15 सितंबर 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

आईआईटी दिल्ली स्टार्टअप का 'जियो ट्विन' लॉन्च: बाढ़, प्रदूषण और भूधंसाव पर रखेगा नज़र

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
आईआईटी दिल्ली स्टार्टअप का 'जियो ट्विन' लॉन्च: बाढ़, प्रदूषण और भूधंसाव पर रखेगा नज़र

सारांश

आईआईटी दिल्ली के स्टार्टअप अर्थसेंस लैब्स का 'जियो ट्विन' सिर्फ एक नक्शा नहीं — यह शहर की जीवंत, चार-आयामी प्रतिकृति है। बाढ़ से लेकर भूधंसाव तक, यह प्लेटफार्म डेटा को AI से जोड़कर भारतीय शहरी प्रशासन को पूर्वानुमान-आधारित निर्णयों की दिशा में ले जाने का दावा करता है।

मुख्य बातें

आईआईटी दिल्ली के स्टार्टअप अर्थसेंस लैब्स ने 15 सितंबर 2026 को फोर-डी डिजिटल ट्विन प्लेटफार्म 'जियो ट्विन' लॉन्च किया।
यह प्लेटफार्म बाढ़, भूधंसाव, भूस्खलन, यातायात और प्रदूषण की वास्तविक समय में निगरानी व पूर्वानुमान करेगा।
हवाई लेजर मानचित्रण, ड्रोन, उपग्रह चित्र, InSAR और IoT सेंसर से डेटा एकत्र कर Geospatial AI से संसाधित किया जाएगा।
शहर अपने डेटा का पूरा स्वामित्व बनाए रख सकते हैं — प्लेटफार्म स्थानीय स्तर पर भी संचालित किया जा सकता है।
परिणाम खुले API के जरिए मौजूदा शहरी नियंत्रण प्रणालियों से जोड़े जा सकते हैं।
मणबेंद्र सहारिया ( आईआईटी दिल्ली एसोसिएट प्रोफेसर) और डॉ.
निर्देश कुमार शर्मा (CEO) इस पहल का नेतृत्व कर रहे हैं।

आईआईटी दिल्ली के स्टार्टअप अर्थसेंस लैब्स ने 15 सितंबर 2026 को एक अत्याधुनिक फोर-डी जियो-स्पेशियल डिजिटल ट्विन प्लेटफार्म 'जियो ट्विन' पेश किया है, जो भारतीय शहरों में बाढ़, भूधंसाव, यातायात, मौसम और वायु प्रदूषण जैसी जटिल चुनौतियों की वास्तविक समय में निगरानी और पूर्वानुमान करने में सक्षम होगा। यह प्लेटफार्म शहर की लगातार बदलती स्थिति को एक एकीकृत डिजिटल मॉडल में प्रस्तुत करेगा और नीति-निर्माताओं को समय रहते सटीक फैसले लेने में मदद करेगा।

जियो ट्विन क्या है और यह कैसे काम करता है

एक डिजिटल ट्विन किसी भौतिक शहर की आभासी प्रतिकृति होती है। जियो ट्विन इस अवधारणा को चार आयामों — लंबाई, चौड़ाई, ऊँचाई और समय — में ले जाता है। यह हवाई लेजर मानचित्रण, ड्रोन सर्वेक्षण, उपग्रह चित्र और इंटरफेरोमेट्रिक सिंथेटिक एपर्चर रडार (InSAR) जैसी तकनीकों से जुटाए गए आंकड़ों को एक साथ संसाधित करता है।

इसके अतिरिक्त, मौसम व वर्षा के पूर्वानुमान, यातायात डेटा और जमीन पर स्थापित इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT) सेंसरों से प्राप्त जानकारी को भी इस मॉडल में निरंतर अपडेट किया जाता है। परिणाम अर्थसेंस के अपने प्लेटफार्म पर देखे जा सकते हैं और खुले एपीआई (API) के जरिए शहरों की मौजूदा योजना व नियंत्रण प्रणालियों से सीधे जोड़े जा सकते हैं।

शहरों की मौजूदा ज़रूरत और तकनीकी अंतर

भारतीय नगर निकाय पहले से ही बड़े पैमाने पर आंकड़े एकत्र कर रहे हैं — कई शहर ड्रोन से मानचित्रण कर रहे हैं, वर्षा मापक यंत्र और जलस्तर सेंसर भी तैनात किए गए हैं। आईआईटी दिल्ली के अनुसार, समस्या यह है कि जलवायु परिवर्तन की तीव्र गति के अनुरूप इन आंकड़ों का एकीकृत और बुद्धिमान उपयोग करने वाली तकनीक अभी तक उतनी तेज़ी से विकसित नहीं हुई थी।

जियो ट्विन का उद्देश्य इसी अंतर को पाटना है — विभिन्न स्रोतों से प्राप्त आंकड़ों को भू-स्थानिक कृत्रिम बुद्धिमत्ता (Geospatial AI) और वैज्ञानिक मॉडलिंग के साथ जोड़कर एक समग्र दृष्टिकोण प्रस्तुत करना।

संस्थापकों की क्या है सोच

अर्थसेंस के सह-संस्थापक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉ. निर्देश कुमार शर्मा ने कहा, 'शहर हर दिन बदलता है। जियो ट्विन की सोच भू-स्थानिक कृत्रिम बुद्धिमत्ता और वैज्ञानिक मॉडलिंग को रोज़मर्रा के शहरी प्रशासन का हिस्सा बनाना है।' इस प्लेटफार्म में लेजर-आधारित मानचित्रण डेटा का प्रसंस्करण, शहरी बाढ़ का पूर्वानुमान, भूस्खलन मानचित्रण, जमीन धंसाव की निगरानी, यातायात और प्रदूषण की निगरानी जैसे मॉड्यूल एक साथ उपलब्ध कराए गए हैं।

