21 जुलाई 2026
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भारत वैश्विक एजेंडे की सबसे प्रभावशाली आवाज़ : नॉर्थ मैसिडोनिया की राष्ट्रपति दावकोवा

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भारत वैश्विक एजेंडे की सबसे प्रभावशाली आवाज़ : नॉर्थ मैसिडोनिया की राष्ट्रपति दावकोवा

सारांश

नॉर्थ मैसिडोनिया की राष्ट्रपति दावकोवा ने स्कोप्जे में राष्ट्रपति मुर्मु के साथ बैठक के बाद भारत को मानव इतिहास की सबसे स्थायी सभ्यताओं में से एक और वैश्विक एजेंडे की सबसे प्रभावशाली आवाज़ बताया। दोनों देशों ने राजनीतिक और आर्थिक साझेदारी को नई ऊँचाइयों पर ले जाने की प्रतिबद्धता जताई।

मुख्य बातें

नॉर्थ मैसिडोनिया की राष्ट्रपति गोर्डाना सिल्यानोव्स्का-दावकोवा ने 21 जुलाई 2026 को भारत को वैश्विक एजेंडे की सबसे प्रभावशाली आवाज़ों में बताया।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु के साथ संयुक्त प्रेस वार्ता में दावकोवा ने भारत की सभ्यतागत, आर्थिक और तकनीकी उपलब्धियों की सराहना की।
दोनों देशों ने स्कोप्जे और नई दिल्ली के बीच राजनीतिक संवाद की गति बनाए रखने और आर्थिक साझेदारी मज़बूत करने पर सहमति जताई।
दावकोवा ने महात्मा गांधी , स्वामी विवेकानंद , पंडित रवि शंकर और सत्यजीत रे का उल्लेख करते हुए भारत की सांस्कृतिक विरासत को मानवता की साझा धरोहर बताया।
भारत की आर्थिक प्रगति को 21वीं सदी की सबसे प्रेरणादायक सफलता की कहानी करार दिया गया।

नॉर्थ मैसिडोनिया की राष्ट्रपति गोर्डाना सिल्यानोव्स्का-दावकोवा ने 21 जुलाई 2026 को स्कोप्जे में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु के साथ संयुक्त प्रेस वार्ता में भारत को दुनिया की सबसे प्रभावशाली आवाज़ों में से एक बताया। उन्होंने कहा कि भारत न केवल सबसे बड़ा लोकतंत्र और तेज़ी से बढ़ती अर्थव्यवस्था है, बल्कि वैश्विक एजेंडा तय करने में भी उसकी भूमिका निर्णायक होती जा रही है।

सभ्यतागत विरासत की सराहना

दावकोवा ने कहा, "जब हम भारत की बात करते हैं, तो हम सिर्फ एक देश की नहीं, बल्कि मानव इतिहास की सबसे बड़ी और सबसे लंबे समय तक कायम रहने वाली सभ्यताओं में से एक की बात करते हैं।" उन्होंने यह भी कहा कि भारत ने अपनी संस्कृति, दर्शन और ऐतिहासिक धरोहरों के माध्यम से पूरी मानवता को समृद्ध किया है।

हिमालय से लेकर हिंद महासागर तक और ताजमहल की भव्यता से लेकर सदियों पुराने महान मंदिरों तक — दावकोवा ने भारत की सांस्कृतिक यात्रा को मानवता की साझा धरोहर बताया। उन्होंने महात्मा गांधी के अहिंसा के दर्शन, स्वामी विवेकानंद की आध्यात्मिक सोच, पंडित रवि शंकर की कला और सत्यजीत रे की सिनेमाई प्रतिभा का विशेष उल्लेख किया।

आर्थिक और तकनीकी उत्कर्ष

दावकोवा ने भारत की आर्थिक प्रगति को 21वीं सदी की सबसे प्रेरणादायक सफलता की कहानियों में से एक बताया। उन्होंने कहा, "सिर्फ एक पीढ़ी के भीतर भारत दुनिया की प्रमुख आर्थिक शक्तियों में शामिल हो गया है और नवाचार, डिजिटल तकनीक तथा उद्यमिता का वैश्विक केंद्र बन चुका है।"

उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि भारत ने अपनी पारंपरिक धरोहर को सहेजते हुए खुद को आर्थिक विकास, तकनीकी नवाचार और वैज्ञानिक उपलब्धियों में अग्रणी देशों की पंक्ति में स्थापित किया है। यह संतुलन भारत को वैश्विक मंच पर एक अनूठी पहचान देता है।

