7 अगस्त 2026
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भारत-जापान रक्षा सहयोग: राजदूत नगमा मलिक ने रक्षा मंत्री कोइजुमी से की औपचारिक बातचीत

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भारत-जापान रक्षा सहयोग: राजदूत नगमा मलिक ने रक्षा मंत्री कोइजुमी से की औपचारिक बातचीत

सारांश

भारत और जापान ने रक्षा सहयोग की रफ्तार और तेज़ की — राजदूत मलिक और रक्षा मंत्री कोइजुमी की औपचारिक बातचीत, 8वीं रक्षा नीति वार्ता और 16 जुलाई के स्वागत समारोह के बाद यह संकेत है कि हिंद-प्रशांत में दोनों देशों की रणनीतिक साझेदारी एक नए स्तर पर पहुँच रही है।

मुख्य बातें

राजदूत नगमा मलिक ने 7 अगस्त 2026 को जापान के रक्षा मंत्री शिंजिरो कोइजुमी से औपचारिक फोन कॉल पर रक्षा सहयोग पर चर्चा की।
13 जुलाई को टोक्यो में 8वीं भारत-जापान रक्षा नीति वार्ता आयोजित हुई, जिसमें साइबर सुरक्षा, अंतरिक्ष और रक्षा औद्योगिक सहयोग पर ध्यान केंद्रित किया गया।
भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह ने, जापानी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व उपरक्षा मंत्री कानो कोजी ने किया।
16 जुलाई को कोइजुमी ने राजदूत मलिक के आवास पर स्वागत समारोह में भाग लिया और जापान-भारत रक्षा संबंध मजबूत करने का संकल्प लिया।
दोनों देशों ने हिंद-प्रशांत में नियम-आधारित व्यवस्था और भारत-जापान विशेष रणनीतिक और वैश्विक साझेदारी की प्रतिबद्धता दोहराई।

जापान में भारत की राजदूत नगमा मलिक ने 7 अगस्त 2026 को जापान के रक्षा मंत्री शिंजिरो कोइजुमी के साथ एक औपचारिक फोन कॉल पर बातचीत की, जिसमें दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग को और गहरा करने के अवसरों पर विचारों का आदान-प्रदान हुआ। टोक्यो स्थित भारतीय दूतावास ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर इस बातचीत की पुष्टि करते हुए कहा कि दोनों पक्षों ने द्विपक्षीय रक्षा संबंधों को नई ऊँचाई देने पर सहमति जताई।

बातचीत में क्या हुआ

भारतीय दूतावास ने एक्स पर पोस्ट किया कि 'राजदूत मलिक ने रक्षा मंत्री शिंजिरो कोइजुमी से एक औपचारिक फोन कॉल पर बात की और दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग को और मजबूत करने के मौकों पर विचारों का आदान-प्रदान किया।' जापान के रक्षा मंत्रालय ने भी एक्स पर पुष्टि की कि यह सहयोग हिंद-प्रशांत क्षेत्र की शांति और स्थिरता के लिए अनिवार्य है।

कोइजुमी ने स्पष्ट किया कि भारत और जापान के बीच रक्षा सहयोग न केवल दोनों देशों, बल्कि इस पूरे क्षेत्र और विश्व की शांति व स्थिरता के लिए ज़रूरी है। जापानी रक्षा मंत्रालय ने कहा कि सेल्फ-डिफेंस फोर्सेज दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग को और गहरा करेंगी।

पिछले कुछ हफ्तों की गतिविधियाँ

16 जुलाई को कोइजुमी ने राजदूत मलिक के आवास पर आयोजित एक स्वागत समारोह में भाग लिया, जिसमें दोनों पक्षों ने रक्षा संबंधों को और मजबूत करने का संकल्प लिया। कोइजुमी ने एक्स पर लिखा, 'आज रात भारतीय राजदूत के आवास पर आयोजित एक रिसेप्शन में शामिल हुआ। राजदूत नगमा मोहम्मदी मलिक के साथ जापान-भारत रक्षा संबंधों को मजबूत करने का संकल्प लिया।'

इससे पहले 13 जुलाई को टोक्यो में 8वीं भारत-जापान रक्षा नीति वार्ता आयोजित हुई थी, जिसमें रक्षा औद्योगिक सहयोग, तकनीकी नवाचार, साइबर सुरक्षा, अंतरिक्ष और हिंद-प्रशांत में साझा रणनीतिक हितों पर विस्तार से चर्चा हुई।

8वीं रक्षा नीति वार्ता: प्रमुख बिंदु

रक्षा मंत्रालय के अनुसार, 13 जुलाई की वार्ता में भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह ने किया, जबकि जापानी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व अंतरराष्ट्रीय मामलों के उपरक्षा मंत्री कानो कोजी ने किया। दोनों पक्षों ने सेनाओं के बीच बातचीत, जॉइंट हेडक्वार्टर सहयोग, समुद्री सहयोग, रक्षा अभ्यास, क्षमता निर्माण, समुद्री प्रौद्योगिकी सहित रक्षा उपकरण और तकनीकी सहयोग की व्यापक समीक्षा की।

