भारत वैश्विक इलेक्ट्रॉनिक्स चैंपियन बनेगा: नथिंग सीईओ कार्ल पेई का दावा, CMF को स्वतंत्र भारतीय कंपनी बनाने की योजना
सारांश
मुख्य बातें
नथिंग (Nothing) के मुख्य कार्यकारी अधिकारी कार्ल पेई ने सोमवार, 21 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में कहा कि भारत वैश्विक उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स चैंपियन तैयार करने की दिशा में तेज़ी से आगे बढ़ रहा है और देश अब एक निर्णायक मोड़ पर खड़ा है। उन्होंने भारत के विशाल स्मार्टफोन बाज़ार, युवा जनसंख्या, सुदृढ़ विनिर्माण आधार और तकनीकी प्रतिभा के बड़े भंडार को इस संभावना का आधार बताया।
भारत की तुलना जापान, दक्षिण कोरिया और चीन से
कार्ल पेई ने ऐतिहासिक संदर्भ देते हुए कहा कि जापान, दक्षिण कोरिया और चीन ने पहले बड़े पैमाने पर उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण विकसित किया और उसके बाद अपने वैश्विक ब्रांड खड़े किए। उनके अनुसार भारत भी अब उसी तरह के निर्णायक बिंदु पर पहुँच चुका है।
उन्होंने कहा कि भारत आज दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा स्मार्टफोन विनिर्माण केंद्र है, यहाँ युवा प्रतिभाओं की कोई कमी नहीं है और सॉफ्टवेयर विशेषज्ञता भी मज़बूत है। यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक टेक कंपनियाँ चीन से आपूर्ति श्रृंखला विविधीकरण के लिए भारत की ओर रुख कर रही हैं।
असली चुनौती: विनिर्माण नहीं, R&D
कार्ल पेई के अनुसार भारत के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती विनिर्माण नहीं, बल्कि स्वदेशी अनुसंधान एवं विकास (R&D) क्षमताओं को मज़बूत करना है। उन्होंने कहा, 'मैन्युफैक्चरिंग पहला चरण है, दूसरा चरण R&D है।'
उनका मत है कि किसी कंपनी की दीर्घकालिक सफलता इस बात पर निर्भर करती है कि वह अपने उत्पादों को स्वयं विकसित और निरंतर बेहतर बनाने की क्षमता रखती है या नहीं। केवल विनिर्माण साझेदारों पर निर्भर कंपनियाँ टिकाऊ प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त हासिल नहीं कर पातीं — यह उनका स्पष्ट मत है।
CMF को भारतीय इकाई बनाने की योजना
कार्ल पेई ने बताया कि नथिंग अपने CMF ब्रांड को एक स्वतंत्र भारतीय कंपनी के रूप में विकसित करने की योजना बना रही है। यह नई इकाई भारत-केंद्रित होगी, जिसमें भारतीय स्वामित्व बहुमत में रहेगा, और इसकी अपनी टीम तथा R&D क्षमताएँ भारत में ही विकसित की जाएंगी। नथिंग इस कंपनी में साझेदार और शेयरधारक के रूप में बनी रहेगी।
गौरतलब है कि CMF by Nothing एक किफायती उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स सब-ब्रांड है जो पहले से ही भारतीय बाज़ार में सक्रिय है। इस कदम को नथिंग की 'भारत-प्रथम' रणनीति का सबसे ठोस संकेत माना जा रहा है।
चीन के अनुभव से सबक
कार्ल पेई ने चीन में 8 वर्षों तक काम करने के अपने अनुभव का ज़िक्र करते हुए कहा कि उन्होंने प्रत्यक्ष देखा है कि किस प्रकार एक विनिर्माण इकोसिस्टम समय के साथ वैश्विक उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स शक्ति में बदल सकता है। उनके अनुसार भारत भी यही राह अपना सकता है, बशर्ते कंपनियाँ केवल असेंबली पर नहीं, बल्कि इंजीनियरिंग, डिज़ाइन और उत्पाद विकास पर भी निवेश करें।
उन्होंने यह भी याद दिलाया कि वर्ष 2015 के आसपास भारतीय स्मार्टफोन बाज़ार में घरेलू ब्रांडों की हिस्सेदारी लगभग आधी थी और एक भारतीय कंपनी कुछ समय के लिए सैमसंग को पीछे छोड़कर देश की सर्वाधिक बिकने वाली स्मार्टफोन ब्रांड भी बनी थी।
आगे की राह
कार्ल पेई ने कहा, 'भारत वैश्विक उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स कंपनियाँ ज़रूर बनाएगा। सवाल केवल यह है कि कब और कौन उन्हें बनाएगा।' यह बयान ऐसे समय में आया है जब केंद्र सरकार PLI योजनाओं के ज़रिए इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण को बढ़ावा दे रही है और Apple, Samsung जैसी कंपनियाँ भारत में उत्पादन विस्तार कर रही हैं। CMF की स्वतंत्र भारतीय इकाई का खाका कब अमल में आएगा, यह आने वाले महीनों में स्पष्ट होगा।