21 सितंबर 2026
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भारत वैश्विक इलेक्ट्रॉनिक्स चैंपियन बनेगा: नथिंग सीईओ कार्ल पेई का दावा, CMF को स्वतंत्र भारतीय कंपनी बनाने की योजना

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भारत वैश्विक इलेक्ट्रॉनिक्स चैंपियन बनेगा: नथिंग सीईओ कार्ल पेई का दावा, CMF को स्वतंत्र भारतीय कंपनी बनाने की योजना

सारांश

नथिंग के सीईओ कार्ल पेई ने भारत को जापान और चीन की राह पर वैश्विक इलेक्ट्रॉनिक्स महाशक्ति बनते देखा है — और महज़ भविष्यवाणी नहीं, दांव भी लगाया है। CMF को बहुमत भारतीय स्वामित्व वाली स्वतंत्र इकाई बनाने की योजना इस विश्वास की सबसे ठोस अभिव्यक्ति है।

मुख्य बातें

नथिंग सीईओ कार्ल पेई ने 21 सितंबर 2026 को कहा कि भारत वैश्विक उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स चैंपियन बनाने के निर्णायक मोड़ पर है।
भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा स्मार्टफोन विनिर्माण केंद्र है, लेकिन असली चुनौती स्वदेशी R&D क्षमता विकसित करना है।
नथिंग अपने CMF ब्रांड को एक स्वतंत्र भारतीय कंपनी के रूप में विकसित करेगी, जिसमें भारतीय स्वामित्व बहुमत में होगा।
कार्ल पेई के अनुसार, 'मैन्युफैक्चरिंग पहला चरण है, दूसरा चरण R&D है।' 2015 के आसपास भारतीय ब्रांडों की बाज़ार हिस्सेदारी लगभग आधी थी; एक घरेलू ब्रांड ने सैमसंग को भी पीछे छोड़ा था।

नथिंग (Nothing) के मुख्य कार्यकारी अधिकारी कार्ल पेई ने सोमवार, 21 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में कहा कि भारत वैश्विक उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स चैंपियन तैयार करने की दिशा में तेज़ी से आगे बढ़ रहा है और देश अब एक निर्णायक मोड़ पर खड़ा है। उन्होंने भारत के विशाल स्मार्टफोन बाज़ार, युवा जनसंख्या, सुदृढ़ विनिर्माण आधार और तकनीकी प्रतिभा के बड़े भंडार को इस संभावना का आधार बताया।

भारत की तुलना जापान, दक्षिण कोरिया और चीन से

कार्ल पेई ने ऐतिहासिक संदर्भ देते हुए कहा कि जापान, दक्षिण कोरिया और चीन ने पहले बड़े पैमाने पर उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण विकसित किया और उसके बाद अपने वैश्विक ब्रांड खड़े किए। उनके अनुसार भारत भी अब उसी तरह के निर्णायक बिंदु पर पहुँच चुका है।

उन्होंने कहा कि भारत आज दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा स्मार्टफोन विनिर्माण केंद्र है, यहाँ युवा प्रतिभाओं की कोई कमी नहीं है और सॉफ्टवेयर विशेषज्ञता भी मज़बूत है। यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक टेक कंपनियाँ चीन से आपूर्ति श्रृंखला विविधीकरण के लिए भारत की ओर रुख कर रही हैं।

असली चुनौती: विनिर्माण नहीं, R&D

कार्ल पेई के अनुसार भारत के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती विनिर्माण नहीं, बल्कि स्वदेशी अनुसंधान एवं विकास (R&D) क्षमताओं को मज़बूत करना है। उन्होंने कहा, 'मैन्युफैक्चरिंग पहला चरण है, दूसरा चरण R&D है।'

उनका मत है कि किसी कंपनी की दीर्घकालिक सफलता इस बात पर निर्भर करती है कि वह अपने उत्पादों को स्वयं विकसित और निरंतर बेहतर बनाने की क्षमता रखती है या नहीं। केवल विनिर्माण साझेदारों पर निर्भर कंपनियाँ टिकाऊ प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त हासिल नहीं कर पातीं — यह उनका स्पष्ट मत है।

CMF को भारतीय इकाई बनाने की योजना

कार्ल पेई ने बताया कि नथिंग अपने CMF ब्रांड को एक स्वतंत्र भारतीय कंपनी के रूप में विकसित करने की योजना बना रही है। यह नई इकाई भारत-केंद्रित होगी, जिसमें भारतीय स्वामित्व बहुमत में रहेगा, और इसकी अपनी टीम तथा R&D क्षमताएँ भारत में ही विकसित की जाएंगी। नथिंग इस कंपनी में साझेदार और शेयरधारक के रूप में बनी रहेगी।

गौरतलब है कि CMF by Nothing एक किफायती उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स सब-ब्रांड है जो पहले से ही भारतीय बाज़ार में सक्रिय है। इस कदम को नथिंग की 'भारत-प्रथम' रणनीति का सबसे ठोस संकेत माना जा रहा है।