यह ऐसे समय में आया है जब हिंद-प्रशांत क्षेत्र में रणनीतिक प्रतिस्पर्धा तेज हो रही है। दोनों देशों ने अंतरराष्ट्रीय कानून के सम्मान पर आधारित एक स्वतंत्र, खुले और नियम-आधारित हिंद-प्रशांत क्षेत्र को बढ़ावा देने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।

भारत-जापान विशेष रणनीतिक साझेदारी

जापान दौरे के दौरान रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह ने कोइजुमी से मुलाकात की और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह का अभिवादन पहुँचाया। दोनों पक्षों ने भारत-जापान विशेष रणनीतिक और वैश्विक साझेदारी की बढ़ती गति को पुनः रेखांकित किया। गौरतलब है कि यह साझेदारी हाल के वर्षों में रक्षा, व्यापार और तकनीक — तीनों मोर्चों पर तेज़ी से आगे बढ़ी है।

आने वाले महीनों में दोनों देशों के बीच संयुक्त सैन्य अभ्यास और रक्षा औद्योगिक सहयोग के नए अध्याय खुलने की उम्मीद है, जो इस द्विपक्षीय संबंध को और ठोस आधार देंगे।

संपादकीय दृष्टिकोण

स्वागत समारोह और अब औपचारिक फोन कॉल — महज़ कूटनीतिक औपचारिकता नहीं है; यह हिंद-प्रशांत में चीन की बढ़ती उपस्थिति के जवाब में दोनों लोकतंत्रों की सुविचारित रणनीतिक पुनर्स्थापना है। असली परीक्षा यह है कि साइबर सुरक्षा और रक्षा औद्योगिक सहयोग के वादे ठोस समझौतों और संयुक्त उत्पादन में कब तब्दील होते हैं। भारत के लिए जापान महज़ एक साझेदार नहीं, बल्कि क्वाड की धुरी का अहम स्तंभ है — और इस रिश्ते की गहराई पर क्षेत्रीय संतुलन का बहुत कुछ निर्भर करता है।
RashtraPress
7 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

राजदूत नगमा मलिक और जापानी रक्षा मंत्री कोइजुमी की बातचीत किस बारे में थी?
7 अगस्त 2026 को हुई इस औपचारिक फोन कॉल में दोनों पक्षों ने भारत-जापान रक्षा सहयोग को और मजबूत करने के अवसरों पर विचारों का आदान-प्रदान किया। कोइजुमी ने कहा कि यह सहयोग हिंद-प्रशांत क्षेत्र और विश्व की शांति व स्थिरता के लिए ज़रूरी है।
8वीं भारत-जापान रक्षा नीति वार्ता में क्या हुआ?
13 जुलाई 2026 को टोक्यो में हुई इस वार्ता में रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह और उपरक्षा मंत्री कानो कोजी के नेतृत्व में दोनों पक्षों ने रक्षा औद्योगिक सहयोग, साइबर सुरक्षा, अंतरिक्ष और समुद्री प्रौद्योगिकी पर चर्चा की। दोनों पक्षों ने हिंद-प्रशांत में मिलकर काम जारी रखने पर सहमति जताई।
भारत-जापान रक्षा सहयोग हिंद-प्रशांत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है?
दोनों देशों ने अंतरराष्ट्रीय कानून पर आधारित स्वतंत्र, खुले और नियम-आधारित हिंद-प्रशांत क्षेत्र को बढ़ावा देने की प्रतिबद्धता जताई है। यह साझेदारी क्षेत्रीय सुरक्षा संतुलन में दोनों देशों की सामूहिक भूमिका को रेखांकित करती है।
16 जुलाई के स्वागत समारोह में क्या हुआ था?
16 जुलाई को रक्षा मंत्री कोइजुमी ने राजदूत मलिक के आवास पर आयोजित स्वागत समारोह में भाग लिया। कोइजुमी ने एक्स पर लिखा कि उन्होंने राजदूत मलिक के साथ जापान-भारत रक्षा संबंधों को मजबूत करने का संकल्प लिया।
भारत-जापान विशेष रणनीतिक और वैश्विक साझेदारी क्या है?
यह भारत और जापान के बीच उच्चतम स्तर की द्विपक्षीय साझेदारी है, जो रक्षा, व्यापार, तकनीक और कूटनीति को एक साथ समेटती है। हाल की वार्ताओं में दोनों देशों ने इस साझेदारी की बढ़ती गति को पुनः रेखांकित किया है।
राष्ट्र प्रेस
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