द्विपक्षीय संबंधों को नई दिशा

दोनों राष्ट्रपतियों के बीच हुई वार्ता को दावकोवा ने "बेहद सौहार्दपूर्ण, खुली और भविष्य पर केंद्रित" बताया। दोनों देशों ने इस बात पर सहमति जताई कि स्कोप्जे और नई दिल्ली के बीच राजनीतिक संवाद की गति आगे भी बनाए रखी जाएगी।

यह भी तय हुआ कि सरकारों, मंत्रियों, संसदों और अन्य संस्थाओं के बीच संपर्क और सहयोग को पहले से अधिक नियमित, सुव्यवस्थित और प्रभावी बनाया जाएगा। दावकोवा ने स्पष्ट कहा, "अब समय आ गया है कि हमारी आर्थिक साझेदारी भी हमारे राजनीतिक रिश्तों जितनी मजबूत बने।"

आगे की राह

दोनों देशों ने द्विपक्षीय संबंधों को नई ऊँचाइयों पर ले जाने की प्रतिबद्धता जताई है। दावकोवा ने यह भी कहा कि नॉर्थ मैसिडोनिया, भारतीय साझेदारों को बहुमूल्य योगदान दे सकता है। गौरतलब है कि यह बैठक ऐसे समय में हुई है जब भारत वैश्विक कूटनीति में अपनी उपस्थिति तेज़ी से बढ़ा रहा है और नए द्विपक्षीय संबंधों को प्राथमिकता दे रहा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

ऐसी प्रशंसाएँ अक्सर ठोस द्विपक्षीय व्यापार और निवेश में नहीं बदल पातीं — भारत-नॉर्थ मैसिडोनिया आर्थिक संबंध अभी भी सीमित हैं। असली परीक्षा यह होगी कि इस बैठक के बाद दोनों देशों के बीच व्यापार, शिक्षा और तकनीक के क्षेत्र में कोई ठोस समझौते सामने आते हैं या नहीं।
RashtraPress
21 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

नॉर्थ मैसिडोनिया की राष्ट्रपति ने भारत के बारे में क्या कहा?
राष्ट्रपति गोर्डाना सिल्यानोव्स्का-दावकोवा ने 21 जुलाई 2026 को स्कोप्जे में कहा कि भारत वैश्विक एजेंडे की सबसे प्रभावशाली आवाज़ों में से एक है और मानव इतिहास की सबसे स्थायी सभ्यताओं में से एक है। उन्होंने भारत की आर्थिक प्रगति को 21वीं सदी की सबसे प्रेरणादायक सफलता की कहानी बताया।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु और दावकोवा की बैठक में क्या तय हुआ?
दोनों नेताओं ने भारत और नॉर्थ मैसिडोनिया के राजनीतिक और आर्थिक संबंधों को नई ऊँचाइयों पर ले जाने की प्रतिबद्धता जताई। स्कोप्जे और नई दिल्ली के बीच सरकारों, मंत्रियों, संसदों और संस्थाओं के बीच संपर्क को अधिक नियमित और प्रभावी बनाने पर सहमति बनी।
नॉर्थ मैसिडोनिया की राष्ट्रपति ने भारत की किन हस्तियों का उल्लेख किया?
दावकोवा ने महात्मा गांधी के अहिंसा दर्शन, स्वामी विवेकानंद की आध्यात्मिक सोच, पंडित रवि शंकर की संगीत कला और सत्यजीत रे की सिनेमाई प्रतिभा का विशेष उल्लेख किया। उन्होंने इन्हें भारत की उस सांस्कृतिक विरासत का हिस्सा बताया जिसने पूरी दुनिया को प्रभावित किया है।
भारत और नॉर्थ मैसिडोनिया के बीच आर्थिक संबंधों पर क्या कहा गया?
दावकोवा ने कहा कि अब समय आ गया है कि दोनों देशों की आर्थिक साझेदारी उनके राजनीतिक रिश्तों जितनी मज़बूत बने। उन्होंने यह भी कहा कि नॉर्थ मैसिडोनिया भारतीय साझेदारों को बहुमूल्य योगदान दे सकता है।
यह बैठक कूटनीतिक दृष्टि से क्यों महत्वपूर्ण है?
यह बैठक ऐसे समय में हुई है जब भारत वैश्विक कूटनीति में अपनी उपस्थिति तेज़ी से बढ़ा रहा है। नॉर्थ मैसिडोनिया जैसे मध्य-यूरोपीय देश का भारत के प्रति यह उत्साह दर्शाता है कि भारत को एक विश्वसनीय और प्रभावशाली वैश्विक साझेदार के रूप में देखा जा रहा है।
राष्ट्र प्रेस
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