अर्थसेंस के सह-संस्थापक एवं आईआईटी दिल्ली के एसोसिएट प्रोफेसर प्रो. मणबेंद्र सहारिया ने कहा कि भारतीय शहरों को बेहतर निर्णयों के लिए अपने बुनियादी ढाँचे, पर्यावरण और जोखिमों की एक समन्वित तस्वीर की ज़रूरत है। उन्होंने ज़ोर दिया कि अलग-अलग मॉडल के बजाय एक ऐसे एकीकृत तंत्र की आवश्यकता है जो शहरी चुनौतियों के डेटा और वैज्ञानिक ज्ञान को एक साथ ला सके।

डेटा संप्रभुता: भारतीय शहरों के लिए अहम पहलू

जियो ट्विन की एक विशिष्ट खूबी इसका संप्रभु आर्किटेक्चर है — शहर अपने आंकड़ों का पूरा स्वामित्व अपने पास बनाए रख सकते हैं। यह प्लेटफार्म स्थानीय स्तर पर भी संचालित किया जा सकता है, जिससे आंकड़े भारत की सीमाओं के भीतर और संबंधित संस्थानों के नियंत्रण में बने रहते हैं। प्रो. सहारिया के अनुसार, यह विशेषता उन शहरी निकायों के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण है जो डेटा सुरक्षा और डिजिटल स्वायत्तता को प्राथमिकता देते हैं।

आगे की दिशा

गौरतलब है कि स्मार्ट सिटी मिशन के तहत भारत के दर्जनों शहरों में डिजिटल शासन की बुनियाद पहले से तैयार की जा रही है। ऐसे में जियो ट्विन जैसे एकीकृत प्लेटफार्म इस बुनियाद को वास्तविक निर्णय-समर्थन तंत्र में बदलने की क्षमता रखते हैं। आने वाले समय में यह देखना होगा कि नगर निकाय इस तकनीक को किस पैमाने पर अपनाते हैं और क्या यह ज़मीनी शहरी प्रशासन में मापनीय बदलाव ला पाती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली कसौटी सरकारी खरीद और ज़मीनी तैनाती की होगी — जहाँ भारत के स्मार्ट सिटी मिशन के कई नवाचार अटके रहे हैं। डेटा संप्रभुता का दावा नीति की दृष्टि से महत्वपूर्ण है, लेकिन यह तभी सार्थक होगा जब नगर निकाय इसे बड़े पैमाने पर अपनाएँ। यह देखना होगा कि क्या अर्थसेंस लैब्स विश्वविद्यालय-स्टार्टअप से उस संस्थागत भागीदार तक की यात्रा तय कर पाती है जिसे शहरी प्रशासक वास्तव में रोज़ाना इस्तेमाल करते हैं।
RashtraPress
15 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जियो ट्विन क्या है और इसे किसने बनाया है?
जियो ट्विन आईआईटी दिल्ली के स्टार्टअप अर्थसेंस लैब्स द्वारा विकसित एक फोर-डी जियो-स्पेशियल डिजिटल ट्विन प्लेटफार्म है। यह किसी शहर की आभासी प्रतिकृति बनाता है जो वास्तविक समय में अपडेट होती रहती है और भविष्य की शहरी चुनौतियों का पूर्वानुमान लगाने में मदद करती है।
जियो ट्विन किन समस्याओं का समाधान करेगा?
यह प्लेटफार्म शहरी बाढ़, भूधंसाव, भूस्खलन, यातायात जाम और वायु प्रदूषण जैसी चुनौतियों की निगरानी और पूर्वानुमान करेगा। इसके जरिए नगर निकाय समय रहते निर्णय ले सकते हैं और आपदा प्रबंधन को प्रभावी बना सकते हैं।
जियो ट्विन डेटा किन स्रोतों से जुटाता है?
यह हवाई लेजर मानचित्रण, ड्रोन सर्वेक्षण, उपग्रह चित्र, InSAR तकनीक, मौसम पूर्वानुमान, यातायात डेटा और जमीन पर लगे IoT सेंसर से डेटा एकत्र करता है। इन सभी स्रोतों को Geospatial AI और वैज्ञानिक मॉडलिंग से जोड़कर एकीकृत चित्र तैयार किया जाता है।
डेटा संप्रभुता के मामले में जियो ट्विन अलग कैसे है?
जियो ट्विन का आर्किटेक्चर इस प्रकार बनाया गया है कि शहर अपने डेटा का पूरा स्वामित्व बनाए रख सकते हैं और इसे भारत की सीमाओं के भीतर स्थानीय सर्वर पर भी संचालित किया जा सकता है। इससे शहरी निकायों की डिजिटल स्वायत्तता सुनिश्चित होती है।
क्या यह प्लेटफार्म मौजूदा शहरी प्रणालियों से जुड़ सकता है?
हाँ, जियो ट्विन के परिणाम खुले API के माध्यम से शहरों की मौजूदा योजना और नियंत्रण प्रणालियों से सीधे जोड़े जा सकते हैं। इससे नगर निकायों को अपना पूरा बुनियादी ढाँचा बदले बिना इस तकनीक का लाभ उठाने की सुविधा मिलती है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 4 महीने पहले
  2. 8 महीने पहले
  3. 8 महीने पहले
  4. 8 महीने पहले
  5. 1 साल पहले
  6. 1 साल पहले
  7. 1 साल पहले
  8. 1 साल पहले