इमरान मसूद का केंद्र पर हमला: 12 साल में पेट्रोल 48% महंगा, ऊर्जा में आत्मनिर्भरता अभी दूर
सारांश
मुख्य बातें
सहारनपुर से कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने 26 मई 2026 को केंद्र सरकार के 12 वर्षों के कार्यकाल पर तीखा हमला बोला। उन्होंने महंगाई, बेरोज़गारी, शिक्षा, ऊर्जा क्षेत्र और विदेश नीति को लेकर सरकार की नीतियों पर सवाल उठाए और कहा कि 'आत्मनिर्भर भारत' का नारा देने वाली सरकार अब तक ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता हासिल नहीं कर सकी है।
महंगाई और ईंधन की कीमतें
मसूद ने दावा किया कि पिछले 12 वर्षों में पेट्रोल की कीमतों में 48.2 प्रतिशत और डीजल की कीमतों में लगभग 67.9 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। उन्होंने वित्त मंत्री के उस बयान का भी हवाला दिया जिसमें कहा गया था कि सरकार ₹1 लाख करोड़ का घाटा उठा रही है।
उनका कहना था कि इन आँकड़ों से स्पष्ट है कि आम आदमी पर ईंधन की बढ़ती लागत का सीधा बोझ पड़ा है, जो समग्र महंगाई को और बढ़ाता है।
बेरोज़गारी और शिक्षा का संकट
कांग्रेस सांसद ने कहा कि देश में बेरोज़गारी चरम पर है और युवा अपने भविष्य को लेकर चिंतित हैं। उनके अनुसार शिक्षा इतनी महंगी हो गई है कि गरीब परिवारों के बच्चों की पहुँच उच्च शिक्षा तक सीमित होती जा रही है।
उन्होंने कहा कि युवा पीढ़ी नौकरी और शिक्षा — दोनों मोर्चों पर संघर्ष कर रही है, जो देश के दीर्घकालिक विकास के लिए चिंताजनक संकेत है।
आत्मनिर्भर भारत पर सवाल
मसूद ने 'आत्मनिर्भर भारत' अभियान को लेकर सीधा सवाल उठाया। उनका तर्क था कि जब सबसे बुनियादी क्षेत्र — ऊर्जा — में देश अभी भी आत्मनिर्भर नहीं है, तो यह नारा अधूरा रह जाता है। गौरतलब है कि भारत अपनी कुल ऊर्जा ज़रूरतों का एक बड़ा हिस्सा आयात पर निर्भर रहकर पूरा करता है।
विदेश नीति और ऐतिहासिक तुलना
भारत की वैश्विक साख के सवाल पर मसूद ने ऐतिहासिक उदाहरण दिए। उन्होंने दावा किया कि जब पूर्व प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू अमेरिका गए थे, तब वहाँ के राष्ट्रपति स्वयं विमान के दरवाज़े तक उन्हें रिसीव करने पहुँचे थे।
उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी का भी उल्लेख किया। मसूद के अनुसार 1971 के बांग्लादेश मुक्ति संग्राम के दौरान इंदिरा गांधी और अमेरिकी राष्ट्रपति रिचर्ड निक्सन के बीच तीखा मतभेद हुआ था — जिसकी जड़ में शीत युद्ध के दौरान अमेरिका की पाकिस्तान-परस्त नीति थी। मसूद का दावा है कि इंदिरा गांधी बिना मुलाकात किए लौट आई थीं और उन्होंने निक्सन का फोन तक नहीं लिया था। उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का भी उल्लेख करते हुए कहा कि इन नेताओं ने देश को जो वैश्विक पहचान दिलाई थी, वह कमज़ोर हुई है।
आगे क्या
मसूद के ये बयान ऐसे समय में आए हैं जब विपक्ष केंद्र सरकार की आर्थिक नीतियों पर लगातार दबाव बना रहा है। आलोचकों का कहना है कि ऊर्जा आत्मनिर्भरता, रोज़गार सृजन और शिक्षा की पहुँच जैसे मुद्दे आगामी चुनावी विमर्श में केंद्रीय भूमिका निभा सकते हैं।