिथि के रूप में इस ऐतिहासिक अवसर पर जुड़े और इस पहल को तकनीक, द्विभाषी शिक्षा और व्यापक पहुँच का 'अनूठा संगम' बताया।
शुभारंभ समारोह का घटनाक्रम
BBA प्रोग्राम के अध्यक्ष प्रो. कुणाल कमल कुमार ने समारोह की शुरुआत की, जबकि संस्थान के निदेशक प्रो. अशोक बनर्जी ने स्वागत उद्बोधन दिया। विद्यार्थी, अभिभावक, संकाय सदस्य, पूर्व विद्यार्थी और IIM उदयपुर का व्यापक समुदाय ऑनलाइन माध्यम से इस अवसर का हिस्सा बना।
उल्लेखनीय यह रहा कि मुंबई में भारी वर्षा के कारण उड़ान में विलंब के बावजूद पीयूष गोयल ने विद्यार्थियों को प्रतीक्षा में नहीं रखा और विमान से उतरते ही अपनी कार से लाइव जुड़कर समारोह को संबोधित किया।
द्विभाषी और डिजिटल मॉडल की अहमियत
मंत्री गोयल ने कहा कि ऑनलाइन और द्विभाषी स्वरूप प्रबंधन शिक्षा को सरल भाषा में बड़े वर्ग तक पहुँचाने में सक्षम है। उन्होंने लगभग 100 करोड़ इंटरनेट उपयोगकर्ताओं वाले भारत में डिजिटल माध्यम को गाँव और शहर के बीच शिक्षा का सेतु बताया।
गोयल ने यह भी कहा कि आईआईएम की कक्षाएं अब स्क्रीन पर उपलब्ध होंगी — चाहे विद्यार्थी भीलवाड़ा की छोटी दुकान से जुड़ रहा हो या बस्तर के पूर्व नक्सल प्रभावित क्षेत्र से। उन्होंने ऑनलाइन डिलीवरी के साथ ऑफलाइन परीक्षाओं को जवाबदेह मूल्यांकन मॉडल करार दिया।
यह ऐसे समय में आया है जब राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) भी तकनीक के माध्यम से गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के व्यापक प्रसार पर बल दे रही है। गोयल ने कहा कि कोविड-19 के बाद एडटेक अब महज सहायक साधन नहीं, बल्कि शिक्षा की अनिवार्यता बन चुका है।
मंत्री के चार प्रमुख सुझाव
कार्यक्रम को और सुदृढ़ बनाने के लिए पीयूष गोयल ने चार सुझाव सामने रखे:
पहला — संकाय यात्राएं और विद्यार्थी संवाद-सत्र; दूसरा — सॉफ्ट स्किल, टीमवर्क और तकनीकी समझ का विकास; तीसरा — कारखानों, बंदरगाहों और औद्योगिक समूहों की यात्राओं के ज़रिए अनुभवात्मक अध्ययन; और चौथा — वैश्विक श्रेष्ठ पद्धतियाँ, ऑडियो-विजुअल साधन, NEP के तहत क्रेडिट ट्रांसफर, संस्थागत साझेदारी और चौथे वर्ष में शोध-इंटर्नशिप।
IIM उदयपुर की उद्यमिता विरासत
गोयल ने 2011 से IIM उदयपुर की यात्रा की सराहना की और एक युवा बिजनेस स्कूल के रूप में उसकी पहचान को रेखांकित किया। उन्होंने बॉम्बे शेविंग कंपनी और करीइट जैसे उद्यमों का उल्लेख करते हुए संस्थान के उद्यमिता योगदान की प्रशंसा की। 6 जुलाई के महत्व का उल्लेख करते हुए उन्होंने डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी को भी याद किया और मातृभाषा में शिक्षा तथा राष्ट्र निर्माण में विश्वविद्यालयों की भूमिका को इस कार्यक्रम से जोड़ा।
संस्थान की प्रतिक्रिया और आगे की राह
प्रो. अशोक बनर्जी ने मंत्री के सुझावों का स्वागत करते हुए कहा कि संस्थान इन पर काम करेगा और वर्ष के अंत तक प्रगति साझा करेगा। प्रो. कुणाल कमल कुमार ने स्पष्ट किया कि यह कार्यक्रम शैक्षणिक मानकों से समझौता नहीं करता, बल्कि पहुँच की बाधाओं को दूर करता है — यह संकाय-नेतृत्व, संरचित अध्ययन, नियमित सहभागिता, क्विज़, परीक्षाओं और सतत सुधार पर आधारित है।
गोयल ने प्रथम बैच को 'इतिहास रचने वाला' बताते हुए विद्यार्थियों से अमृत काल में विकसित भारत के निर्माण के लिए तैयार होने का आह्वान किया — और कहा कि विनिर्माण, नवाचार और मुक्त व्यापार के अवसर युवाओं के लिए नए रास्ते खोलेंगे।