चीन के अनुभव से सबक

कार्ल पेई ने चीन में 8 वर्षों तक काम करने के अपने अनुभव का ज़िक्र करते हुए कहा कि उन्होंने प्रत्यक्ष देखा है कि किस प्रकार एक विनिर्माण इकोसिस्टम समय के साथ वैश्विक उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स शक्ति में बदल सकता है। उनके अनुसार भारत भी यही राह अपना सकता है, बशर्ते कंपनियाँ केवल असेंबली पर नहीं, बल्कि इंजीनियरिंग, डिज़ाइन और उत्पाद विकास पर भी निवेश करें।

उन्होंने यह भी याद दिलाया कि वर्ष 2015 के आसपास भारतीय स्मार्टफोन बाज़ार में घरेलू ब्रांडों की हिस्सेदारी लगभग आधी थी और एक भारतीय कंपनी कुछ समय के लिए सैमसंग को पीछे छोड़कर देश की सर्वाधिक बिकने वाली स्मार्टफोन ब्रांड भी बनी थी।

आगे की राह

कार्ल पेई ने कहा, 'भारत वैश्विक उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स कंपनियाँ ज़रूर बनाएगा। सवाल केवल यह है कि कब और कौन उन्हें बनाएगा।' यह बयान ऐसे समय में आया है जब केंद्र सरकार PLI योजनाओं के ज़रिए इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण को बढ़ावा दे रही है और Apple, Samsung जैसी कंपनियाँ भारत में उत्पादन विस्तार कर रही हैं। CMF की स्वतंत्र भारतीय इकाई का खाका कब अमल में आएगा, यह आने वाले महीनों में स्पष्ट होगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

एक सटीक व्यावसायिक दांव है — CMF को स्वतंत्र भारतीय इकाई बनाने की घोषणा इसकी पुष्टि करती है। लेकिन 2015 में घरेलू स्मार्टफोन ब्रांडों की आधी बाज़ार हिस्सेदारी अगले कुछ वर्षों में लगभग शून्य हो गई थी — यह भूलना उचित नहीं। R&D में निवेश की बात सही है, पर यह निवेश किस पैमाने पर, किस समयसीमा में और किस सरकारी नीति-समर्थन के साथ होगा, यह अभी अस्पष्ट है। मुख्यधारा की कवरेज जो चूक जाती है वह यह है कि 'भारतीय स्वामित्व वाली' और 'भारत में R&D' के दावे तब तक वास्तविक परिवर्तन नहीं लाते जब तक IP और डिज़ाइन नेतृत्व भी स्थानीय न हो — जो अभी भी बहुराष्ट्रीय टेक में दुर्लभ है।
RashtraPress
21 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

नथिंग सीईओ कार्ल पेई ने भारत के बारे में क्या कहा?
कार्ल पेई ने 21 सितंबर 2026 को कहा कि भारत वैश्विक उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स चैंपियन तैयार करने के निर्णायक मोड़ पर है। उनके अनुसार देश का विशाल स्मार्टफोन बाज़ार, युवा आबादी और मज़बूत विनिर्माण आधार इसे इस दिशा में सक्षम बनाते हैं।
CMF by Nothing को स्वतंत्र भारतीय कंपनी बनाने की योजना क्या है?
नथिंग अपने CMF ब्रांड को एक अलग भारतीय कंपनी के रूप में विकसित करने की योजना बना रही है, जिसमें भारतीय स्वामित्व बहुमत में होगा। इस इकाई की अपनी टीम और R&D क्षमताएँ भारत में ही बनाई जाएंगी, जबकि नथिंग इसमें साझेदार और शेयरधारक बनी रहेगी।
भारत के इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र की सबसे बड़ी चुनौती क्या है?
कार्ल पेई के अनुसार, भारत की सबसे बड़ी चुनौती अब विनिर्माण नहीं, बल्कि स्वदेशी अनुसंधान एवं विकास (R&D) क्षमता को मज़बूत करना है। केवल असेंबली पर निर्भर कंपनियाँ दीर्घकालिक वैश्विक प्रतिस्पर्धा में टिकाऊ बढ़त नहीं बना पाती हैं।
भारत दुनिया में स्मार्टफोन विनिर्माण में कौन से स्थान पर है?
कार्ल पेई के अनुसार भारत आज दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा स्मार्टफोन विनिर्माण केंद्र है। यह स्थिति बड़े पैमाने पर PLI योजना और Apple, Samsung जैसी कंपनियों के उत्पादन विस्तार की वजह से हासिल हुई है।
2015 में भारतीय स्मार्टफोन ब्रांडों की स्थिति क्या थी?
कार्ल पेई ने याद दिलाया कि 2015 के आसपास भारतीय स्मार्टफोन बाज़ार में घरेलू ब्रांडों की हिस्सेदारी लगभग आधी थी। एक भारतीय कंपनी कुछ समय के लिए सैमसंग को पीछे छोड़कर देश की सबसे ज़्यादा बिकने वाली स्मार्टफोन ब्रांड भी बनी थी।
राष्ट्र प्रेस
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